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अमेरिकी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा से वैश्विक रणनीति को आकार

अमेरिका की विशिष्ट सैन्य शिक्षा प्रणाली के भीतर, अधिकारी कठोर अध्ययन, बिना पूर्व-निर्धारित परिदृश्यों वाले युद्धाभ्यास और नागरिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक रणनीतिकार बनना सीखते हैं।

जब हम सैन्य प्रशिक्षण के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे मन में कीचड़ से भरे प्रशिक्षण शिविरों में शारीरिक अभ्यास या राइफल ड्रिल करते कैडेटों की तस्वीर उभरती है। हालांकि, सैन्य शिक्षा का एक और पहलू भी है—कक्षा, जहां व्यावसायिक सैन्य शिक्षा के अभिन्न हिस्से के रूप में बड़ी मात्रा में बौद्धिक तैयारी होती है।

रक्षा विश्लेषक रामकृष्ण रमानी ने हाल ही में अमेरिकी विदेश विभाग के आईवीएलपी कार्यक्रम “वी द पीपल: मिलिट्री एजुकेशन इन अमेरिका” के दौरान इन संरचनात्मक ढांचों का अध्ययन किया। रमानी, जो चेन्नई स्थित एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और मद्रास विश्वविद्यालय में रक्षा और रणनीतिक अध्ययन पढ़ाते हैं, ने इस अवसर का उपयोग अमेरिकी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा प्रणाली के पाठ्यक्रम निर्माण और संस्थागत संबंधों का अध्ययन करने के लिए किया। उन्होंने विशेष व्यावसायिक सैन्य शिक्षा संगोष्ठियों में भाग लिया, व्यावहारिक युद्धाभ्यास सत्र में शामिल हुए और कई शहरों में सैन्य शिक्षा विशेषज्ञों तथा सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।


“सभी पेशेवर सेनाओं की तरह, अमेरिका में भी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा एक ऐसा करियर-व्यापी क्रम है, जिसे सामरिक विशेषज्ञों को रणनीतिक विचारकों में बदलने के लिए तैयार किया गया है,” रमानी कहते हैं। यह प्रणाली रणनीतिक सोच को एक ऐसे कौशल के रूप में देखती है, जिसे लगातार निखारने की आवश्यकता होती है। वह कहते हैं, “इसलिए कक्षा सत्र किसी अधिकारी के काम का मुख्य हिस्सा होते हैं, कोई अतिरिक्त गतिविधि नहीं।”

सैन्य नेतृत्व और संयुक्त सेवा की नींव 

यह व्यापक शिक्षा प्रारंभिक स्तर से ही शुरू हो जाती है, जिसमें विद्यार्थियों को सक्रिय सैन्य सेवा में प्रवेश करने से काफी पहले रणनीतिक ढांचों से परिचित कराया जाता है।

रमानी ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव पेंसाकोला हाई स्कूल और कलैराडो मिलिट्री अकादमी में किया, जहां दोनों संस्थान एयर फोर्स जूनियर रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स की मेजबानी करते हैं। यह अमेरिकी सशस्त्र बलों द्वारा पूरे अमेरिका के हाई स्कूलों में प्रायोजित एक फेडेरल कार्यक्रम है। रमानी बताते हैं, “ग्रेड 8 और उससे ऊपर के छात्रों को परेड ड्रिल के अलावा बुनियादी सैन्य विज्ञान, इतिहास, विश्व मामलों की मूल बातें और ड्रोन निर्माण व संचालन, उपग्रह नेविगेशन जैसी प्रासंगिक तकनीकों से परिचित कराया जाता है।”

