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इस एक राज्य में हिन्दू क्यों मनाते हैं मुहर्रम?

बेलगावी ज़िले के हिरेबिदानूर गांव (Hirebidanur) में एक भी मुस्लिम परिवार (Muslims Family) नहीं रहता है, लेकिन इस गांव के लोग एक सदी से मुहर्रम (Muharram) का आयोजन करते आ रहे हैं। हिरेबिदानूर के पुजारी फकीरेश्वर स्वामी (Fakireshwar Swami, the priest of Hirebidanur) स्थानीय मस्जिद की देख-भाल तो करते ही हैं, साथ ही वो हर साल मुहर्रम के मौके पर धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था में भी आगे रहते हैंं।

मस्जिद के इमाम यल्लप्पा नायकर ने इस बारे में एक अंग्रेजी अखबार से बात की। नायकर के अनुसार, बहुत पहले दो मुस्लिम भाइयों ने मस्जिदों का निर्माण किया था- एक गुटनाट्टी के पास और दूसरी हिरेबिदानूर में।

दरअसल दोनों भाइयों की मृत्यु के बाद भी स्थानीय लोग हर साल मुहर्रम मनाते हैं। इसके लिए हर साल मुहर्रम के दौरान पास के बेविनकट्टी गांव से एक मौलवी को आमंत्रित किया जाता है। एक सप्ताह तक वो मस्जिद में रहते हैं और इस्लामी तरीके से नमाज अदा करते हैं। अन्य दिनों में नाइकर मस्जिद की ज़िम्मेदारी संभालते हैं। करीब 3,000 की आबादी वाले हिरेबिदानूर में कुरुबा और वाल्मीकि समुदायों का वर्चस्व है।

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

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