Thursday, October 15, 2026
24.6 C
Delhi

मुरादाबाद: पीतल की महक, हुनर की चमक, विरासत की अनमोल दास्तान

उत्तर प्रदेश का शहर मुरादाबाद (The city of Moradabad in Uttar Pradesh), जिसे ‘पीतल नगरी’ या ‘Brass City’ के नाम से जाना जाता है, धातु शिल्प का एक ऐसा गुलिस्तां है जहां हर चीज़ में नक़्क़ाशी की ख़ुशबू बसी है। ये छोटा सा शहर अपने बेमिसाल पीतल के सामानों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। घंटियां, दीये, अगरबत्तीदान, दरवाज़ों के हैंडल, सजावटी सामान, मूर्तियां, कटोरे और गमले यहां की धातु कला हर रूप में ज़िंदा है। सदियों पुरानी विरासत को समेटे यह शहर आज धातु कारीगरी का एक मज़बूत क़िला बन चुका है, जिसने ग्लोबल मार्केट में अपना नाम बना रखा है। इसकी हाई क्वालिटी, मज़बूती, ख़ूबसूरत डिज़ाइन और कारीगरों की महारत इसे ख़ास बनाती है। यहां के नक़्श-ओ-निगार इस इलाक़े की समृद्ध संस्कृति, विरासत, तारीख़ और विविधता की झलक पेश करते हैं।

Image- pexels.com

एक लाजवाब नफ़ासत

मुरादाबाद में ब्रास कारीगरी का रिवाज़ नस्लों-दर-नस्ल चला आ रहा है। इसकी जड़ें मुग़ल दौर तक जाती हैं, जब शाही दरबार कारीगरों को बढ़ावा देता था और वे शानदार चीज़ें तैयार करते थे। बरसों में इस हुनर ने ख़ुद को बदला, देसी तकनीकों को नए ज़माने की समझ के साथ मिलाया और एक ऐसा अंदाज़ गढ़ा जो इस ख़ित्ते की पहचान है। पीतल, तांबा, एल्युमिनियम और कांसा जैसी धातुएं यहीं से ली जाती हैं और उन्हें ढालकर, उभारकर और खोदकर कला के नायाब नमूने बनाए जाते हैं। धातु की एक सादी चादर से कैसे-कैसे डिज़ाइन, आकार और चीज़ें वजूद में आती हैं, ये देखना सचमुच दिलकश है। बारीक़ नक़्क़ाशी वाले ये डिज़ाइन इंसान को हैरान कर देते हैं। कारीगरों को काम करते देखना अपने आप में एक अनोखा तजुर्बा है।

Image- pexels.com

इस शहर की बुनियाद 1625 में मुग़ल बादशाह शाहजहां के बेटे मुराद बख़्श ने रखी थी, जिनके नाम पर इसका नाम मुरादाबाद पड़ा। उन्नीसवीं सदी के शुरू में यहां पीतल और बर्तन का कारोबार तेज़ी से फला-फूला। यहां के बेहतरीन धातु शिल्प को भारत सरकार की ओर से Geographical Indication यानी GI Tag भी हासिल है, जो इसकी असलियत और अहमियत का सबूत है।

Image- pexels.com

चमकती विरासत

मुरादाबाद की धातु कला सिर्फ़ क्रिएटिविटी का इज़हार नहीं, बल्कि एक क़दीम रिवायत की अलामत है। सदियों से इस हुनर को तराशा गया और एक पुश्त से दूसरी पुश्त तक पहुंचाया गया। डिज़ाइनों ने वक़्त के साथ करवट ली। कहीं मुग़लिया असर, कहीं रिवायती और कहीं नए ज़माने के नक़्श। आज जो तरह-तरह की चीज़ें बन रही हैं, वे देखकर यक़ीन करना मुश्किल होता है। शमादान, गुलदान, मूर्ति या कटोरे-ट्रे जैसी आम चीज़ें भी कारीगर की महारत की पहचान लिए होती हैं। ज़्यादातर एक्सपोर्ट जर्मनी, फ़्रांस, इटली और मिडिल ईस्ट के मुल्कों को होता है, जो स्थानीय माली हालत को सहारा देता है और हज़ारों लोगों को रोज़गार देता है।

Image- pexels.com

ख़रीदारों की जन्नत

मुरादाबाद की धातु कला महज़ एक माली सरगर्मी नहीं, बल्कि यहां के कारीगरों की कला, क्रिएटिविटी, हुनर और ज़हानत का ज़िंदा सबूत है। जब ये शहर नए ज़माने की लहरों से गुज़र रहा है, तब इस अनमोल विरासत को सहेजना और संजोना बेहद ज़रूरी है। लोकल कारीगरों से ख़रीदारी करने से इलाक़े की अर्थव्यवस्था को बल मिलता है और उन अनगिनत ख़ानदानों की रोज़ी-रोटी संभलती है जो इस हुनर से जुड़े हैं।

Image- pexels.com

यूं कहें तो मुरादाबाद का पीतल सिर्फ़ धातु नहीं, एक तहज़ीब है जो हुनर की आंच में तपकर, नक़्क़ाशी की छेनी से निखरकर,दुनिया के दिलों तक पहुंचती है।

ये भी पढ़ें- Farrukhabad Prints: हज़ार साल पुरानी कला, जो आज भी दुनिया के दिलों पर राज करती है

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

Topics

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

मुजतबा हुसैन: हंसी के पीछे छुपी सच्चाई का बेमिसाल क़लमकार

उर्दू अदब में तंज़-ओ-मज़ाह की बात हो और मुजतबा...

Balbir Singh Senior: भारतीय हॉकी को गोल्ड की राह दिखाने वाले

भारतीय हॉकी के इतिहास में जब भी बड़े खिलाड़ियों...

Related Articles

Popular Categories