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भावनाओं के तूफ़ान में भी शांत रहना सिखाती है स्वामी स्वरूपानंद की नई किताब ‘You Are The Sky’

क्या आपने कभी महसूस किया है कि गुस्सा, डर या उदासी आपके फैसलों को चला रहे हैं? आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी पहेली यही है कि हम भावनाओं को महसूस तो करते हैं, पर उन्हें संभालना नहीं जानते। इसी पहेली का समाधान लेकर आई है चिन्मय मिशन के ग्लोबल हेड स्वामी स्वरूपानंद (Swami Swaroopananda, Global Head of Chinmaya Mission) की नई किताब ‘You Are the Sky: An Ancient Guide to Modern Feelings’।

पैन मैकमिलन इंडिया से प्रकाशित (Published by Pan Macmillan India) इस किताब का विमोचन 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में हुआ। सबसे दिलचस्प बात ये रही कि औपचारिक लॉन्च से पहले ही करीब 7,000 प्रतियां बिक चुकी थीं। ये अपने आप में बताता है कि रीडर्स इस किताब का कितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

Pic Credit: Special Arrangement

क्यों ख़ास है ये किताब?

इस किताब की सबसे बड़ी ख़ूबी इसका Central metaphor है और वो है आकाश और बादल (Sky and Clouds)। जैसे बादल आकाश से गुजरते हैं, उसका रूप बदलते हैं, पर आकाश का मूल स्वभाव कभी नहीं बदलता वैसे ही भावनाएं हमारे मन से गुजरती हैं, पर हमारी असली पहचान तय नहीं करतीं। यही विचार किताब की पूरी आत्मा है।

स्वामी स्वरूपानंद कहते हैं, ‘भावनाएं हमारी जिंदगी को भरपूर बनाती हैं। पर जब हम उन्हें दबा देते हैं या बिना सोचे प्रतिक्रिया दे देते हैं, तो मन की शांति खो जाती है।‘ ये किताब प्राचीन वेदांत ज्ञान को आधुनिक मनोविज्ञान, न्यूरोलॉजी और फिजियोलॉजी से जोड़ती है यानी 5,000 साल पुराना ज्ञान, आज की विज्ञान-सम्मत समझ (Scientifically sound understanding) के साथ।

किन सवालों के जवाब देती है?

  • गुस्सा, डर, जलन, अपराधबोध और उदासी हमारे व्यवहार और रिश्तों को कैसे आकार देते हैं?

क्या प्यार और खुशी जैसी सकारात्मक भावनाएं भी हमें निर्भर बना सकती हैं?

  • भावना को महसूस करने और उससे पूरी तरह जुड़ जाने में क्या फ़र्क है?

किताब इन भावनाओं को दबाने की सलाह नहीं देती, बल्कि सजगता (awareness) से उन्हें पहचानने पर जोर देती है। ताकि आप भावनाओं का इस्तेमाल अपनी पर्सनल और पेशेवर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कर सकें।

Pic Credit: Special Arrangement

एक ऐतिहासिक मौका

ये किताब ऐसे समय आई है जब चिन्मय मिशन अपना 75वां साल मना रहा है। 1951 में स्वामी चिन्मयानंद द्वारा स्थापित ये संस्था आज दुनिया भर में 350 से ज़्यादा केंद्रों के ज़रिए वेदांत का ज्ञान फैला रही है। समारोह का समापन 23-25 अक्टूबर को नई दिल्ली में चिन्मय ग्लोबल सम्मेलन के साथ होगा।

लॉन्च कार्यक्रम में फिल्मकार और टॉक शो होस्ट विनय भारद्वाज के साथ स्वामीजी की दिलचस्प बातचीत हुई, जिसमें राजनेता, वरिष्ठ वकील, सीईओ, मनोवैज्ञानिक, कलाकार और मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

पैन मैकमिलन इंडिया की एडिटोरियल डायरेक्टर पूनम कृष्णन ने कहा, ‘आज की दुनिया में, जहां सब कुछ हम पर हावी होता लगता है, अपने मन के साथ रिश्ता बदलना एक बहुत ज़रूरी हुनर है।’

 स्वामी स्वरूपानंद के बारे में

स्वामी स्वरूपानंद जिन्होंने 1985 में संन्यास की दीक्षा ली और जो अपनी गर्मजोशी भरी हास्य-शैली (Humorous style) के लिए जाने जाते हैं। उनकी ये किताब क्रॉसवर्ड, अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। स्टॉर्म टू परफॉर्म और मेडिटेशन द अवेकनिंग (Storm to Perform and Meditation: The Awakening) जैसी बेस्टसेलर के बाद ये उनकी नई पेशकश है।

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