फ्रांस के ख़ूबसूरत शहर कान्स में इन दिनों 79वां Cannes Film Festival जारी है। ये मशहूर फ़िल्म फेस्टिवल 12 मई से 23 मई तक चलेगा। दुनिया भर से फ़िल्मी सितारे, डायरेक्टर, फ़ैशन डिज़ाइनर और सिनेमा से जुड़े लोग यहां पहुंच रहे हैं। एक तरफ बड़ी और बेहतरीन फ़िल्मों की स्क्रीनिंग हो रही है, तो दूसरी तरफ रेड कार्पेट पर सितारों का स्टाइल और ग्लैमरस अंदाज़ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। आज Cannes सिर्फ़ फ़िल्मों का फेस्टिवल नहीं रह गया है। ये फ़ैशन, शोहरत और ग्लैमर की भी बड़ी पहचान बन चुका है। लेकिन इसकी शुरुआत बिल्कुल अलग अंदाज़ में हुई थी।
जंग के बाद शुरू हुआ था Cannes
साल 1946 में जब Cannes Film Festival की शुरुआत हुई, तब इसका मक़सद जंग के बाद दुनिया को सिनेमा के ज़रिए करीब लाना था। उस दौर में फ़िल्मों को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाती थी। ग्लैमर और फ़ैशन का इसमें ज़्यादा रोल नहीं था। यहां तक कि रेड कार्पेट भी सिर्फ़ थिएटर तक जाने का एक साधारण रास्ता हुआ करता था।
1950 के दशक में Cannes का माहौल बदलना शुरू हुआ। हॉलीवुड के बड़े सितारे यहां आने लगे।

मशहूर अदाकारा Grace Kelly जब 1955 में Cannes पहुंचीं और उनकी मुलाक़ात Monaco के Prince Rainier से हुई, तब इस फेस्टिवल की चमक पूरी दुनिया में फैल गई। इसके बाद Cannes सिर्फ़ फ़िल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शाही ग्लैमर और फ़ैशन का भी बड़ा मंच बन गया। फोटोग्राफ़रों का ध्यान फ़िल्मों से ज़्यादा सितारों की एंट्री, उनके कपड़ों और उनके अंदाज़ पर रहने लगा। रेड कार्पेट धीरे-धीरे इस फेस्टिवल की नई पहचान बन गया।
टीवी और मीडिया ने बढ़ाई चमक
1960 और 70 के दशक तक टीवी का असर तेजी से बढ़ चुका था। अब सिर्फ़ फ़िल्में नहीं, बल्कि तस्वीरें और सितारों का स्टाइल भी लोगों के लिए अहम हो गया था। बड़े फ़ैशन डिज़ाइनर और ब्रांड्स समझ गए कि Cannes दुनिया के सामने ख़ुद को दिखाने का शानदार मौक़ा है। सितारों के कपड़े अब सिर्फ़ फ़ैशन नहीं रहे, बल्कि एक ट्रेंड और पहचान बन गए। Cannes में कौन क्या पहनकर आया, किसका लुक सबसे अलग रहा, ये सब चर्चा का हिस्सा बनने लगा।
80 और 90 के दशक में बढ़ा ग्लैमर
1980 और 90 के दशक में Cannes का ग्लैमर और ज़्यादा बढ़ गया। बड़े लग्ज़री फ़ैशन ब्रांड्स इस फेस्टिवल से जुड़ने लगे। उस दौर में सेलिब्रिटी कल्चर भी तेज़ी से बढ़ रहा था। कलाकार अब सिर्फ़ फ़िल्मों का प्रमोशन नहीं करते थे, बल्कि बड़े-बड़े ब्रांड्स का चेहरा भी बन चुके थे। रेड कार्पेट पर लिया गया एक ख़ास फोटो कुछ ही घंटों में पूरी दुनिया में मशहूर हो जाता था। Cannes अब फ़िल्मों के साथ-साथ फ़ैशन की दुनिया का भी सबसे बड़ा मंच बन चुका था।

सिनेमा और फ़ैशन का संगम
2000 के बाद Cannes पूरी तरह सिनेमा और फ़ैशन का मिला-जुला मंच बन गया। रेड कार्पेट अब किसी बड़े फ़ैशन शो से कम नहीं दिखता। हर एंगल से तस्वीरें ली जाती हैं और सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाती हैं। जो Cannes कभी सिर्फ़ फ़िल्म फेस्टिवल हुआ करता था, वो अब दो दुनियाओं का संगम बन चुका है एक तरफ थिएटर के अंदर बेहतरीन फ़िल्मों का जश्न और दूसरी तरफ बाहर रेड कार्पेट पर फ़ैशन और ग्लैमर का जलवा।
आज Cannes Film Festival फ़िल्मों को सम्मान देने के साथ-साथ दुनिया की विज़ुअल और फ़ैशन कल्चर को भी प्रभावित करता है। अब किसी फ़िल्म का प्रीमियर सिर्फ़ स्क्रीन पर नहीं होता, बल्कि रेड कारपेट पर सितारों की मौजूदगी भी उतनी ही बड़ी ख़बर बन जाती है। यानी जो Cannes कभी सिनेमा के जश्न के तौर पर शुरू हुआ था, वो धीरे-धीरे दुनिया के सबसे असरदार फ़ैशन मंचों में शामिल हो गया। इसमें सिनेमा, मीडिया, सेलिब्रिटी कल्चर और लोगों की नज़रों में बने रहने की चाह सबका बड़ा किरदार रहा है।
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