Wednesday, July 1, 2026
31.6 C
Delhi

जब Famous Italian shoemaker ने बनाए महारानी के लिए हीरे-पन्ना से जड़े जूते,इंदिरा देवी का फैशन आज भी बेनज़ीर

आप सोचिए… आपके पास एक जोड़ी डिज़ाइनर जूते हैं, तो आप खुद को किस्मतवाला समझते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है किसी ऐसी महारानी के बारे में, जिसके पास 100 से ज्यादा जोड़ी कस्टम-मेड जूते (Over 100 pairs of custom-made shoes) थे? और वो भी उस दौर में, जब फैशन की दुनिया आज की तरह डेवलप नहीं थी।

ये कहानी है महारानी इंदिरा देवी (Maharani Indira Devi) की, जिन्होंने 1930 के दशक में इटली के मशहूर शूमेकर साल्वाटोर फेरागामो (The famous Italian shoemaker Salvatore Ferragamo) से जूते बनवाए। इन जूतों में हीरे, रुबी, पन्ने और मोती जड़े होते थे। जी हां, आपने सही सुना! ये सिर्फ जूते नहीं थे, बल्कि पैरों में पहनी जाने वाली जवाहरात थीं।

ऐसी थी इंदिरा देवी की पर्सनालिटी 

1892 में बड़ौदा की राजकुमारी के रूप में जन्मीं इंदिरा राजे (Princess Indira Raje of Baroda) हर मायने में ख़ास थीं। उन्होंने परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर कोच बिहार के राजकुमार जितेंद्र नारायण से शादी की। वो एक Fashion icon  थीं, उस ज़माने में जब इस शब्द का चलन भी नहीं था। उन्होंने ही भारतीय शाही महिलाओं के बीच Chiffon Saree को फेमस बनाया।

उनकी बेटी महारानी गायत्री देवी (जयपुर की) तो दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में गिनी जाती थीं, लेकिन इंदिरा देवी ने अपनी अलग पहचान बनाई, और वो भी दशकों पहले।

जब फेरागामो को मिला सबसे अनोखा ऑर्डर

साल्वाटोर फेरागामो (Salvatore Ferragamo) उस दौर में हॉलीवुड सितारों और यूरोपीय शाही परिवारों के लिए जूते बनाते थे। लेकिन जब इंदिरा देवी का ऑर्डर आया, तो उन्होंने सोचा भी नहीं था कि ये उनके करियर का सबसे यादगार काम होगा।

महारानी ने फेरागामो को अपने शाही खजाने के रत्न उपलब्ध कराए। फेरागामो ने इन रत्नों को जूतों में इस कदर सजाया कि लगता ही नहीं था कि ये जूते हैं-बल्कि कला के नमूने थे।

1938 का वो मशहूर वेज हील

1938 में बनाई गई वेज हील की एक जोड़ी (A pair of wedge heels) आज भी मशहूर है। इस पर काली वेलवेट, मोती, हीरे और रंगीन रत्न जड़े गए। ये सिर्फ जूते नहीं, बल्कि गहनों का वो हिस्सा थे, जो आमतौर पर गले या कानों में पहना जाता है-लेकिन महारानी ने इसे पैरों में पहना।

फेरागामो को महारानी का अंदाज़ इतना भाया कि उन्होंने उनके पैरों के निशान लकड़ी पर उकेरे, ताकि जूते बिल्कुल फिट बैठें। ये लकड़ी के सांचे आज भी फ्लोरेंस (इटली) के म्यूजियो साल्वाटोर फेरागामो (Museo Salvatore Ferragamo) में रखे गए हैं।

भारत की शाही महिलाओं ने बदली फैशन की दुनिया

इंदिरा देवी ने ये साबित किया कि भारत सिर्फ जड़ाऊ आभूषणों या रेशमी साड़ियों तक सीमित नहीं था। भारतीय शाही घरानों की महिलाओं ने वेस्टर्न डिज़ाइनरों को इंसिपायर किया, और अपने आपको वर्ल्ड फैशन के नक्शे पर सेट किया।

इन जूतों की कीमत? अगर आज इन्हें नीलाम किया जाए, तो करोड़ों रुपये में बिक सकते हैं। लेकिन इनकी ऐतिहासिक कीमत इससे भी ज्यादा है। क्योंकि ये उस दौर की गवाह हैं, जब भारत दुनिया को सिखा रहा था कि लग्ज़री का मतलब क्या होता है।

90 साल बाद भी है चर्चा

आज से 90 साल पहले इंदिरा देवी ने जो फैशन स्टेटमेंट दिया, वो आज भी उतना ही ताज़ा है। जब आप साल्वाटोर फेरागामो का नाम सुनते हैं, तो याद रखिएगा कि इस ब्रांड की सबसे अनोखे डिजाइन में से एक भारत की एक महारानी के लिए बनी थी, जिन्होंने सपनों से भी खूबसूरत जूते पहने।


महारानी इंदिरा देवी ने ये साबित किया कि स्टाइल सिर्फ वेस्टर्न की देन नहीं है। भारत की शाही महिलाएं, अपनी कला, सुंदरता और अल्हड़ अंदाज़ से पूरी दुनिया को हैरान सकती थीं। उनके जूते सिर्फ जूते नहीं थे, वो उनकी पर्सनालिटी  , उनकी शान और उनकी कहानी थे।

ये भी पढ़ें:   Karla Caves: करोड़ों साल पुराने इतिहास को मिला नया आयाम, सिंह स्तंभ के नीचे मिली रहस्यमयी गुफा

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

तिलोकचंद महरूम: इंसानियत, वतनपरस्ती और मोहब्बत की शायरी का रोशन नाम

"मंदिर भी साफ़ हम ने किए मस्जिदें भी पाकमुश्किल...

खेल कूटनीति: बास्केट बॉल से अमेरिका-भारत निकटता

नई दिल्ली में आयोजित फ्रीडम 250 “स्लैम डंक एक्सपीरियंस”...

फ़हमी बदायूनी: कम अल्फ़ाज़ में गहरी बात कहने वाले शायर

"आज पैवंद की ज़रूरत है,ये सज़ा है रफ़ू न...

गुरु घरों में प्रसाद के तौर पर पौधे बांटकर पर्यावरण बचाने की अनोखी पहल

जब भी कोई पंजाब के किसी गुरुद्वारे में माथा...

Topics

तिलोकचंद महरूम: इंसानियत, वतनपरस्ती और मोहब्बत की शायरी का रोशन नाम

"मंदिर भी साफ़ हम ने किए मस्जिदें भी पाकमुश्किल...

खेल कूटनीति: बास्केट बॉल से अमेरिका-भारत निकटता

नई दिल्ली में आयोजित फ्रीडम 250 “स्लैम डंक एक्सपीरियंस”...

फ़हमी बदायूनी: कम अल्फ़ाज़ में गहरी बात कहने वाले शायर

"आज पैवंद की ज़रूरत है,ये सज़ा है रफ़ू न...

क़मर जलालाबादी: जिनकी क़लम से निकले सदाबहार नग़मे 

"मेरा नाम चिन चिन चूं..." "आइए मेहरबां बैठिए जान-ए-जां..." इक दिल...

Related Articles

Popular Categories