Tuesday, March 3, 2026
22.4 C
Delhi

अहसान-उल-हक़: भारतीय क्रिकेट के पहले मुस्लिम कप्तान की कहानी

अहसान-उल-हक़ भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दिनों के एक फेमस खिलाड़ी थे। वे पहले मुस्लिम थे जो अलीगढ़ कॉलेज की क्रिकेट टीम के कप्तान बनें। इंग्लैंड में भी क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई। अहसान-उल-हक़ की पैदाइश जालंधर में हुई। वे एक पढ़े-लिखे परिवार से थे, जहां क्रिकेट की बहुत अहमियत थी। उनकी शिक्षा अलीगढ़ के मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) में हुई। यहीं से उनके क्रिकेट सफ़र की शुरुआत हुई। उनके बड़े भाई, शौकत अली, जो खुद एक अच्छे खिलाड़ी  थे, भाई ने अहसान को क्रिकेट में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 1895 में अहसान ने कॉलेज टीम में जगह बनाई। हालांकि उनका पहला साल अच्छा नहीं रहा, लेकिन अगले दो सालों में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और टीम के मुख्य खिलाड़ी बने।

इंग्लैंड में क्रिकेट करियर

1898 में, कानून की पढ़ाई के लिए अहसान-उल-हक इंग्लैंड गए। वहां उन्होंने लंदन के हैम्पस्टेड क्लब से खेलना शुरू किया। 1902 में उन्हें मिडिलसेक्स काउंटी की टीम में खेलने का मौका मिला। इंग्लैंड में उनके खेल ने सबका ध्यान खींचा। कई लोगों का मानना था कि अगर वे लंबे समय तक इंग्लैंड में खेलते, तो वे बड़े मुकाम हासिल कर सकते थे। लेकिन परिवार और करियर की वजह से भारत लौटना पड़ा।

भारत वापस आने के बाद, अहसान ने क्रिकेट खेलना जारी रखा। उन्होंने अलीगढ़ कॉलेज की कप्तानी की और कई महत्वपूर्ण मैचों में हिस्सा लिया। 1903 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड ऑथेंटिक के खिलाफ खेलते हुए अपनी टीम को जीत दिलाई।

क्रिकेट के अलावा, अहसान-उल-हक एक बैरिस्टर और न्यायिक सेवाओं में भी सक्रिय रहे। वे पंजाब में मुख्य न्यायाधीश और मंत्री के रूप में कार्यरत रहे। उनके परिवार में भी कई फेमस लोग हुए। उनकी बेटी बेगम पारा 1940-50 के दशक की जानी-मानी एक्ट्रेस थीं। उनकी पोती अमृता सिंह भी बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा बनीं। अहसान-उल-हक का जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल है। करियर में भी काफ़ी मुश्किलात का सामना करना पड़ा।लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और लगन ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: तालाबों को नई ज़िंदगी देने वाले रामवीर तंवर की प्रेरणादायक कहानी

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Topics

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Related Articles

Popular Categories