महाराष्ट्र के लोनावाला (Lonavala, Maharashtra) के पास स्थित करला गुफाएं (Karla Caves) इन दिनों सुर्खियों में हैं। दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक टीम को यहां 2000 साल पुराने सिंह स्तंभ (Lion Pillar) के नीचे एक विशाल गुहा (cavity) मिली है। ये खोज इतिहास प्रेमियों और पुरातत्वविदों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है।

कैसे हुई ये चौंकाने वाली खोज?
ASI की संरक्षण टीम (ASI’s conservation team) जब गुफा के पास स्थित एक प्राचीन जलाशय (old cistern) के आसपास सफाई और संरक्षण का काम कर रही थी, तो उन्हें ये गुहा दिखाई दी। ASI के मुंबई सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् अभिजीत अंबेकर (Abhijeet Ambekar, superintending archaeologist of ASI’s Mumbai circle) ने बताया कि “जब हम पुराने पानी के टैंक के आसपास काम कर रहे थे, तो हमें सिंह स्तंभ के नीचे एक गुहा मिली। इसका मतलब था कि स्तंभ के नीचे का पत्थर अब निरंतर नहीं था। इसलिए हमने इसके आधार को एक्स्ट्रा सहारा देकर मजबूत किया ताकि भविष्य में कोई स्थिरता संबंधी समस्या न हो”।

क्यों है ये स्तंभ इतना ख़ास?
ये सिंह स्तंभ (Lion Pillar) करला गुफाओं के 8वें गुफा (Cave No. 8) के एंट्री गेट के बाहर खड़ा है, जिसे ‘ग्रेट चैत्य’ (Great Chaitya) के नाम से जाना जाता है। ये अपने वक्त का सबसे बड़ा और सबसे अच्छी तरह संरक्षित बौद्ध चैत्य हॉल (Protected Buddhist Chaitya Hall) है ।
- एकल पत्थर से निर्मित: ये स्तंभ एक ही पत्थर से तराशा गया है।
- मौर्य शैली: इसका डिज़ाइन मौर्य स्तंभों की याद दिलाता है।
- राष्ट्रीय प्रतीक से मिलती-जुलती आकृति: स्तंभ के शीर्ष पर चार दिशाओं की ओर मुख किए हुए चार सिंह बैठे हैं, जो भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) से काफी मिलते-जुलते हैं।
- ऐतिहासिक शिलालेख: इसके आधार पर एक शिलालेख (inscription) है, जो बताता है कि इस स्मारक का दान महारथी परिवार के गोतमीपुत्र अगिमितानाक ने किया था। ये दक्कन के शुरुआती ऐतिहासिक काल के राजनीतिक और धार्मिक इतिहास के बारे में जानकारी का एक महत्वपूर्ण सोर्स है।

ASI ने क्यों उठाया यह कदम?
ASI ने बताया कि समय के साथ इसमें दरारें आ सकती थीं या यह धंस सकता था। हालांकि, जब हमने हस्तक्षेप किया तो स्तंभ में कोई हलचल नहीं थी। हमने किसी भी क्षति से पहले एहतियात के तौर पर काम किया।
संरक्षण टीम ने स्तंभ के आधार के नीचे प्रबलित सहारा (reinforced support) बनाकर संरचना को मज़बूत किया, ताकि स्तंभ का भार फिर से distributed हो सके और दीर्घकालिक स्थिरता हो सके।

करला गुफाओं का इतिहास
करला गुफाएं दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से 5वीं शताब्दी ईस्वी के बीच बनाई गई थीं। ये गुफाएं एक प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित थीं और बौद्ध भिक्षुओं के लिए विहार (मठ) और चैत्य (प्रार्थना हॉल) के रूप में काम करती थीं। इन गुफाओं में कई दान शिलालेख मिले हैं, जो बताते हैं कि इनका निर्माण स्थानीय राजाओं, व्यापारियों, भिक्षुओं और ननों के दान से हुआ था।
ये खोज इस बात का प्रमाण है कि हमारे प्राचीन स्मारकों को संरक्षित करना कितना महत्वपूर्ण है। ASI का ये एहतियाती कदम निस्संदेह आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखेगा।
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