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अपनी Disability को Ability बनाने वाले कश्मीर के कमेंटेटर इरफ़ान भट्ट

क्रिकेट में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं चाहें वो टाइगर के नाम से मशहूर मंसूर अली ख़ान पटौदी हो या स्पिनर भगवत चंद्रशेखर हो। दिव्यांग (Disability) और दूसरी शारीरिक परेशानियों में खुद को साबित करते हुए उन्होंने ना सिर्फ़ इंटरनेशनल क्रिकेट खेले बल्कि अपने देश को शानदार कामयाबी भी दिलाई हैं। ऐसे ही एक स्पोर्ट्समैन हैं इरफ़ान भट्ट जिन्होंने अपनी डिसेबिलिटी को एबिलिटी बनाया और देशभर में अपना नाम रौशन किया। वो एक नॉर्मल इंसान की तरह ही रोज़मर्रा की ज़िंदगी के काम करते है। बता दें कि इरफ़ान भट्ट कश्मीर में पेशे से कमेंटेटर हैं। 

कैमरा, ट्राइपॉड और मोबाइल की मदद से वो खुद कमेंट्री करते हैं। कमेंटेटर इरफ़ान ने मुश्किल हालातों को दरकिनार करते हुए अपनी बेहतरीन आवाज़ से कमेंट्री के मैदान में पहचान बनाई है। इस काम के लिए उनको कई अवॉर्ड से नवाज़ा जा चुका है। 

कैसा था इरफ़ान का कमेंटेटर बनने तक का सफ़र 

इरफ़ान ने DNN24 को बताया कि साल 2021 में उनका सफ़र शुरू हुआ लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें समाज से काफी संघर्ष झेलना पड़ा। उन्होंने कश्मीर यूनिवर्सिटी से एमए और बीएड किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एक अच्छी सरकारी नौकरी चाहते थे। लेकिन उन्हें रोज़गार नहीं मिल सका लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 

वो बताते हैं कि “इन परेशानियों ने मेरे अंदर के जज़्बातों को बाहर निकाला और मेरी हिम्मत बढ़ाई। उन्ही परेशानियों ने मुझे इस काम के लिए तैयार किया।” उनका बचपन से सपना था कि समाज उन्हें उनके काम से पहचाने है। वो लोगों के सामने एक उदाहरण सेट करना चाहते थे कि एक दिव्यांग इंसान भी अपनी ज़िंदगी में कामयाबी हासिल कर सकता है। 

अपनी दमदार अवाज़ से खिलाड़ियों में जान भरने वाले इरफ़ान

अगर आपके अंदर कुछ कर जानें का जज़्बा है, तो आप दुनिया की परवाह किए बगैर कुछ भी कर सकते हैं। किसी भी चीज़ की लगन आपसे बहुत कुछ करवा सकती है। इरफ़ान को किक्रेट से काफी लगाव है। इरफ़ान घर पर कमेंट्री करके सोशल मीडिया पर अपनी आवाज़ के दमख़म से मैच को रोचक बना देते हैं। आजकल इरफ़ान की कमेंट्री की तारीफ़ हर तरफ़ हो रही है।

खिलाड़ियों को मैदान में उतरने से लेकर मैच जीतने तक अपनी दमदार अवाज़ से खिलाड़ियों में जान भर देते हैं। इरफ़ान ने DNN24 से बात करते हुए कहा कि, “इस कामयाबी के पीछे कड़ी मेहनत और घर वालों का सपोर्ट रहा है। मेरा ख़्वाब है कि, मैं आईपीएल और आईसीसी में कमेंट्री करूं”।

वो कहते हैं कि “विकलांग से दिव्यांग कहकर बुलाना, इस शब्द ने काफी चीज़े बदली और मुझे सुनने में काफी अच्छा लगता है और जो दिव्यांग  हैं उन्हें भी अब समझ आ गया है कि वो अपनी ज़िंदगी में कुछ कर सकते हैं। और कर भी रहे हैं।” इरफ़ान का सपना है कि वो अपनी कमेंट्री से इंटरनेशनल लेवल पर जम्मू कश्मीर और पूरे देश को रिप्रेजेंट करें। 

सोशल मीडिया की मदद से लोगों के बीच बनाई पहचान

जिन लोगों ने उन्हे इस सफ़र में सपोर्ट किया है वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना चाहते हैं। “जब मैंने इस फील्ड में कदम रखा तो मेरी आवाज़ अच्छी थी, मेरे अल्फाज़, बयानी और कमेंट्री से संबंधित ज़रूरी चीज़ों को मैंने सीखा, सुना और उसे अप्लाई किया। लोगों को मेरा काम पसंद आया।”

जब शुरुआत में इरफ़ान कमेंट्री करते थे तो लोगों को नहीं पता था कि कैमरे के पीछे किसकी आवाज़ है लेकिन कुछ समय पहले उनकी कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों को पता चला कि इरफ़ान कौन है। अब उनका सपना है कि वो रवि शास्त्री, संजय मांजरेकर, आकाश चोपड़ा, इरफ़ान पठान इन कॉमेंट्रेटर के साथ बैठें। भारत और भारतीय क्रिकेट टीम की सेवा करना चाहता हैं। 

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