Sunday, March 1, 2026
27.1 C
Delhi

चराग़ शर्मा: सादगी में गहराई और गहराई में मोहब्बत को शेर में उतारने वाला नौजवान शायर

उर्दू अदब की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो बहुत कम वक़्त में अपनी पहचान बना लेते हैं। चराग़ शर्मा उन्हीं में से एक हैं एक ऐसे नौजवान शायर, जिनकी शायरी में मोहब्बत की ख़ुशबू भी है और ज़माने की हक़ीक़त का आईना भी। उनके अशआर में नफ़ासत, एहसास और गहराई का ऐसा संगम है जो हर क़ारी के दिल में उतर जाता है।

चराग़ शर्मा का नाम आज की उर्दू शायरी में एक ताज़ी हवा के झोंके की तरह लिया जाता है। उनकी शख़्सियत निहायत हस्सास, नर्म-दिल और मुतवाज़िन है। उनकी बातों और शेरों में एक ऐसी सादगी है जो सीधे दिल को छू जाती है। वो न तो महज़ अल्फ़ाज़ के खेल में मशग़ूल हैं और न ही शोहरत के पीछे भागते हैं बल्कि उनके लफ़्ज़ एक मक़सद, एक एहसास और एक गहरी सोच के साथ लिखे जाते हैं।

शायरी में रिवायत और जदीदियत का संगम

चराग़ शर्मा की शायरी की ख़ास बात ये है कि उसमें रिवायती उर्दू अदब की मिठास भी है और मौजूदा दौर की सच्चाइयों का दर्द भी। वो अपने अशआर में पुराने उस्ताद शायरों की लय, लफ़्ज़ों की नफ़ासत और जज़्बात की गहराई को बनाए रखते हैं, लेकिन साथ ही आज के नौजवान की सोच और तजुर्बे को भी शामिल करते हैं।

उनकी शायरी में मोहब्बत, जुदाई, तन्हाई, उम्मीद और इंसानी जज़्बात के वो सब रंग हैं जो उर्दू शायरी की पहचान हैं। उनका अंदाज़-ए-बयां कुछ यूं है जैसे कोई मोती चुनने वाला गोता खोर समंदर की तह से ख़ूबसूरत लफ़्ज़ निकाल लाए। उनके कुछ मशहूर अशआर देखें —

उन्होंने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है,
हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है।

चराग़ शर्मा

ये शेर उनके फ़िक्र की गहराई और तजुर्बे की झलक दिखाता है एक ऐसी सोच जो न सिर्फ़ हालात को समझती है बल्कि उन पर सवाल भी उठाती है।

हक़ीक़त और दर्द का बयान

चराग़ शर्मा के अशआर में दर्द भी है, लेकिन वो मायूसी का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और उम्मीद का दर्द है। उनकी शायरी किसी शिकायत की नहीं, बल्कि ज़िंदगी को महसूस करने की दावत देती है।

ख़ताएं इस लिए करता हूं मैं कि जानता हूं,
सज़ा मुझे ही मिलेगी ख़ता करूं न करूं।

चराग़ शर्मा

ये शेर इंसान की उस जद्दोजहद को बयां करता है जहां ज़माना अक्सर बेगुनाही पर भी इल्ज़ाम लगाता है। इसी तरह एक और शेर देखें —

तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियां नहीं आतीं,
हमारी सोचो हमें हिचकियां नहीं आतीं।

चराग़ शर्मा

यहां चराग़, मोहब्बत और जुदाई के एहसास को बहुत सादा मगर असरदार लहजे में बयां करते हैं। उनके अल्फ़ाज़ एक पुराने ज़माने की मोहब्बत और आज की ख़ामोशी, दोनों को जोड़ते हैं।

मोहब्बत और एहसास का शायर

चराग़ शर्मा का नाम मोहब्बत की शायरी से भी जुड़ा है। उनकी ग़ज़लों में रूमानियत का रंग गहरा है, लेकिन वो सतही नहीं। बल्कि दिल की गहराइयों से निकली हुई मोहब्बत है, जो हर शेर में महसूस होती है।

मैं ने क़ुबूल कर लिया चुप चाप वो गुलाब,
जो शाख़ दे रही थी तिरी ओर से मुझे।

चराग़ शर्मा

कितनी सादगी, कितनी खूबसूरती है इन लफ़्ज़ों में। बिना किसी शोर के, वो पूरे इज़हार-ए-मोहब्बत को एक शेर में समेट देते हैं।

