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O’ Hen Art Studio: जहां ड्राइंग सिर्फ़ कला नहीं, बच्चों की सोच और संवाद की भाषा बन जाती है

O’ Hen Art Studio सिर्फ़ एक आर्ट क्लास नहीं है, बल्कि ये एक ऐसी जगह है जहां बच्चे रंगों के ज़रिए बोलना सीखते हैं। गुवाहाटी में साल 2020 में शुरू हुआ O’ Hen Art Studio खुद को भारत का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म बताता है, जहां विजुअल आर्ट और विजुअल कम्युनिकेशन को एक साथ सिखाया जाता है। यहां कला सिर्फ़ सुंदर तस्वीर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच, समझ और संवाद का ज़रिया बन जाती है।

जब ड्राइंग बनती है बातचीत की भाषा

O’ Hen Art Studio की सबसे बड़ी ख़ासियत यही है कि यहां बच्चों को सीधे पेंसिल और रंग थमा कर ड्रॉइंग नहीं करवाई जाती, बल्कि पहले उन्हें सोचने के लिए मोटिवेट किया जाता है। उनसे पूछा जाता है कि वो क्या महसूस कर रहे हैं, क्या कहना चाहते हैं और किस रंग या शेप से अपनी बात कह सकते हैं। यहीं से विजुअल कम्युनिकेशन की शुरुआत होती है, जहां चित्र सिर्फ़ एक डिजाइन नहीं, बल्कि सोच का आईना बन जाता है।

Source: DNN24

बच्चों की दुनिया, उनके रंगों में

O’ Hen Art Studio में मौजूद बच्चों की ड्रॉइंग्स देखकर साफ समझ आता है कि हर बच्चा अपनी अलग दुनिया लेकर आता है। आर्यन दीये पर नीला रंग कर रहे थे। उनका कहना है कि उन्हें नीला रंग बहुत पसंद है और उनके ज़्यादातर खिलौने भी इसी रंग के हैं। वहीं दूसरी ओर छोटी आर्य ने अपने पेपर पर कई सारे स्टार्स और पटाखे बनाए। उसकी ड्रॉइंग में खुशी, उत्साह और कल्पना साफ नज़र आ रही थी। O’ Hen Art Studio बच्चे सिर्फ़ कागज़ पर कुछ बना नहीं रहे होते, बल्कि अपनी भावनाओं को आज़ादी से ज़ाहिर कर रहे होते हैं।

O’ Hen Art Studio में ड्राइंग से आगे की सीख

O’ Hen Art Studio में बच्चों को सिर्फ़ 2D ड्राइंग तक सीमित नहीं रखा जाता। उन्हें सिखाया जाता है कि कैसे एक सिंपल स्केच को 3D फॉर्म में बदला जाए। बच्चे पहले बेस कलर लगाना सीखते हैं, फिर शेडिंग, लाइट और शैडो के ज़रिए डेप्थ निकालते हैं। इस प्रोसेस में वो एक ही समय में कई चीजें सीखते हैं फोकस, धैर्य, ऑब्ज़र्वेशन और प्रेज़ेंटेशन। यही वजह है कि O’ Hen Art Studio में ड्राइंग सिर्फ़ एक एक्टिविटी नहीं रहती, बल्कि सीखने का पूरा प्रोसेस बन जाती है।

Source: DNN24

विजुअल कम्युनिकेशन क्या होता है?

O’ Hen Art Studio के फाउंडर Khairul Bachaar ने विजुअल कम्युनिकेशन को बहुत आसान उदाहरण से समझाया। उन्होंने एक कागज़ पर दो साधारण घर बनाए, जिनमें न कोई रंग था और न कोई भाव। ड्रॉइंग देखकर कुछ ख़ास महसूस नहीं हो रहा था। फिर उन्होंने उसी ड्राइंग में झोपड़ी, बादल और कुछ एलिमेंट्स जोड़े। अचानक वो तस्वीर एक कहानी कहने लगी। यही विजुअल कम्युनिकेशन है जहां मिनिमम डिज़ाइन में भी मैक्सिमम बात कही जा सकती है।

O’ Hen Art Studio के फाउंडर Khairul Bachaar कहते हैं कि आसान भाषा में कहें तो विजुअल कम्युनिकेशन का मतलब है कम से कम डिज़ाइन और बिना ज़्यादा शब्दों के, अपनी बात को साफ़ और असरदार तरीके से सामने रखना। यानी जो बात शब्दों में कहना मुश्किल हो, उसे रंगों, लाइनों और शेप्स के ज़रिए कहना। O’ Hen Art Studio में बच्चों को यही सिखाया जाता है कि वो अपनी सोच को विजुअल भाषा में कैसे बदलें।

आर्ट के साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट

स्टूडेंट इनारा के पिता बताते हैं कि जब उनकी बेटी ने O’ Hen Art Studio आना शुरू किया, तब उन्हें लगा था कि वो सिर्फ़ ड्राइंग सीखेगी। लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि ये जगह उससे कहीं ज्यादा दे रही है। उनके मुताबिक, “O’ Hen Art Studio आकर मुझे एहसास हुआ कि ड्राइंग सिर्फ़ सुंदर बनाना नहीं है, बल्कि अपने मन की बात कहने का तरीका भी है।” इनारा के कॉन्फिडेंस और सोच में काफी बदलाव आया है। अब वो अपनी बात ज़्यादा खुलकर और साफ़ तरीके से कह पाती है।

इनारा के पिता कहते हैं कि उनकी बेटी यहां सिर्फ़ आर्ट नहीं सीखती, बल्कि बोलने का तरीका और सोचने का नज़रिया भी सीखती है। छोटी उम्र में ही वो अपनी परेशानियों और बातों को अच्छे से आर्टिकुलेट कर पाती है। इससे उसका पर्सनालिटी डेवलपमेंट भी हुआ है। पिछले तीन सालों से वो अपनी बेटी का ओवरऑल डेवलपमेंट देख रहे हैं और इसी वजह से वो O’ Hen Art Studio की पूरी टीम के लिए दिल से आभारी हैं।

Source: DNN24

पढ़ाई से आगे, इंडस्ट्री का अनुभव

O’ Hen Art Studio की एक और ख़ास बात है कि ये सिर्फ़ क्लासरूम तक सीमित नहीं है। O’ Hen Art Studio में प्रोफ़ेशनल आर्टिस्ट, डिज़ाइनर और एनिमेटर एक रियल वर्किंग एनवायरमेंट में काम करते हैं। इससे बच्चों और सीखने वालों को इंडस्ट्री का एक्सपोज़र मिलता है और वो भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते हैं। कला सिर्फ़ दीवारों पर टंगी तस्वीर नहीं होती। वो समाज का आईना होती है, सोच की उड़ान होती है और भविष्य की तैयारी भी।

O’ Hen Art Studio उस सोच को गढ़ रहा है, जहां कला डर नहीं बल्कि आत्मविश्वास बनती है। जहां बच्चे सिर्फ़ चित्र नहीं बनाते, बल्कि अपनी पहचान रचते हैं। शायद यही वजह है कि O’ Hen Art Studio से निकलने वाले बच्चे सिर्फ़ क्रिएटर नहीं, बल्कि बेहतर कम्युनिकेटर भी बनते हैं। और जब कला समझ बन जाए, तो वही सबसे बड़ी शिक्षा होती है।

ये भी पढ़ें: Pottery से मन की शांति तक: O’ Hen Art स्टूडियो में मिट्टी के ज़रिए ख़ुद से मिलने की कहानी

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