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शायरों को एक धागे में पिरोने वाले अलीमुद्दीन अलीम

उर्दू दकनी के प्रसिद्ध कवि वली दकनी और सिराज औरंगाबादी औरंगाबाद में पले बड़े और शोहरत पाई। हमारे आज के शायर, कवि, शोधकर्ता अलीमुद्दीन अलीम भी इस मराठावाड़ा के है। अलीमुद्दीन अपनी दो किताबों के लिए जाने जाते है, जिनमे तज़किरा ए शोर ए मराठावाडा: जिल्द अव्वल-इब्तेदा से 1950 तक और दूसरी तज़किरा ए शोर ए मराठावाडा: जिल्द दूव्वम- 1951 से ता हाल तक। ये किताबे मराठावाड़ा के 100 सालों के उर्दू-दकनी कवि, शायर और संतो की रचनाओं का संग्रह है। किताबों में उर्दू के जन्म से लेकर अब तक के कवियों की रचनाएं शामिल है।

अलीमुद्दीन अलीम का जन्म 1983 में औरंगाबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित अंबाजोगाई में हुआ। वह पेशे से अध्यापक है। उनके पिता अजीमुद्दीन ग्रेजुएट है। वो भी उर्दू के शौकीन रहे। शुरू से ही घर में ही कई किताबें होती थी। यहीं वजह रही की, अलीमुद्दीन अलीम को बचपन से पढ़ने और लिखने का शौक रहा। शौक की वजह से उन्होंने उर्दू साहित्य में एम.ए. किया।

अलीमुद्दीन इन दिनों समकालीन काव्य और उसकी आलोचना पर काम कर रहे है।अपनी व्यस्त दिनचर्चा के बाद भी वह पढ़ने और लिखने के लिए पर्याप्त समय निकाल पाते है। 

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

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