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Nihal Barai की Fiber Art की दुनिया: गुवाहाटी के सोनापुर से नई पहचान

जब आप गुवाहाटी से लगभग 30 किलोमीटर दूर सोनापुर की ओर बढ़ते हैं और नेशनल हाईवे पर चलते हुए अचानक गौतम बुद्ध की बड़ी मूर्ति दिखाई देती है, पेड़ों के बीच खड़े गैंडे की मूर्ति नज़र आएं, या डायनासोर दिखाई दे है तो समझिए कि आप Nihal Barai की ‘Barai Art & Sculpture’ ओपन‑शोरूम के पास आ चुके हैं। ये कोई साधारण आर्ट गैलरी या स्टूडियो नहीं है, बल्कि यहां कलाकार अपनी कल्पना और तकनीक से Fiber की ख़ूबसूरत मूर्तियां बनाते हैं। यहां जानवर हों या देवी-देवता, हर मूर्ति इतनी ज़िंदा दिखाई पड़ती हैं कि उसे छूने का मन करता है।

फाइबर मूर्तियों की दुनिया: कला और व्यापार का संगम

स्टूडियो के मालिक Nihal Barai बताते हैं कि यहां से बनी मूर्तियां नॉर्थ ईस्ट के पार्क, रिसॉर्ट, सरकारी प्रोजेक्ट्स और यहां तक कि दिल्ली के राष्ट्रपति भवन तक जाती हैं। एक डायनासोर बनाने में करीब डेढ़ महीने का वक्त लगता है और इसकी कीमत 1.5 लाख तक जाती है। अगर उनके पास उस डिज़ाइन का मोल्ड है तो लागत थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन कोई नया डिज़ाइन बनाना हो तो कच्चा माल और मेहनत की वजह से दाम भी बढ़ जाता हैं।

एक पिता का सपना, बेटे की मेहनत

ये कहानी कला और मेहनत की है। जहां पिता ने एक राह दिखाई, तो बेटे ने उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाया। Nihal Barai के पिता शिवनाथ बरई, जो खुद एक कलाकार थे, ने 2013 में इस काम की शुरुआत की। उन्होंने कोलकाता के रविंद्र भारती विश्वविद्यालय से कला की पढ़ाई की और फिर अपने ही स्टूडियो की नींव रखी। आज उनके बेटे Nihal Barai इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। और उनका सालाना टर्नओवर 60–70 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, और मुनाफा लगभग 10–15 फीसदी होता है।

कला का मौसम और सोशल मीडिया का असर

Nihal Barai के Fiber से बने प्रोडक्ट की सितंबर से अप्रैल के महीने तक अच्छी बिक्री होती है। शादी-ब्याह, रिसॉर्ट के सजावटी सामान, मंदिर की मूर्तियां, नावें, फाउंटेन हर ऑर्डर बिकता है। निहाल ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके अपने बिज़नेस को एक नई ऊंचाई दी है। उनके फेसबुक पेज Barai Art & Sculpture के ज़रिए भी कई लोग ऑर्डर देते हैं। सोशल मीडिया ने उनके काम को नए कस्टमर दिये और पहचान दिलाई। कला सिर्फ़ सजावट का साधन नहीं रही, ये एक ब्रांड बन चुकी है।

Fiber की ताकत: टिकाऊ, हल्का और सुंदर

स्टूडियो में भगवान, महापुरुषों से लेकर जानवरों तक की बड़ी-बड़ी Fiber से बनी मूर्तियां हैं। नरेंद्र मोदी, ईसा मसीह, और इनके बीच आपको छोटे-बड़े सजावटी खंभे और Fiber की रेलिंग भी मौजूद है, जो घरों और इवेंट्स की शोभा बढ़ाती हैं। उनके स्टूडियो में करीब 25 कारीगर काम करते हैं, जिनमें कुछ 20 सालों से इस पेशे से जुड़े हुए हैं। Fiber से बनी मूर्तियां 50 से 60 सालों तक चल सकती हैं, और नमी या बारिश का भी ज़्यादा असर नहीं होता और देखने में ख़ूबसूरत लगते हैं।

दिल्ली से नॉर्थ ईस्ट तक: एक सपना जो देशभर में फैल रहा है

Nihal Barai का ख़्वाब है कि वो अलग-अलग राज्यों में भी ऐसे ओपन स्टूडियो खोलें, ताकि लोग न सिर्फ़ मूर्तियां खरीद सकें बल्कि इस कला की प्रक्रिया को अपनी आंखों से देख भी सकें। और जान सकें कि इन्हें बनाने में कितनी मेहनत और सब्र से काम किया जाता है। अगर आप भी घर, गार्डन या किसी आयोजन के लिए फाइबर से बनी अनोखी मूर्तियां चाहते हैं, तो Barai Art & Sculpture के फेसबुक पेज पर जाकर ऑर्डर दे सकते हैं।

ये भी पढ़ें: असम की हथकरघा परंपरा : जहां हर बुनावट में छिपी है संस्कृति, आजीविका और आत्मनिर्भरता 

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