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सानिया जे़हरा: परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा की मिसाल

कह सकते हैं कि, बदलते हालात के साथ, लोगों की सोच भी बदल रही है। आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं और हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। इसी बदलाव का एक प्रेरक उदाहरण बलहामा की 20 साल की सानिया जे़हरा हैं। सानिया मधुमक्खी पालन में विशेषज्ञ हैं और अपने समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका परिवार मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुड़ा है, जिसे उनके दादा ने शुरू किया था। अब सानिया इस काम को तीसरी पीढ़ी के तौर पर आगे बढ़ा रही हैं।

सानिया बताती हैं, शुरुआत में, मैं अपने पिता की मदद करती थी, लेकिन इसमें मेरी ज़्यादा रुचि नहीं थी। धीरे-धीरे मुझे यह काम अच्छा लगने लगा और अब मैं मधुमक्खी पालन से लेकर मार्केटिंग तक सब कुछ खुद संभालती हूं।

सानिया ने यह भी बताया कि उनके व्यवसाय से होने वाली आय ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। अब वह मधुमक्खी पालन के साथ आयात-निर्यात में भी शामिल हैं। उनका कहना है, “कुरान में मधुमक्खी पालन का ज़िक्र है और इसमें अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है। मुझे गर्व है कि मैं इस काम को कर रही हूं।”

सानिया ने शुरुआत में आने वाली परेशानियों का भी ज़िक्र किया। उन्हें समाज और करीबी लोगों से आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके मुताबिक़, कड़ी मेहनत और ईमानदारी से किए गए काम को अल्लाह का आशीर्वाद ज़रूर मिलता है। अब सानिया का व्यवसाय सिर्फ़ मधुमक्खी पालन तक सीमित नहीं है। वह मधुमक्खी के मोम से सौंदर्य उत्पाद और अन्य चीजे़ं भी बनाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को तरग़ीब दे रही है और इसमें दिलचस्पी रखने वाले लोग योजनाओं के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

सानिया का संदेश साफ है, कोई भी काम छोटा नहीं होता। अगर आप मेहनत और लगन से काम करेंगे, तो अल्लाह आपकी कोशिशों को ज़रूर सफल बनाएगा।

आज कश्मीर की महिलाएं उद्यमिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। प्रधानमंत्री रोज़गार गारंटी कार्यक्रम (PMEGP) के तहत, पिछले तीन साल में 14,943 परियोजनाएं महिलाओं की और से शुरू की गई हैं। यह पहल कश्मीर में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ावा दे रही है।

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