Sunday, March 1, 2026
31.2 C
Delhi

क़ैसर निज़ामी एकमात्र कश्मीरी संगीतकार, जिनका गीत ग्रैमी पुरस्कार के लिए हुआ नॉमिनेट

कश्मीर ना सिर्फ अपनी बेइंतहा खूबसूरती के लिए मशहूर है बल्कि यहां की फिज़ाओं में भी संगीत गूंजता है, जिसकी आगोश में रहकर क़ैसर निज़ामी ने अपनी आवाज़ का जादू पूरी दुनिया में बिखेरा है। कश्मीरी संगीतकार और गायक क़ैसर निज़ामी अपने गीत ‘हरमुख बारताल ज़गई’ से फेमस हुए थे। वो ना सिर्फ कश्मीर के लिए ख़ास पहचान रखते हैं, उससे बढ़कर साल 2019 में भारत का नाम उन्होंने प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार के लिए नॉमिनेट होकर रौशन किया। ग्रैमी अवॉर्ड संगीत की दुनिया में सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। क़ैसर निज़ामी को उनके गीत ‘नाज़नीनय’ (ओ ब्यूटी) के लिए नॉमिनेट किया गया था।

ये पहली बार था कि किसी कश्मीरी सिंगर ने ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। सिंगर क़ैसर निज़ामी ने अपने गीत को अमेरिका के संगीतकार और संतूर वादक एहसान मटूरी के मल्टीनेशनल ‘द वॉयस एंड ब्रिजेस’ प्रोजेक्ट के सहयोग से तैयार किया था।

धमकियां मिली लेकिन संगीत के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ

क़ैसर निज़ामी ने अपने संगीत और गायन से भारत ही नहीं दुनियाभर के लोगों का दिल जीता हैं। करीब चार दशकों से क़ैसर निज़ामी दिल्ली, बॉम्बे और कश्मीर रेडियो से अपनी शानदार आवाज़ के ज़रीये से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। क़ैसर निज़ामी को कश्मीरी, उर्दू, हिंदी में ग़ज़लों, भजनों, सूफी कविताओं के गायन के साथ-साथ फ़ारसी गायन में भी महारत हासिल हैं।

कै़सर निज़ामी ने आवाज़ द वॉयस को बताया कि शुरुआत में उनका रुझान संगीत की तरफ नहीं था। उन्हें बचपन में क्रिकेट खेलने का शौक था। उनके पिता के रेडियो कश्मीर, श्रीनगर के साथ जुड़ाव ने उन्हें संगीत के क्षेत्र के करीब ला दिया। अबतक के सफर में उन्हें कई धमकियां भी मिली लेकिन उनका संगीत के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ और अपने इस सफर को जारी रखा।

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: बचपन में खोए दोनों हाथ, आज हैं जम्मू-कश्मीर पैरा क्रिक्रेट टीम के कैप्टन: आमिर हुसैन लोन

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib: जहां हर तकलीफ़ का हल और दिल को सुकून मिलता है

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib सिर्फ़ एक इबादतगाह नहीं,...

Topics

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

Related Articles

Popular Categories