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मौलाना शौकत अली: हिंदू-मुस्लिम इत्तिहाद के ज़बरदस्त हामी

मौलाना शौकत अली भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। उनका जीवन मातृभूमि की आज़ादी के लिए समर्पित था। उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत को आज़ाद कराने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। हालांकि वे आज़ाद भारत नहीं देख पाए, उनकी कोशिशों ने देश को आज़ादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। मौलाना शौकत अली का जन्म 10 मार्च 1873 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई की ओर अपनी शिक्षा के दौरान क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। वे सिविल सेवा में शामिल हुए, लेकिन देशप्रेम ने उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन की ओर खींच लिया।

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

शौकत अली और उनके भाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने ख़िलाफ़त आंदोलन और असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। दोनों भाइयों ने उर्दू साप्ताहिक हमदर्द और अंग्रेज़ी साप्ताहिक कॉमरेड के ज़रिए देशवासियों को जागरूक किया

मौलाना शौकत अली ने महात्मा गांधी के साथ मिलकर हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया। गांधी जी ने उन्हें और उनके भाई को “अली ब्रदर्स” कहकर संबोधित किया। शौकत अली के विचार स्पष्ट थे कि भारत की स्वतंत्रता हिंदू और मुस्लिम एकता के बिना संभव नहीं है।मौलाना शौकत अली अपनी गलतियों को स्वीकारने और उन्हें सुधारने के लिए जाने जाते थे। गांधी जी ने उनके इस गुण की सराहना की थी। वह न सिर्फ़ इस्लाम के प्रति वफ़दार थे, बल्कि दूसरे धर्मों की भी इज़्ज़त करते थे।

ब्रिटिश हुकूमत ने अली ब्रदर्स को कई बार जेल में डाल दिया। जेल से भी उन्होंने गांधी जी को पत्र लिखकर आंदोलन को मज़बूत करने के लिए निर्देश दिए। गांधी जी ने उन्हें छुड़ाने के लिए ब्रिटिश सरकार से पत्र-व्यवहार किया। 26 नवंबर 1938 को मौलाना शौकत अली का इंतकाल हुआ। उनकी मौत ने देश को गहरा सदमा दिया। गांधी जी ने उनकी मृत्यु पर कहा कि उनकी स्मृति को सम्मान देने का सबसे अच्छा तरीका हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना होगा।

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