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मोहम्मद मुआज़ ने महज़ 14 साल की उम्र में क़ुरान हिफ़्ज़ किया

दौलताबाद, जिसे देवगिरी या देवगीर के नाम से भी जाना जाता है, ये शहर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से लगभग 8 मील (13 किलोमीटर) उत्तर पश्चिम में एक पहाड़ी क्षेत्र में बसा हुआ है। हाल ही में दौलताबाद के मोहम्मद मुआज़ नाम के एक 14 साल के लड़के ने सिर्फ़ 96 दिनों मे कुरान हिफ़्ज़ किया। वो क़ुरान-ए-हाफ़िज़ बने। क़ुरान-ए-हाफ़िज़ बनने का मतलब है, कुरान को पूरी तरह से याद कर लेना। ये एक बड़ी उपलब्धि है।

मुआज़ ने ‘जामिया इस्लामिया दारुल उलूम मदरसा’ के शरीयत कारी मुअजुद्दीन कासमी की देखरेख में अपनी तालिम पूरी की। अपनी इस कामयाबी का श्रेय वो कइयों को देते हैं। उनके वालिद कारी बिलाल अहमद कासमी ने इनमें उनकी काफ़ी मदद की।

क़ुरान हिफ़्ज़ करने में मोहम्मद मुआज़ की मेहनत

क़ुरान करीम हिफ़्ज़ करना (याद करना) एक इबादत है और इस इबादत के ज़रिए अल्लाह को खुश करना हैं। यही वजह है कि कुरान को मुंह ज़ुबानी रखना एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाता है। मुआज़ ने सिर्फ़ 96 दिनों में क़ुरान के 30 पारे, 6666 आयतें और 114 सूरह याद कर लीं। इस उपलब्धि पर लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनके दोस्त और परिवार वाले उन पर गर्व कर रहे हैं।

ये सब मुआज़ की कड़ी मेहनत और उनके परिवार और शिक्षकों के समर्थन की मदद की वज़ह से संभव हो पाया। केवल 96 दिनों में पूरे कुरान को याद करने की क्षमता वास्तव में एक प्रशंसनीय उपलब्धि है और वो कइयों के लिए प्रेरणा बने हैं। मुआज़ कहते हैं कि ये उपलब्धि कुरान को याद करने के महत्त्व को बताती है। ये शिक्षा के महत्त्व और किसी व्यक्ति के जीवन को आकार देने में उसकी भूमिका की याद दिलाता है।

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