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दिल्ली के कनॉट प्लेस का ये इत्र स्टोर अपनी नेचुरल खुशबू के लिए है मशहूर

हम सभी को खुशबु पसंद होती है। बदबू से छुटकारा पाने के लिए हम इत्र या फिर परफ्यूम का इस्तेमाल करते है। नई दिल्ली में एक ऐसी ही इत्र और परफ्यूम की मशहूर दुकान है। नाम है, अरिहंत फ्रेगनेंस स्टोर (Arihant Fragrance Store), जिसे 1960 में खोला गया, यह स्टोर अपनी खुशबु से हर उस इंसान को अपनी ओर खींच लाता है, जो इत्र का शौकीन है। वर्तमान में इस स्टोर को चला रहे है महेंद्र जैन। महेंद्र बताते है कि “मेरा बचपन इत्र को देखने में बीता है इसलिए आज ये काम कर हा हूं, खुशबुओं से हमे बहुत प्यार है।”  

इत्र स्टोर
Arihant Fragrance – Connaught Place (CP), Rajiv Chowk (Photo: DNN24)

महेंद्र जैन ने DNN24 को बताया कि “हिंदुस्तान में मशहूर इत्र रहे जिनमे गुलाब, गुलाब की रूह, चंदन, चमेली, रात की रानी, हिना, मोतिया, केवड़ा शामिल है। आजकल बहुत ही अच्छी खुशबू का विकास किया जा रहा है। ऐसा ही एक इत्र है ‘मिट्टी’। इसका नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि बारिश के बाद जो सौंदी खुशबु आती है वैसी खुशबु इससे आती है जिसे लगाकर हम बहुत तरोताजा महसूस करते है।”

इत्र और परफ्यूम में अंतर 

इत्र प्राकृतिक वनस्पतियों से प्राप्त तेलों से बनाया जाता है। इसे सीधा शरीर या फिर कपड़ों पर लगा सकते है। इत्र की ख़ासियत यह होती है कि उसे लगाने से हमारी त्वचा पर किसी तरह की एलर्जी नहीं होती है और लंबे समय तक बना रहता है। इसमें मौजूद पदार्थ पसीने को सोखकर त्वचा को चिपचिपा होने से रोकते है। वहीं परफ्यूम की बात करें तो इसे तेल, एल्कोहॉल और पानी से बनाया जाता है। परफ्यूम में अधिक मात्रा में कॉन्संट्रेट रहता है। ऐसे में इसे सीधा त्वचा पर ना लगाकर कपड़ों पर लगाया जाता है। देखा जाता है कि इसकी खुशबु लम्बे समय तक नहीं रहती है। कहीं ना कहीं यही वजह है कि आज भी इत्र की डिमाण्ड कम नहीं हो पाई है।

मौसम के अनुसार इस्तेमाल होते है इत्र 

‘रूह ख़ुस’ इत्र वेटिवट नाम की घास से बनाया जाता है। यह घास ठंडी और तरोताजा होती है इसलिए इससे बने इत्र को गर्मियों में लगाया जाता है। इसे लगाने से हमे लू से बचाव होता है। पुराने ज़माने में इस घास को छतों पर इस्तेमाल किया जाता था जिससे ठंडक बनी रहे। इसी तरह मुश्कअंबर इत्र की तासीर गर्म होती है इसे सर्दियों में लगाया जाता है। पुराने ज़माने में लोग जब ठंड से बचने के लिए रजाईयां बनाया करते थे, तब रूई में इसे डाला जाता था, जिससे ठंडक से बच सके और खुशबु भी बरकरार रहे। 

महेंद्र बताते है कि “चंदन और गुलाब का इत्र 12 महानों खरीदा जाता है और मुश्कअंबर ज़ाफरान, केसर और हिना ये सर्दियों में इस्तेमाल होता है। समय के साथ साथ टेक्नोलॉजी में बदलाव आया है इसलिए इत्र में भी बदलाव आया है हमारे पास Spice Oil Fruits Seeds, वुडी, अगर (जिसे ऊद) इत्र भी है। हम पहले कच्चा माल इकट्ठा करते है और इत्र को अपना नाम देते है। जन्नते फिरदौस एक खुशबु है जो काफी मशहूर है इसका पदमावत फिल्म में भी जिक्र किया गया था। करीब हजार साल से पहले से ये मशहूर और मौजूद है।”

नई खुशबु बनाने के लिए किस चीज का ध्यान रखा जाता है 

महेंद्र ने बताया कि कोई नया इत्र बनाया जाता है तो हमे ध्यान रखना होता है कि हम उसकी क्वालिटी से समझौता ना करें। हमारे यहां Desert Dune है जिसकी स्वीट लेमन फ्रेश खुशबु है। इसे आजकल की यंग जनरेशन पसंद करती है। इसे लगाने का तरीका है कि इसे हाथों पर निकाल कर थोड़ा रगड़े इसके बाद थोड़ा कानों के पीछे गर्दन और कलाई पर लगाया जाता है। कुछ कस्टूमर एसे है जिन्हें एक ही खुशबू पसंद आती है और शरीर को वही अच्छी लगता है। बता दे कि इसकी बोतल को खूबसूरत बनाया जाता है इसके पीछे वजह होती है कि लोग बोतल को देखकर आकर्षित हो सके।

ऊद की लकड़ियों से बनाया जाता है इत्र

महेंद्र बताते है कि ऊद एक अरबी शब्द है यह एक तरह की लकड़ियां होती है जो करीब 20 हजार रूपये की 10 ग्राम होती है इसे जलाकर फिर इनसे तेल निकाला जाता है। भारत में यह पहले असम में उगाई जाती थी लेकिन अब कई मुल्कों में इसे बनाया जाता है वियतनाम, लाओस, कम्बोडिया, श्रीलंका में उगाया जाता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या समय के साथ इत्र की डिमाण्ड कम हो जाएगी? तो उनका जवाब था कि इसकी डिमाण्ड रहेगी क्योकि दुनिया में जो भी खुशबु बनेगी उससे पहले इत्र तैयार किया जाएगा उसके बाद ही दूसरी खुशबु बनेगी, परफ्यूम इंडस्ट्री का भविष्य बहुत अच्छा है।

इत्र स्टोर
“Ittar Store” Arihant Fragrance in Connaught Place, Delhi (Photo: DNN24)

ये भी पढ़ें: मोहम्मद आशिक और मर्लिन: एक अनोखी कहानी जिसने बदल दिया शिक्षा का परिपेक्ष्य

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