मध्य प्रदेश के नीमच ज़िले के छोटे से गांव कुंचड़ोद में रहने वाले Rahul Kumar Lohar के घर जब राष्ट्रपति भवन से आया एक लिफ़ाफ़ा पहुंचा, तो पूरा परिवार ख़ुशी और हैरत से भर गया। एक किसान परिवार के बेटे की बनाई पेंटिंग अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुकी थी। ये सिर्फ़ एक कलाकार की कामयाबी नहीं, बल्कि उस सपने की जीत थी जो गांव की मिट्टी से उठकर देश के सबसे बड़े भवन तक पहुंचा।
“नारी शक्ति” पेंटिंग को मिली राष्ट्रपति की सराहना
आर्टिस्ट Rahul Kumar Lohar ने “नारी शक्ति” विषय पर एक ख़ास पेंटिंग बनाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी थी। इस पेंटिंग में भारतीय औरत की ताक़त, भरोसा, ममता और हौसले को बेहद ख़ूबसूरती से दिखाया गया था। राहुल ने राष्ट्रपति भवन को लिखे अपने ख़त में ये भी गुज़ारिश की थी कि अगर उनकी कला पसंद आए, तो राष्ट्रपति अपना ऑटोग्राफ़ भेजें।
कुछ वक़्त बाद उनके घर राष्ट्रपति सचिवालय से ख़त, राष्ट्रपति का हस्ताक्षर किया हुआ फोटो और सराहना संदेश पहुंचा। Rahul Kumar Lohar कहते हैं कि ये पल उनके लिए किसी ख़्वाब से कम नहीं था। गांव के एक कलाकार के काम को राष्ट्रपति भवन से मिली ये पहचान अब पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

किसान परिवार से निकलकर बनाई अलग पहचान
मीडिया रिपोट्स के मुताबिक Rahul Kumar Lohar की पैदाइश साल 1991 को हुई। वो एक किसान परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं। बचपन से ही राहुल को पेटिंग और सोशल वर्कर में दिलचस्पी थी। गांव की सादगी, लोगों का ज़िंदगी और भारतीय तहज़ीब उनकी कला में साफ झलकती है।
उनकी पेंटिंग्स में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और समाज से जुड़े विषयों को खास जगह मिलती है। वो watercolor और pencil sketch के ज़रिए ऐसी तस्वीरें बनाते हैं, जिनमें सिर्फ़ रंग नहीं बल्कि जज़्बात भी नज़र आते हैं। इससे पहले भी वो उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान एक कोरोना मास्क पर 44 डॉक्टरों के छोटे-छोटे पेटिंग और मां दुर्गा की तस्वीर बनाई थी। ये पेटिंग डॉक्टरों को सम्मान देने का एक अनोखा तरीका थी। सोशल मीडिया पर ये तस्वीर तेज़ी से वायरल हुई और राहुल को Asia Book of Records से “Grand Master” का सम्मान मिला। उनका नाम World Book of Records London और India Book of Records में भी दर्ज किया गया।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माताजी हीरा बेन की तस्वीर बनाकर भी चर्चा में रह चुके हैं। उनकी इस पेंटिंग की सबसे बड़ी ख़ीसियत ये थी कि इसे बनाने में किसी महंगे कैनवास या केमिकल रंगों का इस्तेमाल नहीं हुआ। राहुल ने जूट की बोरी, गाय का गोबर और फ़ूलों के रस जैसी नेचुरल चीज़ों से तस्वीर तैयार की गई थी।

इंटरनेशनल लेवल पर मिला सम्मान
Rahul Kumar Lohar की कला और समाज सेवा को इंटरनेशनल लेवल पर भी सराहा गया है। Ghana की Webbic University ने उन्हें Honorary Doctorate की उपाधि दी, जबकि महाराष्ट्र में उन्हें “Kala Bhushan Award” से सम्मानित किया गया। आज Rahul Kumar Lohar सिर्फ़ एक कलाकार नहीं, बल्कि गांव के उन युवाओं की उम्मीद बन चुके हैं जो छोटे शहरों और सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी ये बताती है कि अगर इरादे मज़बूत हों, तो गांव की गलियों से निकलकर इंसान राष्ट्रपति भवन तक अपनी पहचान बना सकता है।
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