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नसीमा गेन: मानव तस्करी की अंधेरी गलियों से उम्मीद की रोशनी तक

पश्चिम बंगाल के मसलंदपुर की नसीमा गेन ने अपनी ज़िंदगी को एक ऐसी प्रेरक कहानी में बदल दिया है, जो साहस, संघर्ष और उम्मीद का प्रतीक है। 13 साल की नसीमा, एक परिचित के विश्वासघात का शिकार होकर मानव तस्करी के दलदल में फंस गई। 10 महीने बाद उन्हें रिहाई तो मिल गई, लेकिन घर लौटने पर समाज ने उन्हें ठुकरा दिया। इस अस्वीकृति ने नसीमा को तोड़ने के बजाय और मज़बूत बना दिया।

आज 26 साल की नसीमा गेन 4000 से ज़्यादा महिलाओं और लड़कियों को मानव तस्करी के चंगुल से निकालकर उन्हें नई ज़िंदगी जीने का हौसला दे चुकी हैं। उन्होंने 2016 में उत्थान कलेक्टिव के साथ काम शुरू किया, जो पीड़ितों को परामर्श, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मदद करता है। 2019 में, उन्होंने इंडियन लीडरशिप फोरम अगेंस्ट ट्रैफिकिंग (ILFAT) की सह-स्थापना की, जिसका काम 9 राज्यों तक फैला हुआ है।

अपराधियों को कटघरे तक पहुंचाने वाली नसीमा गेन

नसीमा गेन का कहना है, “जो कुछ मैंने सहा है, वह मुझे दूसरों की मदद करने का साहस देता है। हम उन्हें न सिर्फ़ मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श देते हैं, बल्कि कौशल विकास का प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।”नसीमा के लीडरशिप में इन संगठनों ने न केवल पीड़ितों को पुनर्वास का मार्ग दिखाया है, बल्कि अपराधियों को न्याय के कटघरे तक भी पहुंचाया है।

उनका कहना है, “मैं चाहती हूं कि कोई और नसीमा गेन बनने के दर्द से न गुज़रे।”नसीमा का संघर्ष और सेवा भावना साबित करती है कि साहस और आशा से हर अंधेरा मिटाया जा सकता है। अब वह न केवल अपने गांव में, बल्कि पूरे देश में सम्मान का प्रतीक बन चुकी हैं।

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