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‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

एक ऐसे विद्वान और वैज्ञानिक जिनका एक रिश्ता भारत से भी रहा, नाम है अल-बीरूनी (al-Biruni)। दुनियाभर के महान वैज्ञानिकों में शुमार होने वाले अल-बिरूनी उस दौर में पैदा हुए, जब पूर्वी इस्लामी दुनिया में राजनीतिक उथलपुथल माहौल था। अल-बीरूनी सिर्फ़ वैज्ञानिक ही नहीं थे, बल्कि वो एक गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, एंथ्रोग्राफिस्ट, मानवविज्ञानी, इतिहासकार और भूगोलज्ञ भी थे।

इनसाइक्लेपेडिया ब्रिटानिका के मुताबिक, अल-बीरूनी का जन्म 4 सितंबर 973 ईस्वी में आज के उज्बेकिस्तान के खुरासान प्रांत में ख्वारिज़्म में हुआ था।

अल-बीरूनी ने छह अलग-अलग शासकों के अधीन काम किया। उनके काम की सूची बनाना इतिहासकारों के लिए इसलिए भी आसान रहा क्योंकि जब वो 60 साल के थे, तब उन्होंने खुद अपने कामों की एक सूची तैयार कर ली थी। हालांकि, अल-बीरूनी 70 से अधिक सालों तक जीवित रहे। ऐसे में उनके बाद के कुछ काम इस सूची में शामिल नहीं हैं। इस सूची और इसके बाद खोजे गए कामों को मिलाकर, इतिहासकारों के मुताबिक (इनसाक्लोपेडिया ब्रिटानिका) अल-बीरूनी ने कुल 146 किताबें लिखी हैं। उनमें से 22 ही मिल पाई हैं और उनमें भी आधी ही प्रकाशित हो पाई हैं।

भारतीय संस्कृति को लेकर उनका काम हिंदुस्तान पर किसी भी ब्योरे में सबसे बढ़िया माना जाता है। किताब ‘तहकीक मा लिल-हिंद मिन माकुलाह माक्बूला फी अल अक्ल आ मारदुर्लाः (तहकीक-ए-हिंद)’ में हर वो चीज दर्ज है, जो अल-बीरूनी हिंदुस्तान के बारे में जुटा पाए थे। इसमे हिंदुस्तान का विज्ञान, धर्म, साहित्य और इसके रीति-रिवाजों का ज़िक्र है।

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ये भी पढ़ें: दो इमारतों की ज़बानी- एक ही आस्ताने में मंदिर और मस्जिद

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