आज से कोई 5000 साल पहले, जब दुनिया की अधिकांश आबादी गुफाओं में रह रही थी या शिकार पर निर्भर थी, पंजाब की धरती पर दुनिया की सबसे उन्नत सभ्यताओं में से एक पनप रही थी। ये वो सुनहरा दौर था जब पंजाब सिर्फ “पांच नदियों की भूमि” नहीं, बल्कि एक विशाल साम्राज्य का सेंटर प्लेस हुआ करता था। जी हां, हम बात कर रहे हैं हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) की, जिसकी नींव में पंजाब की उपजाऊ मिट्टी ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
नदियों के किनारे बसा एक सुनियोजित सपना
पंजाब (Punjab) का नाम ही यहां की जीवनदायिनी नदियों- रावी, चिनाब, झेलम, ब्यास और सतलज से बना है। ये वही नदियां हैं जिनके तटों पर हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) ने फलना-फूलना शुरू किया। ये कोई संयोग नहीं था। इन नदियों की जलोढ़ मिट्टी ने खेती को समृद्ध किया, जिससे यहां बड़ी आबादी बस सकी और शहरों का उदय हुआ। ये क्षेत्र इतना अहम था कि इस सभ्यता का सबसे पहला और प्रसिद्ध स्थल हड़प्पा (जो अब पाकिस्तानी पंजाब में है) इसी भूमि पर खोजा गया, जिसके नाम पर इस पूरी सभ्यता को ‘हड़प्पा सभ्यता’ कहा जाने लगा।

जब इंजीनियरिंग का जन्म हुआ
हड़प्पा सभ्यता ((Harappan Civilization)) की सबसे बड़ी देन थी उसकी नगर योजना (Urban Planning)। आज के आधुनिक शहरों की तरह, हड़प्पा के नगरों की सड़कें एक दूसरे को समकोण (Grid Pattern) पर काटती थीं। सोचिए, उस जमाने में लोग पक्की ईंटों से मकान बनाते थे और हर घर में नालियां होती थीं, जो सड़कों की बड़ी ढकी हुई नालियों से जुड़ी होती थीं। ये जल निकासी प्रणाली (Drainage System) उस समय की दुनिया में सबसे बेहतरीन थी और आज भी पुरातत्वविदों (Archaeologists) को आश्चर्यचकित (Astonished) करती है। हड़प्पा के लोग स्वच्छता और संगठन (Cleanliness and Organization) के मामले में कितने आगे थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

पंजाब के पुरातात्विक ख़ज़ाने: रोपड़ और संघोल
हड़प्पा सभ्यता की छाप सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं थी। भारतीय पंजाब में भी इसके कई महत्वपूर्ण केंद्र मिले हैं। इनमें सबसे प्रमुख है रोपड़ (रूपनगर)। सतलज नदी (Satluj River) के तट पर बसा यह शहर आज़ादी के बाद भारत में खोजा गया पहला हड़प्पाई स्थल था। यहां हुई खुदाइयों में हड़प्पा काल से लेकर मध्यकाल तक के अवशेष मिले हैं, जो इस जगह की सांस्कृतिक निरंतरता को दिखाते हैं। रोपड़ में स्थित पुरातत्व संग्रहालय में मिली मिट्टी के बर्तन, मनके, उपकरण और मूर्तियां इस बात की गवाही देते हैं कि ये क्षेत्र कभी इस महान सभ्यता का हिस्सा था।
एक किसान, एक व्यापारी और एक कलाकार की कहानी
पंजाब के हड़प्पाई लोग सिर्फ अच्छे इंजीनियर ही नहीं, बल्कि कुशल किसान, व्यापारी और कलाकार भी थे। वे गेहूं और जौ जैसी फसलें उगाते थे और विशाल अन्नागारों में अनाज जमा करते थे। वे दूर-दूर तक व्यापार करते थे, जिसके प्रमाण मिले कांस्य के उपकरण, आभूषण और रंगीन मनके आज भी हमें उनकी कारीगरी के किस्से सुनाते हैं। खुदाई में मिली मुहरों पर बने जानवरों के चित्र और रहस्यमयी लिपि के निशान बताते हैं कि उनके पास एक समृद्ध सांस्कृतिक और प्रशासनिक जीवन था।

आज भी जिंदा है वह विरासत
1900 ईसा पूर्व के आसपास ये महान सभ्यता धीरे-धीरे समाप्त हो गई। नदियों के मार्ग बदलने, जलवायु परिवर्तन या अन्य कारणों से इसके शहर उजड़ गए . लेकिन क्या ये सभ्यता पूरी तरह खत्म हो गई? बिल्कुल नहीं। हड़प्पा की शहरी योजना, कृषि परंपराएं और सांस्कृतिक मान्यताएं पंजाब की धरती में इस तरह रच-बस गईं कि उनकी झलक आज भी देखी जा सकती है। जब हम किसी पंजाबी गांव में साफ-सुथरे घर और सुनियोजित गलियां देखते हैं, तो वह उसी हड़प्पाई विरासत की छाप होती है। पंजाब का प्रारंभिक इतिहास हड़प्पा के बिना अधूरा है। ये वो आधारशिला है, जिस पर पंजाब की सांस्कृतिक इमारत खड़ी हुई है, और आने वाली पीढ़ियां इसी मिट्टी में दबे उस सुनहरे अतीत के किस्से पढ़ती रहेंगी।
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