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बर्फ के आगे नहीं झुके सपने: Hills and Hearts Foundation ने जम्मू-कश्मीर के बच्चों की पढ़ाई के लिए खोले Winter Centre

Hills and Hearts Foundation ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो कड़ाके की ठंड में भी बच्चों के सपनों को जमने नहीं देती। जम्मू-कश्मीर के दूर-दराज़ इलाकों में जब बर्फ गिरती है, रास्ते बंद हो जाते हैं और स्कूलों में ताले लग जाते हैं, तब ये Organization बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने की कोशिश करती है। जहां कई बच्चों की किताबें सर्दियों में बंद हो जाती हैं, वहीं Hills and Hearts Foundation “Winter Community Learning Center” के ज़रिए बच्चों के लिए दरवाज़े खुले रखता है।

रिपोर्ट क्या बताती है?

UDISE (Unified District Information System for Education) 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्कूलों में 12.9 फीसदी बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। लेकिन जब हम अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) के बच्चों की बात करते हैं, तो ये आंकड़ा और ज़्यादा बढ़ जाता है। ST बच्चों में 17.7 फीसदी और SC बच्चों में 15.7 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन हज़ारों बच्चों की कहानी है जिनकी पढ़ाई किसी न किसी वजह से अधूरी रह जाती है। ख़ासकर हाशिए पर रहने वाले परिवारों के बच्चों के लिए पढ़ाई का सफ़र और भी मुश्किल हो जाता है।

सर्दियों का लंबा ब्रेक, बड़ी मुश्किल

घाटी और ऊंचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड होती है। बर्फबारी की वजह से कई गांव दुनिया से कट जाते हैं। स्कूलों में लंबी छुट्टियां हो जाती हैं और बच्चे करीब तीन महीने तक पढ़ाई से दूर रहते हैं। जिन बच्चों की पढ़ाई पहले से थोड़ी कमज़ोर होती है, उनके लिए ये ब्रेक और ज़्यादा भारी पड़ता है। जब स्कूल दोबारा खुलते हैं, तो उन्हें समझ नहीं आता कि कहां से शुरू करें। धीरे-धीरे उनका मन पढ़ाई से हटने लगता है और कुछ बच्चे स्कूल आना ही छोड़ देते हैं। हर साल तीन महीने का ये गैप बच्चों को थोड़ा-थोड़ा पीछे कर देता है। बाद में ये फासला इतना बढ़ जाता है कि उनके लिए वापसी मुश्किल हो जाती है।

Winter Community Learning Center: एक नई शुरुआत

इसी परेशानी को समझते हुए Hills and Hearts Foundation ने Chandagi, Ketson and Reshwari जैसे दूर इलाकों में तीन विंटर कम्युनिटी लर्निंग सेंटर (Winter Community Learning Center) शुरू किए हैं। इन सेंटरों में सर्दियों के दौरान भी पढ़ाई चलती रहती है। 400 से ज़्यादा बच्चे यहां आकर पढ़ते हैं। इनमें ज़्यादातर पहाड़ी और मज़दूर परिवारों के बच्चे शामिल हैं। यहां बच्चों को आराम से बैठकर पढ़ने की जगह मिलती है। उन्हें समझाया जाता है, दोबारा पढ़ाया जाता है और उनकी मुश्किलें सुनी जाती हैं।

मौसम से नहीं रुकना चाहिए बच्चों का भविष्य 

संस्था के संस्थापक किफ़ायतुल्लाह मलिक (Kifayatullah Malik), जो नेशनल लेवल पर सम्मानित किया जा चुका हैं, कहते हैं, “अगर हर साल बच्चों की पढ़ाई तीन महीने रुकती है, तो वो धीरे-धीरे बहुत पीछे रह जाते हैं। ख़ासकर दूर इलाकों और कम साधनों वाले घरों के बच्चे ज़्यादा असर झेलते हैं। हमारी कोशिश है कि ठंड या दूरी उनके भविष्य का रास्ता तय न करे।” 

पढ़ाई के साथ खेल और दिलचस्प काम

इन सेंटरों को स्थानीय युवा चलाते हैं। बच्चे अपने ही इलाके के बड़े भाई-बहनों के साथ बैठकर पढ़ते हैं, जिससे उन्हें अपनापन महसूस होता है। यहां सिर्फ़ किताबें नहीं पढ़ाई जाती, बल्कि मिलकर करने वाले काम, खेल, ड्रॉइंग और छोटे-छोटे दिलचस्प काम भी कराए जाते हैं। इससे बच्चों का खुद पर भरोसा बढ़ता है, उनका हौसला मज़बूत होता है और पढ़ने का शौक पैदा होता है। बच्चे सवाल पूछते हैं, हंसते हैं, सीखते हैं और धीरे-धीरे उनका डर कम हो जाता है।

एक छोटी कोशिश, बड़ा असर

Hills and Hearts Foundation सर्दियों के खाली समय को बच्चों के लिए एक मौक़े में बदल रही है। अब बर्फ और ठंड बच्चों की पढ़ाई के रास्ते में दीवार नहीं बन रही है। ये ऑर्गनाइज़ेशन जम्मू-कश्मीर में एजिकेशन, रोजगार और लोगों को आगे बढ़ने का सहारा देने के लिए काम करता है। स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर ये ऑर्गनाइज़ेशन ज़रूरतमंद परिवारों तक पहुंचती है और ज़मीनी स्तर पर मदद करती है। क्योंकि जब पढ़ाई चलती रहती है, तो उम्मीद ज़िदा रहती है। और जब उम्मीद ज़िंदा रहती है, तो बच्चों के सपने भी ज़िंदा रहते हैं।

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