Monday, May 11, 2026
34.1 C
Delhi

ख़ुदा बख़्श पब्लिक ओरिएंटल लाइब्रेरी में मौजूद बेशक़ीमती ख़ज़ाना

मौलवी ख़ुदा बख़्श ख़ान बिहार के सीवान ज़िले के रहने वाले एक कमाल के इंसान थे। उनका जन्म 1842 में हुआ था। वह न सिर्फ़ एक पुस्तक प्रेमी थे, बल्कि एक समाज सुधारक भी थे। ख़ुदा बख़्श ख़ान ने अपने जीवन, धन, और संपत्ति को पुस्तकों के संग्रह और संरक्षण में समर्पित कर दिया। उनके कोशिशें का नतीजा है कि पटना में मौजूद ख़ुदा बख़्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को उन्होंने 1891 में स्थापित किया। यह पुस्तकालय आज न सिर्फ़ बिहार, बल्कि पूरे देश का गौरव है।

 ख़ुदा बख़्श ख़ान को किताबों के प्रति प्रेम अपने पिता से विरासत में मिला। उनके पिता पटना में एक मशहूर वकील थे और उन्होंने अपने पुस्तक संग्रह को ख़ुदा बख़्श को सौंपा। ख़ुदा बख़्श ख़ान ने कानून की पढ़ाई की और पटना में वकालत शुरू की। अपनी कमाई से वह लगातार दुर्लभ पांडुलिपियाँ और पुस्तकें खरीदते रहे। उनका मक़सद इन दुर्लभ ग्रंथों को संरक्षित करना और ज्ञान को आम जनता के लिए सुलभ बनाना था।  

ख़ुदा बख़्श ख़ान ने 1891 में सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना की। इसकी शुरुआत करीब 4000 दुर्लभ पांडुलिपियों से हुई थी। आज इसमें 21,000 से ज़्यादा नायाब पांडुलिपियां और लाखों किताबें हैं। इन पांडुलिपियों में अरबी, फ़ारसी, संस्कृत, उर्दू, और हिंदी जैसी भाषाओं में धर्म, चिकित्सा, इतिहास और साहित्य से जुड़े दस्तावेज़ शामिल हैं।

ख़ुदा बख़्श ख़ान ने इन ग्रंथों को संरक्षित करने के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया। वे अपनी आय का बड़ा हिस्सा पांडुलिपियों पर खर्च करते थे। एक बार, उन्होंने हत्या के एक मामले में फ़ीस के बदले किताबें खरीदने का फैसला लिया। कठिन समय में, उन्हें अपनी किताबों के लिए बड़े प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने इन्हें बेचने से इंकार कर दिया।  

ख़ुदा बख़्श पुस्तकालय आज शोधकर्ताओं, छात्रों, और इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह जगह ज्ञान, साहित्य और शोध के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। देश-विदेश से विद्वान यहां अरबी, फारसी और दूसरी दुर्लभ भाषाओं की पांडुलिपियों पर शोध करने आते हैं।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: जयपुर की वीणा, मीणा जनजाति की कला को दे रहीं नई पहचान

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Meeraji (मीराजी: उर्दू कविता में मॉडर्निज़्म की शुरुआत करने वाला जीनियस

एक मैला-कुचैला रांझा था। नाम मोहम्मद सनाउल्लाह डार। दुबली...

मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की कथा

सुबह की पहली रोशनी में, जब धूप अभी पूरी...

अब्दुल बारी आसी: दर्द को अल्फ़ाज़ और मोहब्बत को आवाज़ देने वाले शायर

“अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को,मैं...

Topics

Meeraji (मीराजी: उर्दू कविता में मॉडर्निज़्म की शुरुआत करने वाला जीनियस

एक मैला-कुचैला रांझा था। नाम मोहम्मद सनाउल्लाह डार। दुबली...

मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की कथा

सुबह की पहली रोशनी में, जब धूप अभी पूरी...

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Related Articles

Popular Categories