Wednesday, September 2, 2026
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India-Canada रिश्तों की नई शुरुआत: व्यापार, ऊर्जा और तालीम में बढ़े सहयोग के रास्ते

विश्व आर्थिक मंच में बदलती दुनिया के हालात पर भाषण देने के करीब एक महीने बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पिछले हफ़्ते भारत दौरे पर पहुंचे। प्रधानमंत्री बनने के बाद ये उनका पहला भारत दौरा था। माना जा रहा है कि ये यात्रा सिर्फ़ ऑफ़िशियल नहीं थी, बल्कि India-Canada के रिश्तों को नई दिशा देने की एक कोशिश भी थी। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच जो तल्ख़ी देखने को मिली थी, अब उसे पीछे छोड़कर रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

अपने दौरे की शुरुआत कार्नी ने मुंबई से की। यहां दो दिन तक उन्होंने कारोबार और इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े लोगों से मुलाक़ात की। इसी दौरान मुकेश अंबानी ने अपने घर पर उनके सम्मान में एक ख़ास सांस्कृतिक प्रोग्राम भी रखा। इस मुलाक़ात का मक़सद India-Canada के कारोबारियों के बीच भरोसा बढ़ाना और नए इन्वेस्ट के रास्ते खोलना था।

मुंबई के बाद कार्नी नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनकी मुलाक़ात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई। इस मुलाक़ात में दोनों नेताओं ने इस साल के आख़िर तक कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई। माना जा रहा है कि इस समझौते से India-Canada के बीच कारोबार और आर्थिक रिश्तों को नई रफ़्तार मिलेगी।

India-Canada ने साल 2030 तक आपसी बिज़नेस को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे समय में जब दुनिया में सियासी और आर्थिक हालात तेज़ी से बदल रहे हैं, India-Canada अपने बिज़नेस रिश्तों को और मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस दौरे की एक ख़ास बात ये भी रही कि मार्क कार्नी के साथ कनाडा के बड़े कारोबारियों का एक हाई-लेवल डेलीगेशन भी भारत आया। इसमें कनाडा के कई बड़े पेंशन फंड के प्रमुख शामिल थे। इन इन्वेस्टर ने भारत में करीब 100 अरब डॉलर इन्वेस्ट करने का फ़ैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय भरोसे की मिसाल बताया।

दरअसल कनाडा के इंवेस्टर्स पहले से ही भारत में काफ़ी पैसा लगा रहे हैं। साल 2024 तक भारत में कनाडा का टोटल इंवेस्ट 80 अरब डॉलर से ज़्यादा हो चुका है। ऐसे में नए इन्वेस्ट से दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और मज़बूत होने की उम्मीद है। इस नई साझेदारी में एनर्जी सिक्योरिटी भी एक अहम मुद्दा बनकर सामने आई है। India-Canada के बीच बने नए रणनीतिक ऊर्जा ढांचे के तहत कनाडा की कंपनी Cameco साल 2027 से 2035 के बीच भारत को करीब 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम सप्लाई करेगी। ये यूरेनियम भारत के न्यूक्लियर पावर प्लांट्स सिविलियन में इस्तेमाल होगा। इस समझौते की क़ीमत करीब 2.6 अरब कनाडाई डॉलर बताई जा रही है।

इस डील से भारत की लंबे वक़्त की एनर्जी सिक्योरिटी मज़बूत होगी और कनाडा की पहचान एक भरोसेमंद न्यूक्लियर फ्यूल सप्लायर के तौर पर और मज़बूत हो सकती है। इसके अलावा दोनों देशों ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर और नई न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर भी साथ काम करने की बात कही है, ताकि भविष्य में साफ़ और सस्टेनेबल एनर्जी के नए रास्ते खुल सकें। साथ ही एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की लंबी अवधि की सप्लाई को लेकर भी बातचीत हुई। इससे साफ़ है कि India-Canada ट्रेडिशनल एनर्जी सोर्सिस के साथ-साथ भविष्य की साफ़ एनर्जी पर भी मिलकर काम करना चाहते हैं।

एनर्जी के अलावा दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स यानी अहम खनिजों को लेकर भी समझौता किया है। आज इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी, सेमीकंडक्टर, सोलर पैनल और डिफ़ेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले कई खनिजों की प्रोसेसिंग में चाइना का काफ़ी दबदबा है। ऐसे में कई देश अब सप्लाई के दूसरे रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। कनाडा के पास इन खनिजों के बड़े भंडार हैं और माइनिंग की फ़ील्ड में उसका अच्छा तजुर्बा भी है। इसलिए माना जा रहा है कि कनाडा भारत की खनिज भंडारण योजना और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

India-Canada के रिश्तों में तालीम भी हमेशा से एक मज़बूत कड़ी रही है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 24 नए इंस्टीट्यूशनल समझौते हुए। ये साझेदारियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर, खेती और इनोवेशन जैसे अहम फ़ील्ड्स में होंगी। इन समझौतों के तहत इंडियन स्टूडेंट्स के लिए कनाडा की यूनिवर्सिटियों में इंटर्नशिप और स्कॉलरशिप के नए मौके भी बढ़ाए जाएंगे। मुंबई में मार्क कार्नी ने India-Canada जॉइंट टैलेंट एंड इनोवेशन स्ट्रेटेजी की भी शुरुआत की। इसका मक़सद दोनों देशों की यूनिवर्सिटियों और रिसर्च संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और इनोवेशन के माहौल को मज़बूत करना है।

करीब आठ साल बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री का भारत दौरा सिर्फ़ एक रस्मी मुलाक़ात नहीं माना जा रहा है। India-Canada के रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आज कनाडा में 18 लाख से ज़्यादा इंडियन रहते और काम करते हैं। इसलिए भारत और कनाडा का रिश्ता सिर्फ़ कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और लोगों के बीच भी गहरा जुड़ाव है।

जब दुनिया में सियासी हालात तेज़ी से बदल रहे हैं और आर्थिक रिश्तों की नई तस्वीर बन रही है, ऐसे में India-Canada के बीच मज़बूत और दूरदर्शी साझेदारी दोनों देशों के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले वक़्त में ये रिश्ता वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार पूरी तरह लेखक के अपने हैं। ये विचार DNN24 या उससे जुड़ी किसी भी संस्था के विचार या राय को ज़रूरी नहीं दर्शाते।

ये भी पढ़ें: पंजाब यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक को बढ़ावा देने के लिए कनाडा यूनिवर्सिटी के साथ की साझेदारी

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शिवानी रावत
शिवानी रावत
शिवानी रावत एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें रणनीतिक मामलों पर गहरी पकड़ है। तीन दशक से ज़्यादा के अपने करियर में देश-विदेश की प्रमुख अख़बारों और मैगज़ीन के लिए महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग की है।

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