जब ये विद्यार्थी उच्च शिक्षा की ओर बढ़ते हैं, तो वे विशेष विश्वविद्यालय आधारित कार्यक्रमों से जुड़ते हैं। रमानी कहते हैं, “आमतौर पर युवा हाई स्कूल ग्रेजुएट वेस्ट प्वाइंट जैसे सेवा अकादमियों में प्रवेश करते हैं या कॉलेज के विद्यार्थी रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स में शामिल होते हैं।”
जैसे-जैसे अधिकारी रैंक में ऊपर बढ़ते हैं, शिक्षा प्रणाली भी अपना स्वरूप बदलती है। शुरुआती वर्षों में ध्यान सामरिक और क्षेत्र-आधारित प्रशिक्षण पर रहता है, ताकि नए नियुक्त अधिकारी किसी अभियान के दौरान एक प्लाटून का सुरक्षित नेतृत्व करना सीख सकें। कुछ वर्षों की सेवा के बाद, आमतौर पर मेजर के पद के आसपास, सैन्यकर्मी फिर से कक्षा के माहौल में लौटते हैं।

रमानी कहते हैं, “इसी चरण में वे सीखते हैं कि सेना की विभिन्न शाखाएं किस प्रकार तालमेल के साथ काम करती हैं ताकि अधिक रणनीतिक परिणाम हासिल किए जा सकें।”

समर लीडर्स एक्सपीरियंस कार्यक्रम ने अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से आए हाई स्कूल के विद्यार्थियों को वेस्ट प्वाइंट स्थित यू.एस. मिलिट्री एकेडमी को प्रत्यक्ष रूप से जानने और समझने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम के तहत लगभग 1,600 ऐसे विद्यार्थियों, जो अगले वर्ष हाई स्कूल के अंतिम वर्ष में प्रवेश करने वाले हैं, ने तीन अलग-अलग पाँच-दिवसीय सत्रों में भाग लेकर कैडेट के जीवन का अनुभव प्राप्त किया। यह कार्यक्रम अमेरिकी सेना के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसके तहत विद्यार्थियों को वेस्ट प्वाइंट जैसी सेवा अकादमियों में प्रवेश लेने या रिज़र्व ऑफिसर्स’ ट्रेनिंग कॉर्प्स से जुड़ने से पहले ही नेतृत्व और सैन्य शिक्षा से परिचित कराया जाता है। (फोटो: एरिक बार्टेल्ट / यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री एकेडमी, वेस्ट प्वाइंट)

अमेरिकी वॉर कॉलेज और नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी का परिदृश्य

इस संस्थागत ढांचे का वास्तविक प्रभाव तब स्पष्ट होता है जब अधिकारी रक्षा नेतृत्व के उच्चतम स्तरों तक पहुंचते हैं। इसी समय वे प्रतिष्ठित वॉर कॉलेजों में प्रवेश के पात्र बनते हैं। रमानी के अनुसार, “इस समय उन्हें युद्धक्षेत्र वाली मानसिकता को छोड़कर एक राजनेता की सोच अपनानी होती है।”

यह वरिष्ठ स्तर की व्यवस्था सेवा-विशिष्ट शाखाओं और संयुक्त संस्थानों के एक अत्यधिक समन्वित नेटवर्क के रूप में काम करती है, जिसका समापन वॉशिंगटन डी.सी. स्थित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में होता है।

रमानी बताते हैं, “अमेरिकी सेना वॉर कॉलेज जैसे संस्थानों में लक्ष्य ऐसे लीडर तैयार करना है, जो अनिश्चित और जटिल समस्याओं से निपट सकें तथा देश के नागरिक नेतृत्व को सैन्य सलाह दे सकें।”  वह बताते हैं कि अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का प्रश्न-आधारित अध्ययन अधिकारियों को यह समझाता है कि सेना किसी देश के रणनीतिक साधनों में से केवल एक साधन है।

इन रक्षा रणनीतियों को राष्ट्रीय उद्देश्यों से जोड़ने के लिए वॉर कॉलेज सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का उपयोग करते हैं। रामानी कहते हैं, “वे विभिन्न सरकारी एजेंसियों के नागरिक अधिकारियों और मित्र देशों के अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों के साथ कक्षाएं साझा करते हैं। यह विविध मिश्रण सुनिश्चित करता है कि वे जटिल वैश्विक समस्याओं का समाधान मिलकर करना सीखें।”

