Friday, October 16, 2026
24.8 C
Delhi

नुसरत के दिलदार

उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खान की सबसे ख़ास क़व्वालियों में सबसे ख़ास क्षण वह होता है जब एक लम्बी तान में अपनी पुरपेच कला का जादू दिखाने के बाद वे मिनट-आधा मिनट को तबले के साथ अकेले रू-ब-रू होते हैं। कभी एक ताल खाली छोड़ते हैं कभी दो या तीन. उस खाली स्पेस को भरने के लिए संगतकारों की लयबद्ध तालियां होती हैं या सिर्फ तबला. तबले की वह खट्ट-खटक देर तक निर्वात में गूंजती है।

तमाम प्लेटफॉर्म्स पर उस्ताद के सैकड़ों वीडियो उपलब्ध हैं। मैं एक बहुत लम्बे अरसे से कोशिश कर रहा हूं कि उनकी संगत करने वाले कलाकारों के बारे में जानकारी जुटा सकूं. अलग-अलग आयुवर्ग से ताल्लुक रखने वाले उन सहगायकों के बारे में कहीं कुछ नहीं मिला. हां नुसरत के सगे छोटे भाई मरहूम फारूख फ़तेह अली खान और फारुख के बेटे राहत जरूर पहचान में आते हैं। बाकी लोगों के नाम तक आज नहीं मिल सके। उम्र भर एक बहुत बड़े गायक की छाया में रह गए इन सहगायकों को जहां-जहां मौका मिला, उन्होंने अपने उस्ताद की गायकी में बट्टा नहीं लगने दिया। बल्कि बाज दफा तो वे नुसरत से बस उन्नीस रह जाते हैं।

नुसरत की क़व्वालियों के वीडियो देखते हुए एक पावर-इक्वेशन भी समझ में आती है जिसके भीतर तान खेंच रहे नौउम्र गवैये की तरफ बड़ी उम्र वाले सहगायक की आंख का उठना भर तक दर्ज हो जाता है। मुझे यह तसव्वुर करने में भी मजा आता है कि ये सहगायक अपने घरों में कैसे रहते होंगे, इनके दोस्त कौन लोग होंगे और एक शाम की संगत के इन्हें कितने पैसे मिलते होंगे।

नुसरत की तमाम कंसर्ट्स के वीडियो देख लीजिये आपको तबलची नजर आएगा ही नहीं। तमाम माइक्स वगैरह के पीछे सबसे पिछली कतार में कहीं उसे बैठने की जगह मुहैय्या कराई गयी होती है। सोचना दिलचस्प है कि इस न दिखाई देने वाले साधक के बगैर नुसरत का समूचा तिलिस्म कैसे मुकम्मल होता।

नुसरत फ़तेह अली ख़ान के साथ सबसे लम्बे समय तक रहे तबलानवाज उस्ताद दिलदार हुसैन साहब थे जिन्होंने कोई तीस साल तक इस उस्ताद के साथ जुगलबंदी की। पंजाब के कसूर इलाके से ताल्लुक रखता था उस्ताद दिलदार हुसैन का खानदान।

बचपन से ही संगीत के वातावरण में पले-बढ़े दिलदार साहब ने मात्र पांच वर्ष की उम्र में तबला बजाना शुरू किया। उनके पिता मियां शरीफुद्दीन भी क़व्वाली संगीतकार और शिक्षक थे, जिन्होंने उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया। बाद में उन्होंने जाकिर हुसैन के पिता और पिछले युग के महान तबला वादक उस्ताद अल्लारक्खा खान से ट्रेनिंग हासिल की। मात्र 12 साल की उम्र में 1969 में भारत में उनका पहला सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ। 1971 में, 14 साल के हुए तो वे नुसरत फतेह अली खान की नवगठित क़व्वाली पार्टी में शामिल हो गए। क़व्वाली में हारमोनियम बजाने वाले नुसरत साहब के भाई फारुख फतेह अली खान के साथ वे मूल टीम के संस्थापक सदस्य बने।

नुसरत साहब की क़व्वाली में दिलदार हुसैन का तबला सिर्फ ताल नहीं, बल्कि भाव और आत्मा का साथी था। नुसरत की तेज़ रफ्तार वाली बंदिशों, तरानों और धम्माल में उनका तबला किसी मजबूत धमक की तरह गूंजता था। जब नुसरत साहब वर्ल्ड टूअर पर गए तो दिलदार भी साथ गए — पीटर गेब्रियल, पर्ल जैम जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के साथ सहयोग किया और क़व्वाली को सूफी संगीत के रूप में ग्लोबल ऑडियंस तक पहुंचाया. नुसरत साहब की 1997 में असामयिक मृत्यु तक वे उनके साथ रहे. नुसरत साहब अक्सर दिलदार हुसैन की तारीफ करते थे और उनकी लयबद्धता को अपनी गायकी का मजबूत आधार मानते थे।

उनके दोनों बेटे अबरार और इसरार भी तबला बजाते हैं। साल 2015 में उन्होंने अबरार के साथ मिल कर क़व्वाली का एक अल्बम जारी किया जिसका नाम है ‘सुर संगीत।’ इस अल्बम को हासिल कर सकें तो सुनने पर मालूम होता होता है कि अगले बरस सत्तर के हो जाने वाले उस्ताद दिलदार हुसैन खलीफा तबलची होने के साथ-साथ एक सिद्धहस्त शास्त्रीय गायक भी हैं।

ये भी पढ़ें: खर्चा-ए-पानदान: लखनऊ की नवाबी तहज़ीब में बेगमात की निजी सल्तनत

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

Ashok Pande
Ashok Pandehttp://kabaadkhaana.blogspot.com
अशोक पांडे चर्चित कवि, चित्रकार और अनुवादक हैं। उनका प्रकाशित उपन्यास ‘लपूझन्ना’ काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा है। पहला कविता संग्रह ‘देखता हूं सपने’ 1992 में प्रकाशित। जितनी मिट्टी उतना सोना, तारीख़ में औरत, बब्बन कार्बोनेट अन्य बहुचर्चित किताबें। कबाड़खाना नाम से ब्लॉग kabaadkhaana.blogspot.com। अभी हल्द्वानी, उत्तराखंड में निवास।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

Topics

हसन नईम: ग़म को अपनी ताक़त बनाने वाले शायर

हसन नईम ने अपनी शायरी के ज़रिए ज़िंदगी के...

5,000 घंटे की उड़ान, चार दशक की ख़िदमत: Air Chief Marshal AP Singh का शानदार सफ़र

जब कोई लड़ाकू विमान आवाज़ की रफ़्तार को पार...

वहीद अख़्तर: शायरी, फ़लसफ़े और इल्म की दुनिया का एक अहम नाम

उर्दू अदब की दुनिया में शायरी सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का...

मुजतबा हुसैन: हंसी के पीछे छुपी सच्चाई का बेमिसाल क़लमकार

उर्दू अदब में तंज़-ओ-मज़ाह की बात हो और मुजतबा...

Balbir Singh Senior: भारतीय हॉकी को गोल्ड की राह दिखाने वाले

भारतीय हॉकी के इतिहास में जब भी बड़े खिलाड़ियों...

Related Articles

Popular Categories