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गृहणी से बिजनेस वुमन बनने का सफर: असम की तनया बोरकाकोटी की प्रेरक कहानी

सही दिशा में मेहनत करने से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है असम की राजधानी गुवाहाटी में रहने वाली तनया बोरकाकोटी ने, जिन्होंने एक हाउसवाइफ के तौर पर अपनी ज़िंदगी की शुरुआत की और अब एक सफल बिजनेस वुमन बन चुकी हैं। तनया ने घर के कामों से समय निकालकर असम की पारंपरिक पोशाक “मेखला चादर” और सिल्क की साड़ियां बनाने का बिजनेस शुरू किया।

तनया अपने कपड़े किसी बुटीक या शोरूम में नहीं, बल्कि अपने घर से ही बेचती हैं। शुरुआती दौर में वह अपने मिलने-जुलने वालों के बीच ही अपने प्रोडक्ट्स बेचती थीं, लेकिन सोशल मीडिया के सहारे उन्होंने अपने बिजनेस को एक नई ऊंचाई दी। अब उनके कपड़ों की मांग गुवाहाटी से बाहर भी होने लगी है, और वे देश के अलग-अलग शहरों में फेमस हो रही हैं। 

अच्छी क्वालिटी, कम कीमत और ग्राहकों का भरोसा

तनया के बनाए हुए कपड़े अच्छी क्वालिटी के होते हैं और उनकी कीमतें भी बाजार के मुकाबले कम होती हैं, जो ग्राहकों को उनकी ओर आकर्षित करती हैं। उनकी दो सहेलियां पंखी और रिंकू ने DNN24 को बताया कि तनया के कपड़े न केवल अच्छे होते हैं, बल्कि उनका डिज़ाइन और कलर कॉंबिनेशन भी ख़ास होता हैं। पंखी ने कहा कि तनया का इंस्टाग्राम पेज फॉलो करने के बाद वह उसकी ग्राहक बन गईं, और रिंकू का कहना है कि उन्हे तनया के कपड़े दूसरे शोरूम्स से बेहतर लगते हैं।

इस बिजनेस को शुरू करते समय तनया के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बुनकर गुवाहाटी से दूर गांवों में रहते थे। गुवाहाटी में वर्कशॉप स्थापित करना उनके लिए मुश्किल था। ऐसे में उन्होंने बुनकरों के घरों में ही अपने खर्चे पर हथकरघे लगवा दिए। तनया अपने बुनकरों को डिज़ाइन और रॉ मटेरियल उपलब्ध कराती हैं और उनकी बनाई हुई साड़ियां और मेखला चादरें ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।

तनया बोरकाकोटी अपने बिजनेस की खुद बनी मॉडल

बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए तनया ने “अम्रपाली” नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार शुरू किया। अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग में चार चांद लगाने के लिए उन्होंने खुद मॉडलिंग भी की। पारंपरिक असमिया पोशाक पहनकर उन्होंने फोटोज सोशल मीडिया पर डाले, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। अब तनया के कपड़े कोलकाता, बेंगलुरू, गुजरात और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी बिकने लगे हैं।

50 से ज्यादा हथकरघों पर होता हैं काम

तनया ने कहा कि उनके ग्राहकों को कपड़े की क्वालिटी की पूरी जानकारी होती है, इसलिए वो अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी में कोई समझौता नहीं करतीं। आज उनके पास 50 से ज्यादा हथकरघे हैं, जिनमें सिल्क, कॉटन और तसर की मेखला चादर और साड़ियां बनती हैं। अब तनया की पहचान एक सफल बिजनेस वुमन के तौर पर होने लगी है, और उनका सपना है कि वे गुवाहाटी में एक बुटीक खोलें, जहां उनके हाथ से बने प्रोडक्ट्स ग्राहकों के लिए सजे हों। तनया की यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर को एक नए मुकाम पर पहुंचाना चाहते हैं।

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