वो हंस के देखती होती तो उस से बात करते,
कोई उम्मीद भी होती तो उस से बात करते।

चराग़ शर्मा

यहां मोहब्बत की झिझक, अदब और तवक़्क़ो — सब एक साथ दिखाई देते हैं।

अंदाज़-ए-बयां और लफ़्ज़ों की रूह

चराग़ शर्मा के पढ़ने का अंदाज़ भी उनके शेरों जितना ही असरदार है। जब वो अपनी ग़ज़लें महफ़िलों में पढ़ते हैं, तो लगता है जैसे हर लफ़्ज़ किसी दिल की धड़कन पर रखा गया हो। उनकी आवाज़ में एक नरमी, एक गहराई और एक ख़ामोश दर्द है — जो सुनने वाले के अंदर तक महसूस होता है।
उनके अशआर सिर्फ़ सुनने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होते हैं।

उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं,
उड़ने वाले उड़ते उड़ते उड़ते हैं।

चराग़ शर्मा

इस शेर में ज़िंदगी की जद्दोजहद, गिरने और फिर उठने का हौसला झलकता है। यही असली इंसानी रूह की पहचान है- गिरना, संभलना और फिर उड़ जाना।

अदब की दुनिया में नई पहचान

चराग़ शर्मा ने कम उम्र में ही उर्दू अदब में अपनी एक मज़बूत पहचान बना ली है। उनकी ग़ज़लें और नज़्में सोशल मीडिया पर खूब पढ़ी और साझा की जाती हैं। वो सिर्फ़ एक शायर नहीं, बल्कि एक सोचने पर मजबूर करने वाले फ़लसफ़ी कवि हैं- जो ज़िंदगी के गहरे सवालों को लफ़्ज़ों में ढाल देते हैं।

उनकी शायरी में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, अहमद फ़राज़, जौन एलिया और राही मासूम रज़ा की रूह की झलक महसूस की जा सकती है लेकिन उनकी अपनी एक जुदा पहचान भी है। वो नकल नहीं करते, बल्कि अपनी राह बनाते हैं।

नौजवानों में बढ़ती लोकप्रियता

चराग़ शर्मा आज के नौजवानों के बीच बेहद मक़बूल हैं। उनकी शायरी मोहब्बत करने वालों को उम्मीद देती है, टूटे दिलों को सब्र सिखाती है और सोचने वालों को सवाल देती है। उनके शेरों में एक “रूहानी ताज़गी” है — जो सुनने के बाद देर तक मन में गूंजती रहती है।

कोई उस बूढ़े पीपल से कह आओ,
पिंजरे में हम ख़ूब मज़े से उड़ते हैं।

चराग़ शर्मा

इस शेर में वो समाज की तंग सोच, कैद की हकीकत और इंसान की आज़ादी की चाह — सब कुछ एक तंज़िया मगर नफ़ीस लहजे में बयान कर देते हैं। चराग़ शर्मा की शायरी हमें ये एहसास कराती है कि लफ़्ज़ सिर्फ़ बोलने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने और जोड़ने के लिए होते हैं। उनकी ग़ज़लें मोहब्बत के साथ-साथ इंसानियत, हक़ीक़त और सोच का भी आईना हैं। वो उर्दू अदब की उस नई पीढ़ी के शायर हैं जो दिल से लिखते हैं, और दिल तक पहुंचते हैं। उनकी शायरी से एक बात साफ़ झलकती है  चराग़ शर्मा महज़ नाम नहीं, बल्कि एक रौशनी हैं जो उर्दू शायरी के आसमान को रोशन कर रही है।

वो हंस के देखती होती तो उस से बात करते,
कोई उम्मीद भी होती तो उस से बात करते…

चराग़ शर्मा

यही है चराग़ शर्मा का जादू — सादगी में गहराई, और गहराई में मोहब्बत।

ये भी पढ़ें: शकेब जलाली: जिनकी ज़िन्दगी अधूरी ग़ज़ल थी लेकिन लफ़्ज़ एहसास बनकर उतरे 

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।






























LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib: जहां हर तकलीफ़ का हल और दिल को सुकून मिलता है

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib सिर्फ़ एक इबादतगाह नहीं,...

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Topics

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

पढ़ाई का ऐसा माहौल कि 18 किमी दूर से आते हैं स्टूडेंट्स: जानिए कश्मीर की Iqbal Library की कहानी

हर सुबह, समीना बीबी इकबाल लाइब्रेरी-कम-स्टडी सेंटर (Iqbal Library)...

Related Articles

Popular Categories