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Karamjit Singh Saidoke: पंजाब की मिट्टी का वो बेटा जिसने रोइंग में देश का नाम रोशन किया

पंजाब की धरती ने हमेशा ऐसे खिलाड़ी और जांबाज़ पैदा किए हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और मज़बूत इरादों के दम पर दुनिया के खेल मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। इसी शानदार रिवायत को आगे बढ़ाते हुए, ज़िला मोगा की निहाल सिंह वाला तहसील के ऐतिहासिक गांव सैदोके के रहने वाले Karamjit Singh Saidoke ने रोइंग (नाव चलाने) के खेल में एक नई कामयाबी हासिल की है। आज Karamjit Singh Saidoke को भारत के सबसे उभरते हुए रोइंग खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है।

शुरुआती ज़िंदगी, परिवार और बड़े सपने

27 नवंबर 1998 को जन्मे Karamjit Singh Saidoke का ताल्लुक एक साधारण और इज़्ज़तदार किसान परिवार से है। उनके पिता सरदार लखवीर सिंह खेतीबाड़ी के ज़रिए परिवार की ज़रूरतें पूरी करते हैं, वहीं उनकी माता बलविंदर कौर एक हाउस वाइफ हैं।

एक भाई और एक बहन समेत पांच सदस्यों वाले इस परिवार के सामने आर्थिक मुश्किलें थी, लेकिन माता-पिता ने कभी भी करमजीत के बड़े सपनों को कमज़ोर नहीं पड़ने दिया। हर मुश्किल वक़्त में मिले परिवार के साथ और हौसले ने ही करमजीत को बिना रुके अपनी मंज़िल की तरफ़ आगे बढ़ने की ताक़त दी।

भारतीय सेना में भर्ती और खेल करियर की शुरुआत

Karamjit Singh Saidoke ने 12वीं क्लास की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश सेवा के जज़्बे के साथ आर्मी डिप्लोमा किया। इसके बाद 18 सितंबर 2018 को वो बतौर जवान भारतीय सेना में शामिल हो गए। ये उनके करियर के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ। यहीं उनकी मुलाकात एआईकेसी (AIKC) सेंटर के मशहूर कोच रणजीत सिंह से हुई। कोच रणजीत सिंह ने करमजीत के अंदर छिपी काबिलियत को पहचाना और उन्हें रोइंग खेल की मॉडर्न तकनीकों और बारीकियों की ट्रेनिंग दी।

कोच की सही रहनुमाई और करमजीत की दिन-रात की मेहनत के दम पर उन्होंने बहुत कम समय में नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बना ली। मौजूदा समय में वो ‘मेंस डबल स्कल्स’ और ‘क्वाड्रपल’ मुकाबलों में भारतीय सेना और सर्विसेज टीम का रिप्रेज़ेंट कर रहे हैं।

इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन

Karamjit Singh Saidoke ने विदेश के रोअर्स (नाव चलाने वाले खिलाड़ियों) को कड़ी टक्कर देते हुए कई बार भारत का नाम रोशन किया है।

ब्रिक्स खेल 2024 (कज़ान, रूस): रूस में आयोजित इन अहम खेलों में करमजीत सिंह ने अपने साथी खिलाड़ी कुलविंदर सिंह के साथ मिलकर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के खिलाफ़ शानदार तालमेल दिखाया और भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

वर्ल्ड कप 2023 (क्रोएशिया, यूरोप): इस इंटरनेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश का रिप्रेज़ेंट किया और दुनिया के सामने भारत की मज़बूत मौजूदगी दर्ज कराई।

ऑस्ट्रेलिया इंटरनेशनल मुकाबले: ऑस्ट्रेलिया में हुए कई बड़े लेवल के मुकाबलों में हिस्सा लेकर Karamjit Singh Saidoke ने अपनी खेल शैली को और बेहतर बनाया और इंटरनेशनल पर अपनी पहचान मज़बूत की।

राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में पदकों का शानदार रिकॉर्ड

देश के अंदर होने वाले खेल मुकाबलों और नेशनल लेवल पर Karamjit Singh Saidoke का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। उनके जीते हुए कई पदक उनकी मेहनत और काबिलियत का सबूत हैं। Karamjit Singh Saidoke ने 41वीं नेशनल रोइंग चैंपियनशिप 2024 में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 2 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने 42वीं सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप 2025 के मेंस क्वाड्रपल मुकाबले और उत्तराखंड में आयोजित 38वीं नेशनल गेम्स में शानदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल जीते।

इसी तरह छठवीं इंडोर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी और 2 गोल्ड तथा 1 सिल्वर मेडल हासिल किया। इसके अलावा गुजरात में हुई 36वीं नेशनल गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल, गोवा की 37वीं नेशनल गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल और हाल ही में हुई 43वीं सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर नेशनल लेवल पर अपनी काबिलियत साबित की।

नेशनल लेवल पर भी Karamjit Singh Saidoke ने पंजाब का नाम रोशन किया है। पंजाब स्टेट चैंपियनशिप (रोपड़) में उन्होंने 1 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीतकर खुद को राज्य के बेहतरीन रोअर्स में शामिल किया है।

राष्ट्रीय सम्मान और बड़ी पहचान

Karamjit Singh Saidoke की बेहतरीन खेल कामयाबियों और खेल के प्रति उनकी पूरी लगन को देखते हुए, उन्हें देश के बड़े खेल सम्मानों में से एक टाइम्स ऑफ़ इंडिया स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स (TOISA) 2024 में ‘रोइंग एथलीट ऑफ द ईयर’ के लिए नामांकित किया गया। “#MoreSweatMoreGlory” की प्रेरणादायक थीम के तहत आयोजित इस राष्ट्रीय समारोह में करमजीत का नाम चुना जाना न सिर्फ़ उनके लिए, बल्कि पूरी भारतीय सेना और पंजाब के लिए भी एक बड़ा सम्मान है।

भविष्य का लक्ष्य: एशियन गेम्स और ओलंपिक

नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भी Karamjit Singh Saidoke के हौसले और ज़्यादा बुलंद हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका अगला बड़ा सपना एशियन गेम्स और ओलंपिक खेलों में भारत को रिप्रेज़ेंट करना और देश के लिए मेडल जीतना है।

इस बड़े मक़सद को पूरा करने के लिए वो इस समय बिना रुके ट्रेनिंग और कड़ी मेहनत में जुटे हुए हैं। Karamjit Singh Saidoke का गांव की मिट्टी से निकलकर इंटरनेशनल पानी की लहरों तक पहुंचने का सफ़र सिर्फ़ एक खिलाड़ी की कामयाबी की कहानी नहीं है, बल्कि ये लगातार मेहनत, अनुशासन और कभी हार न मानने वाले पंजाबी जज़्बे की मिसाल है।

एक साधारण गांव से निकलकर देश का गौरव बनने तक का उनका सफ़र आज पंजाब और भारत के हज़ारों युवाओं को प्रेरणा दे रहा है कि वो नशे और गलत रास्तों से दूर रहकर खेलों के मैदान में देश का नाम रोशन करें। पूरा भारत और पंजाब अपने इस होनहार और जांबाज़ फौजी खिलाड़ी पर गर्व महसूस करते हैं।

स्टोरी– सुखमिंदर भंगू

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें: Shahid Bashir: कश्मीर के मल्टी-स्पोर्ट्स कोच का ओपन ग्राउंड से नेशनल स्टेज तक का सफ़र

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