Saturday, May 9, 2026
34.1 C
Delhi

बिहार के इस गांव का मोहर्रम क्यों है ख़ास?

बिहार के सीवान ज़िले के भीखपुर गांव से निकलने वाला ताजिया हिंदू मुस्लिम एकता का अनूठा उदाहरण है। इस गांव में करीब 350 से 400 घर हैं और हिंदू-मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग बराबर है। यहां के लोगों का मानना है कि यहां ताजिया निकालने की परंपरा करीब 195 साल पुरानी है।

छोटे इमामबाड़े के नाम से फेमस अंजुमन रिज़विया में 80 फीट का ताजिया बनाया गया और बड़े इमामबाड़े अंजुमन अब्बासी में 84 फीट का ताजिया बनाया गया। ताजिया को हिंदू और मुस्लिम कारीगर मिलजुल कर बनाया है। ताजिया जब बनाया जाता है तो गांव से बाहर के युवक भी गांव आ जाते हैं।

सिर्फ मुसलमान ही नहीं गांव में कई हिंदू परिवार भी ताजिया रखते हैं। चैनपुर बाजार के चुन्नीलाल मुन्नीलाल के ताजिया के नाम से प्रसिद्ध ताजिया इस बार भी बन रहा है। चुन्नीलाल का ताजिया करीब 70 सालों से रखा जा रहा है। भीखपुर के ताजिया उठने से पहले यहां के लोग चुन्नीलाल के दरवाजे पर जाकर मजलिस और मातम करते हैं।

इस काम में गांव के हिंदू-मुसलमान दोनों को मुहर्रम के दिन इमामबाड़ा से एक विशाल जुलूस के साथ कर्बला तक ले जाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु ताजिये पर बताशा, लड्डू, मलीदा, शर्बत, खिचड़ी रोटी, तिलक, नारियल वगैरह रखते हैं।

सीवान जिले के ठेपहा गांव में भी ये जुलूस निकलता है। ठेपहा के निवासी ललन चौधरी के मुताबिक, “हम मुहर्रम मानते भी हैं, और मुसलमानों के साथ ताजिया जुलूस भी निकालते हैं।”गांव की मस्जिद के मौलाना शम्सुल हक का कहना है, “मुहर्रम मनाने वाले हिंदू दूसरों को शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देते हैं।”

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: लकड़ी पर शानदार दस्तकारी और जियोमेट्रिक पैटर्न के साथ बनती है ‘ख़तमबंद’ आर्ट

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Topics

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Red Chief से RedTape तक: कैसे कानपुर बना भारत का लेदर सिकंदर

एक ज़माने में कानपुर की सड़कों पर अंग्रेजों की...

Related Articles

Popular Categories