Monday, January 26, 2026
12.1 C
Delhi

वारिस ख़ान ने अपनी बहादुरी से बचाई एक परिवार की जान, बने MP के पहले ‘गुड सेमेरिटन’

13 नवंबर 2024 की सुबह, मध्य प्रदेश के राजगढ़ ज़िले के वारिस ख़ान अपनी बाइक से बीनागंज जा रहे थे। इसी दौरान, एबी रोड हाईवे पर शिवपुरी से भोपाल जा रही एक कार ब्रेक चिपकने के कारण पलट गई। कार में सात लोग सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। हादसे के बाद कार के दरवाजे लॉक हो गए, और अंदर बैठे लोग फंस गए।

वारिस ख़ान ने अपनी इंसानियत और बहादुरी दिखाते हुए, बिना समय गंवाए अपने हाथों से कार का दरवाज़ा तोड़ा और अंदर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनका यह साहसिक काम प्रशासन तक पहुंचा और उनकी खूब सराहना हुई। इसके साथ ही, वारिस ख़ान को “गुड सेमेरिटन” योजना के तहत ज़िले के पहले पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वारिस ख़ान मध्य प्रदेश के राजगढ़ ज़िले के ब्यावरा शहर में रहते हैं। करीब 12 साल पहले, वह नगरपालिका में प्लंबर के रूप में काम करते थे, लेकिन किसी कारणवश उनकी नौकरी चली गई। इसके बाद उनका जीवन मुश्किलों से घिर गया। उन्होंने परिवार का पेट पालने के लिए प्लंबिंग, क्लीनिंग और मज़दूरी जैसे काम किए।

वारिस ख़ान की बहादुरी के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीडियो कॉल के ज़रिए उनकी प्रशंसा की और उन्हें एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने का वादा किया। इस पर वारिस ख़ान ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि इनाम की बजाय उन्हें उनकी पुरानी नगरपालिका की नौकरी वापस दिला दी जाए। मुख्यमंत्री ने उनकी इस मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया। राजगढ़ के कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने उन्हें 5,000 रुपये का चेक भी भेंट किया। वारिस ख़ान की यह कहानी इंसानियत और बहादुरी की सच्ची मिसाल है। 

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: जयपुर की वीणा, मीणा जनजाति की कला को दे रहीं नई पहचान

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

शबनम बशीर(Shabnam Bashir): वो रहनुमा जिसने कश्मीर की अनदेखी राहों को दुनिया से रूबरू कराया

जम्मू-कश्मीर का बांदीपुरा, जहां हरमुख पर्वत की बुलंद चोटियां...

जम्मू और कश्मीर-नशीले पदार्थों का ख़तरा

जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) में हाल के वर्षों में ड्रग्स (Narco-Terrorism) के इस्तेमाल में तेज़ी से इज़ाफा देखा गया है। साल 2026 के पहले हफ्ते के दौरान, केंद्र शासित प्रदेश (UT) में नशीले पदार्थों से संबंधित कई गिरफ्तारियां और बरामदगी दर्ज की गईं

Sunil Jaglan: एक पिता ने बदल दी सोच: Selfie with Daughter से गालीबंद घर तक की Journey

हरियाणा जैसे राज्य में जहां खाप पंचायतों (Khap Panchayats) में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी, सुनील जी ने बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने ‘लाडो पंचायत’ (Lado Panchayat) की शुरुआत की, जहां लड़कियां खुद अपने हकों की बात करती हैं।

Viksit Bharat: पंचर की दुकान से भारत मंडपम तक – झारखंड के चंदन का सफ़र

एक आम परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े...

Topics

शबनम बशीर(Shabnam Bashir): वो रहनुमा जिसने कश्मीर की अनदेखी राहों को दुनिया से रूबरू कराया

जम्मू-कश्मीर का बांदीपुरा, जहां हरमुख पर्वत की बुलंद चोटियां...

जम्मू और कश्मीर-नशीले पदार्थों का ख़तरा

जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) में हाल के वर्षों में ड्रग्स (Narco-Terrorism) के इस्तेमाल में तेज़ी से इज़ाफा देखा गया है। साल 2026 के पहले हफ्ते के दौरान, केंद्र शासित प्रदेश (UT) में नशीले पदार्थों से संबंधित कई गिरफ्तारियां और बरामदगी दर्ज की गईं

Sunil Jaglan: एक पिता ने बदल दी सोच: Selfie with Daughter से गालीबंद घर तक की Journey

हरियाणा जैसे राज्य में जहां खाप पंचायतों (Khap Panchayats) में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी, सुनील जी ने बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने ‘लाडो पंचायत’ (Lado Panchayat) की शुरुआत की, जहां लड़कियां खुद अपने हकों की बात करती हैं।

Related Articles

Popular Categories