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राजस्थान के सलीम ख़ान ने लकड़ी से बनाया ताजमहल, 18 महीनों का लगा वक़्त

आगरा में मौजूद सफेद संगमरमर से बने खूबसूरत ताजमहल के बारे में करीब हर कोई वाकिफ़ होगा। लेकिन क्या आपने लकड़ी से बने ताजमहल के बारे में पढ़ा या सुना है? राजस्थान के हनुमानगढ़ के करनपुरा के रहने वाले सलीम ख़ान ने लकड़ी से ताजमहल बनाकर लोगों ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

सलीम ख़ान पिछले एक दशक से ज्यादा वक्त से लकड़ी से खूबसूरत चीजे बना रहे हैं। उन्हें ये हुनर अपने पिता से विरासत में मिला है। सलीम ने आवाज़ द वॉयस को बताया कि उन्होंने बचपन में लकड़ी से बचे कचरे से एक झोपड़ी बनाई थी। झोपड़ी को देखकर उनके वालिद ने कहा था कि ऐसी कला को बड़े शहरों के लोग और विदेशी पर्यटक काफ़ी ज़्यादा पसंद करते हैं। बस तभी से सलीम कुछ नायाब कलाकृति बनाने के बारे में सोचने लगे। घर के आर्थिक हालात ठीक न होने के चलते उन्होने बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी।

लकड़ी से बने ताजमहल की क्या है ख़ासियत

उनके ताजमहल की ख़ासियत है कि उसके सभी हिस्से अलग हो जाते हैं, जिससे इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसके अंदर दो गुप्त तिजोरियां भी बनाई गई हैं, जिसे हर कोई नहीं खोल सकता। सलीम ने बताया कि लकड़ी का ताजमहल बनाने के लिए ख़ास तरह के औज़ारों की ज़रूरत थी। उन औज़ारों को उन्होंने ख़ुद बनाया। इस पर तक़रीबन एक लाख सत्तर हज़ार रुपये की लागत आई। घर के आर्थिक हालात ख़राब होने चलते उनके ऊपर काफ़ी क़र्ज़ बढ़ गया इसलिए उन्हे अपनी ज़मीन बेचनी पड़ी।

अपने सपनों का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं कि “मैं चाहता हूं कि ताजमहल के अलावा और भी इस तरह की अनोखी कलाकृतियां बनाकर पूरे देश और विदेश में भेजूं। अगर कोई अपनी पत्नी या प्रेमिका को अनमोल तोहफ़ा देना चाहता है, तो वह लकड़ी का ताजमहल दे सकता है।”

उन्हें मलाल है कि उनकी कलाकृतियों को उनके प्रशंसक नहीं मिल पाए, जो मिलने चाहिए थे। वो कहते हैं कि प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। घर चलाने के लिए वो बढ़ई का काम करते हैं।

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