इमेजिन..धुंध से लिपटी हिमालय की वादियां, चीड़-देवदार के जंगलों के बीच से गुजरती एक खिलौना रेल,और अचानक सामने आता है एक ऐसा स्टेशन जो देखते ही आपको स्कॉटलैंड की किसी पुरानी कहानी में ले जाए। ये है बड़ोग रेलवे स्टेशन..यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग का वो मोती, जिसे देखकर हर यात्री की नज़र ठहर जाती है।

स्कॉटिश किले जैसी बनावट, फूलों से सजी राह
बड़ोग स्टेशन की इमारत आम भारतीय रेलवे स्टेशनों से बिल्कुल अलग है। इसकी बनावट स्कॉटिश कैसल और कॉटेज शैली (Scottish castle and cottage style) में है। ढलानदार छतें (Gable roof), लकड़ी की नक्काशी, और चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की बगिया। जब आप टॉय ट्रेन से यहां पहुंचते हैं, तो लगता है जैसे कोई परी-कथा का दृश्य साकार हो गया हो। समुद्र तल से करीब 1,531 मीटर की ऊंचाई पर बसा ये स्टेशन अपनी सुंदरता के चलते कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग का गवाह भी बन चुका है।
नाम के पीछे छिपी एक दर्द भरी दास्तान
इस खू़बसूरत स्टेशन का नाम एक ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग (British engineer Colonel Barog) के नाम पर पड़ा है। कहानी बड़ी दिलचस्प और थोड़ी दुखद है। जब 1900 के आसपास कालका-शिमला रेलमार्ग (Kalka-Shimla Railway Line) बिछाया जा रहा था, तो कर्नल बड़ोग को सुरंग नंबर 33 बनाने की ज़िम्मा सौंपी गई। उन्होंने पहाड़ के दोनों तरफ से खुदाई शुरू करवाई, ताकि दोनों सिरे बीच में मिल जाएं। लेकिन हिसाब-किताब में गड़बड़ी के चलते दोनों सिरे कभी मिल ही नहीं पाए। ब्रिटिश सरकार (British Government) ने इस गलती पर उन पर एक रुपये का जुर्माना लगाया। ये अपमान कर्नल बड़ोग सहन नहीं कर सके और उन्होंने खुद को गोली मार ली। उनकी कब्र आज भी पुरानी अधूरी सुरंग के पास कहीं छिपी हुई मानी जाती है। बाद में बाबा भलकू नाम के एक स्थानीय संत की सलाह से ये सुरंग पूरी की गई, जो आज कालका-शिमला रेलवे की सबसे लंबी सुरंग (1,143 मीटर) है और दुनिया की सबसे सीधी सुरंग होने का गौरव भी रखती है।

अंग्रेजों का पसंदीदा ठिकाना और आज की अनोखी पहचान
ब्रिटिश राज के दौरान बड़ोग स्टेशन (Barog Station) की अलग ही शान थी। कहा जाता है कि टॉय ट्रेन (Toy train) यहां करीब एक घंटे रुकती थी,और अंग्रेज अफसर यहां के रेस्टोरेंट में बैठकर आराम से लंच किया करते थे। वो डाइनिंग हॉल आज भी मौजूद है, जो इतिहास की गवाही देता है। यहां तक कि अंग्रेजों ने इस स्टेशन पर बिजली पैदा करने का काम भी शुरू किया था, जो उस ज़माने में बड़ी बात थी।

आज भले ही बड़ोग एक छोटा सा हिल स्टेशन हो, लेकिन इसकी खू़बसूरती और इतिहास इसे ख़ास बनाता है। अगर आप कभी शिमला जाएं, तो सिर्फ़ बस या कार से न जाएं। एक बार इस टॉय ट्रेन में बैठिए और बड़ोग स्टेशन पर रुकिए। आपको यकीन हो जाएगा कि हिमाचल की वादियों में छिपा यह स्टेशन अपने आप में एक पूरी कहानी है।
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