Friday, March 13, 2026
31.7 C
Delhi

गोरखपुर की विभा की ‘लविंग आर्ट्स’ है मशहूर

कोरोनाकाल एक ऐसा दौर रहा जब लोग एक दूसरे से संपर्क खो चुके थे। और अपनो से मिलना जुलना बंद हो गया था। यह कहना गलत नहीं होगा कि कई परेशानियों के बाद भी इस दौर में लोगों ने अपने आप से मुलाकात की, अपनी आर्ट से मुलाकात की। एक ऐसी ही महिला है जिन्होंने अपनी कला को कोरोनाकाल में पहंचाना। गोरखपुर की रहने वाली विभा जो अलग-अलग पैटर्न में धागों और डोरियों को गूंथने से खूबसूरती से बुनी गई मैक्रेम आर्ट (लविंग आर्ट्स) से कृतियां तैयार करती हैं। विभा का मानना है कि कोविड-19 लॉकडाउन में उन्होंने कला के साथ अपने लंबे समय से खोए हुए कौशल को पुनर्जीवित किया है।

कैसे की शरूआत 

विभा ने DNN24 को बताया कि “सर्दियों का मौसम था उस समय मुझे लगा था कि भगवान कान्हा जी के लिए ऊनी कपड़े से बनी पोशाक उनके लिए नहीं बना पाई थी। तब मैंने अपनी मेड से कहा कि मुझे ऊनी कपड़ा लाकर दो और किसी से पोशाक बनवाओं। तब उसने मुझसे कहा मैं किसी ऐसे इंसान को नहीं जानती जो इसे बुन सके। तब मैंने खुद पोशाक बनाने की कोशिश की उस वक्त जो भी मेरे पास सामान था मैंने उनका इस्तेमाल करके बनाना शुरू किया और भगवान जी की वह पोशाक बहुत सुंदर बनी और सभी लोगों ने सराहा। मुझे ऐस लगता है कि मैं अपने बचपन के सारे शौक अब पूरा कर रही हूं।”

लविंग आर्ट्स
विभा की DNN24 से बातचीत (Photo: DNN24)

शुरूआत में विभा ने मैक्रो की रस्सी से काम शुरू किया था। लेकिन उस रस्सी में रूचि ना होने की वजह से कॉटन की रस्सी से प्रोडक्ट बनाना शुरू किया। उस समय गोरखपुर में ऐसी कोई जगह नहीं थी जहां उन्हें कॉटन मैक्रो मिल सके। उसके बाद कुछ इंटरनेट पर ढूंढ़ने की कोशिश की लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। उसके विभा दिल्ली अपने मायके आ गई घर आने के बाद उनके भाईयों ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया। उनके भाई विभा के साथ सामान खरीदने जाते थे और विभा को सारे बाजारों से रूबरू कराया। इसके बाद धीरे-धीरे इस काम में विभा की रूचि बढ़ती चली गई। विभा कहती है कि “आज मैं बहुत हैरान होती हूं कि कैसे यहां तक पहंच पाई हूं मेरे पूरे परिवार के सपोर्ट के बिना मैं यह काम नहीं कर सकती थी। उन्हीं की बदौलत आज मैं यहां हूं।”

गांव-गांव जाकर लोगों को दी ट्रेनिंग

अब विभा गांव गांव जाकर लोगों को ट्रेनिंग देती है सीखाने के बाद उन्हें बल्क में ऑर्डर देती हैं। गांव के लोग ऑर्डर तैयार करके विभा को भेजते है। विभा के इस काम से गांव के लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। देखा जाए इस कला को हाथों की मदद से ही बुना जाता है। इस कला को 10 साल के बच्चे से लेकर उम्रदराज़ लोग भी आज़मा सकते हैं।

विभा चपप्ल, पर्स, पॉट हैंगर, दीवारों को सजाने के सामानों से लेकर भगवान जी के झूले भी बनाती है। अपने इस काम वह ‘लविंग आर्ट्स’ के नाम से पहचान देती है। इस नाम के पीछे कुछ ख़ास वजह वह नहीं बताती है। वह कहती है कि “मुझे इसकी नोट्स बनाना बहुत पसंद आया इसलिए मैने इसका नाम ‘लविंग नोट्स’ रखा। खुद के ‘लविंग आर्ट्स’ से बनाए झुले में उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को झूला झूलाया और इसके ऑर्डर मुझे काफी आते है। लोगों को मेरा यह काम बहुत पसंद आ रहा है। विभा को अब तक बंधन बार के करीब एक लाख ऑर्डर मिल चुक है।

अगर आपको भी उनके काम को पसंद करते है और खरीदना चाहते है तो विभा का मोबाइल नंबर है 9455999666 इस नंबर पर संपर्क करके अपना पसंदीदा सामान ऑर्डर कर सकते है।

ये भी पढ़ें: मोहम्मद आशिक और मर्लिन: एक अनोखी कहानी जिसने बदल दिया शिक्षा का परिपेक्ष्य

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

चाय वाले से पेरिस तक Digital Revolution: कैसे UPI ने भारत को बना दिया Payment का बादशाह

ज़रा सोचिए... एक चाय का ठेला हो या शानदार...

जहां से सिंथेटिक ड्रग्स की शुरुआत, वहीं से मुकाबला

जानिए कि ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा...

Topics

जहां से सिंथेटिक ड्रग्स की शुरुआत, वहीं से मुकाबला

जानिए कि ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा...

बागेश्वर का पीपल साहब

गुरु नानक देव जी ने मानवता, प्रेम और समानता...

Related Articles

Popular Categories