Sunday, July 5, 2026
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भारत की ‘Ice Cream Capital’ जहां मिल्कशेक नहीं, ‘गड़बड़’ है असली पहचान!

भारत में अगर किसी शहर को ‘Ice Cream Capital’ कहा जाए, तो शायद ही कोई हैरान हो। लेकिन हैरानी तब होती है जब पता चलता है कि यो उपाधि किसी ठंडे पहाड़ी शहर को नहीं, बल्कि करावली के तटीय शहर मैंगलुरु (अब Mangaluru) को मिली है। यहां की गलियां, गर्मी हो या बारिश, आइसक्रीम पार्लरों (Ice cream parlors) की महक से सजी रहती हैं। जहां देश के बाकी हिस्सों में आइसक्रीम को गर्मी का ‘सीजनल ट्रीट’ समझा जाता है, वहीं मैंगलुरु में ये ‘डेली डाइट’ का हिस्सा है। स्थानीय लोग फिल्टर कॉफी या बिरयानी की तरह ही आइसक्रीम के फ्लेवर पर बहस करते हैं। ये अजब-गजब इश्क ही है जिसने इस शहर की पहचान को मीठा और अनोखा बना दिया है।

India’s ‘Ice Cream Capital’

इतिहास: अंग्रेजों की देन से लेकर ‘गली-गली’ की पहचान तक

मैंगलुरु (Mangaluru) में आइसक्रीम का सफर बीसवीं सदी की शुरुआत में शुरू हुआ। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान यहां यूरोपीय खान-पान का असर था, लेकिन मैंगलुरु ने इस ठंडी मिठाई को इतनी जल्दी अपना लिया कि ये महज एक एलीट डिश नहीं रह गई। इसकी सबसे बड़ी वजह थी यहां की मजबूत डेयरी इकोसिस्टम। मिल्क प्रोडक्शन   इतना ज़्यादा था कि दूध की कभी कमी नहीं हुई। इसके अलावा, तटीय क्षेत्र की उमस भरी गर्मी ने ठंडी मिठाइयों को हमेशा स्वागत योग्य बनाए रखा।

लेकिन असली क्रांति आई जब Family Businesses ने इसे ‘क्वालिटी’ से ‘क्वांटिटी’ और ‘सस्ती पहुंच’ (From ‘Quality’ to ‘Quantity’ and ‘Affordable Access’) में बदल दिया। धीरे-धीरे आइसक्रीम महंगे होटलों से निकलकर ‘पड़ोस की दुकान’ बन गई। ये बदलाव इतना गहरा था कि आज यहां सड़क के हर मोड़ पर एक नया पार्लर मिल जाएगा।

क्या है ख़ासियत? ‘स्केल’ और ‘सोल’ का मेल

मैंगलुरु को बाकी महानगरों से अलग करती है यहां की Consistency and Originality। दिल्ली-मुंबई में आइसक्रीम ट्रेंडी ‘जेलाटो’ या ‘वेगन’ तक सीमित हो सकती है, लेकिन यहां अब भी वॉल्यूम और ‘पहुंच’ पर जोर दिया जाता है। सबसे बड़ी बात, यहां लोग रात के खाने के बाद भी बिना किसी मौसम की परवाह किए, चप्पल पहनकर नजदीकी पार्लर में ‘एक कप आइसक्रीम’ लेने निकल जाते हैं। यहां के फ्लेवर भी उतने ही ‘लेयर्ड’ और शानदार हैं जितना यहां की लोकल डीश।

India’s ‘Ice Cream Capital’

नाम ‘गड़बड़’ टेस्ट जैसे फेस्टिवल

मैंगलुरु ने भारत को कुछ ऐसी आइसक्रीम दी हैं जिनका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। सबसे मशहूर है ‘गड़बड़’। ये महज़ आइसक्रीम नहीं, बल्कि एक अनुभव है। एक लंबे गिलास में सबसे नीचे फ्रूट्स, फिर जेली, ड्राई फ्रूट्स, उस पर लेयर दर लेयर अलग-अलग फ्लेवर की आइसक्रीम और लास्ट में चेरी के साथ ये ‘गड़बड़’ सा नज़ारा पेश करती है। नाम में ‘गड़बड़’ (गड़बड़ी) ज़रूर है, लेकिन टेस्ट में ये बेहतरीन और शानदार होती है।

इसके अलावा यहां का ‘पानक’ आइसक्रीम (गुड़ और पानी से बने पारंपरिक शर्बत से प्रेरित), ‘तेंदूर कोकोनट’ और जैकफ्रूट (कटहल) जैसे लोकल सीजनल फ्लेवर भी कमाल के होते हैं। यहां के पार्लर आज भी उस पुरानी ‘परफेट’ (Parfait) स्टाइल को बनाए हुए हैं, जहां गिलास इतना बड़ा होता है कि अकेले खाना मुश्किल हो जाए।

एक मीठी विरासत

मैंगलुरु ने अपनी सौ साल पुरानी आइसक्रीम परंपरा को आधुनिकता के साथ अद्भुत ढंग से जोड़ रखा है। यहां आपको एक तरफ वही पुराने ‘आइडियल आइसक्रीम’ जैसे पार्लर मिलेंगे, जहां दशकों से रेसिपी वही है, तो वहीं नए प्रयोग भी हो रहे हैं। इंडियन टूरिस्ट के लिए ये शहर सिर्फ बीच और बिरयानी ही नहीं, बल्कि एक अनोखा ‘मीठा अनुभव’ देने वाला शहर है। अगर आप आइसक्रीम को सिर्फ गर्मी की ठंडक न समझकर एक ‘इमोशन’ समझते हैं, तो मैंगलुरु आपकी travel schedule में सबसे ऊपर होना चाहिए। यहां आकर एक बार ‘गड़बड़’ खाइए, फिर देखिए, नाम में गड़बड़ी है, लेकिन याददाश्त में मिठास ही मिठास भर जाती है।

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