व्यावसायिक सैन्य शिक्षा और नागरिक विश्वविद्यालयों के बीच सेतु

राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा प्रणाली एक दोहरी व्यवस्था वाले पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में काम करती है, जो संरचित सैन्य प्रशिक्षण को विविध और विकेंद्रीकृत नागरिक शैक्षणिक विशेषज्ञता के साथ संतुलित करती है। जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज, हार्वर्ड कैनेडी स्कूल और प्रिंसटन स्कूल ऑफ पब्लिक एंड इंटरनेशनल अफेयर्स जैसे संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बौद्धिक केंद्र के रूप में काम करते हैं। उच्च प्रदर्शन करने वाले सैन्य अधिकारियों को नियमित रूप से नेशनल सिक्योरिटी फेलो के रूप में इन विश्वविद्यालयों में भेजा जाता है, ताकि पारंपरिक सैन्य सोच में महत्वपूर्ण बौद्धिक विविधता लाई जा सके।

इसी प्रकार, युद्ध संबधी कॉलेजों में नागरिक संकाय सदस्यों की उपस्थिति अकादमिक कठोरता और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है। रमानी कहते हैं, “शीर्ष युद्ध संबधी कॉलेजों के संकाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सैन्य इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और रणनीतिक अध्ययन में विशेषज्ञता रखने वाले पीएच.डी. धारक नागरिक शिक्षकों से बना है।”

यह अकादमिक एकीकरण विशेष संयुक्त डिग्री पहलों और गहन शोध नेटवर्क तक भी विस्तारित है। उदाहरण के लिए, अमेरिकी स्पेस फोर्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज के साथ साझेदारी करके श्राइवर स्पेस स्कॉलर्स प्रोग्राम संचालित करती है, जिसके माध्यम से कर्मी नागरिक शैक्षणिक वातावरण में सैन्य रणनीति में मास्टर डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। 

बिना पूर्व-निर्धारित युद्धाभ्यास की भूमिका  

जैसे-जैसे अधिकारी वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों तक पहुंचते हैं, पाठ्यक्रम संयुक्त, अंतर-एजेंसी, अंतर-सरकारी और बहुराष्ट्रीय कार्यक्रमों की ओर बढ़ता है, जिससे संस्थागत सीमाओं को पार किया जा सके।

रमानी ने जिन सबसे प्रभावशाली उपकरणों को प्रत्यक्ष रूप से देखा, उनमें से एक सिद्धांत को वास्तविक दुनिया की तैयारी में बदलने के लिए इंटरैक्टिव सिमुलेशन का उपयोग था। वह स्वयं भी एक संक्षिप्त सत्र में शामिल हुए। वह कहते हैं, “व्यावसायिक सैन्य शिक्षा में जटिल और बिना पूर्व-निर्धारित परिदृश्यों वाले युद्धाभ्यास का उपयोग किया जाता है, जिसमें विद्यार्थियों को अत्यधिक गतिशील संकट परिस्थितियों में रखा जाता है, जहां उन्हें काल्पनिक विरोधियों की चालों का जवाब देना होता है।”

इन अभ्यासों और विश्लेषणात्मक तरीकों के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को आधुनिक असममित खतरों का पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। रमानी बताते हैं, “नेशनल वॉर कॉलेज जैसे संस्थानों में अधिकारी वैश्विक पक्षों की क्षमताओं और इरादों का मूल्यांकन करने के लिए ऐतिहासिक उदाहरणों, खुफिया विश्लेषण और भू-राजनीतिक कारकों का अध्ययन करते हैं, जिसमें साइबर युद्ध, दुष्प्रचार और आर्थिक दबाव जैसे असममित खतरों पर विशेष जोर दिया जाता है।”

“रेड टीमिंग” जैसे अभ्यास विद्यार्थियों की अपनी धारणाओं को चुनौती देने, संचालन योजनाओं में कमजोरियों की पहचान करने और उभरती रणनीतियों की मजबूती जांचने के लिए किए जाते हैं।

अंतर-एजेंसी समन्वय और रक्षा कूटनीति

पूरी शिक्षा प्रणाली को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह “संपूर्ण सरकार” दृष्टिकोण को बढ़ावा दे। पाठ्यक्रम स्तर पर मॉड्यूल इस बात को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि अभियानों के दौरान सेना नागरिक नेतृत्व के सहयोगी तत्व के रूप में कैसे काम करती है।

“उदाहरण के लिए, अधिकारी अध्ययन करते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद किस प्रकार खुफिया जानकारी को एकीकृत करती है और घरेलू संकटों या आतंकवाद विरोधी अभियानों सहित अंतरराष्ट्रीय अभियानों के दौरान पेंटागन, विदेश विभाग, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य विभागों के बीच कार्रवाई का समन्वय करती है।”

यह अंतर-एजेंसी दृष्टिकोण वरिष्ठ कार्यकारी प्रशिक्षण तक विस्तारित होता है, जहां उच्च स्तर के क्षेत्रीय अध्ययन विभिन्न सरकारी शाखाओं के बीच समन्वय का अनुकरण करते हैं। रमानी कहते हैं, “वरिष्ठ स्तर पर नेता समापन पाठ्यक्रमों में भाग लेते हैं, जिनमें ऐसे गहन क्षेत्रीय अध्ययन शामिल होते हैं जो राजदूतों, खुफिया निदेशकों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष बातचीत का अनुकरण करते हैं।”

मानवपूंजी ही अंतिम संपत्ति

जो देश अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं, उनके लिए अमेरिकी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा मॉडल की संरचनात्मक रूपरेखा एक स्थायी मार्गदर्शक प्रस्तुत करती है।

रमानी कहते हैं, “जब हम देखते हैं कि देश मजबूत रक्षा तैयारियां कैसे विकसित करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान मानक हथियार प्रणालियों पर जाता है। लेकिन अमेरिकी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा प्रणाली दिखाती है कि किसी राष्ट्र की अंतिम रणनीतिक संपत्ति वास्तव में उसकी मानवीय और बौद्धिक पूंजी होती है। यह संज्ञानात्मक विकास को एक मूल क्षमता के रूप में देखती है।”

अंततः, वास्तविक रक्षा तैयारी उतनी ही लोगों के विकास पर निर्भर करती है जितनी तकनीक हासिल करने पर। कठोर शैक्षणिक प्रणाली के माध्यम से अनुकूलनशील नेतृत्व वर्ग तैयार करके, राष्ट्र यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे भविष्य के वैश्विक संघर्षों की अप्रत्याशित वास्तविकताओं के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

रमानी के अनुसार, सबसे अधिक प्रभाव डालने वाली बात कठोर सिद्धांतों के बजाय विश्लेषणात्मक अनुकूलन क्षमता को बढ़ावा देने वाली यह संरचनात्मक व्यवस्था थी। वह कहते हैं, “अमेरिकी व्यावसायिक सैन्य शिक्षा मॉडल ऐसे नेताओं को तैयार करने का एक खाका प्रस्तुत करता है, जो आज के अप्रत्याशित सुरक्षा परिदृश्य को समझ सकें। शिक्षा और रणनीतिक सोच में निवेश करके राष्ट्र ऐसे लीडर तैयार कर सकते हैं, जो न केवल आज के युद्धों के लिए तैयार हों, बल्कि कल के रणनीतिक परिदृश्य का अनुमान लगाने, उसके अनुसार ढलने और उसे आकार देने में भी सक्षम हों।”

-सैयद सुलेमान अख्तर, स्पैन पत्रिका

Also Read: अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

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