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Valley of Flowers: उत्तराखंड की वो जन्नत जहां रंग आंखों से बात करते हैं

कहां है ये फूलों की वादी? उत्तराखंड के चमोली जिले में, समुद्र तल से लगभग 3600 मीटर की बुलंदी पर, हिमालय की गोद में बसी है ये अजूबा वादी। यह Nanda Devi Biosphere Reserve का हिस्सा है और साल में सिर्फ जून से अक्टूबर तक ही खुलती है। बाकी महीनों ये बर्फ की चादर में लिपटी रहती है।

क्यों कहलाती है ‘Valley of Flowers’?

 जब मानसून आता है, तो पूरी वादी रंग-बिरंगे फूलों से भर जाती है। 500 से ज्यादा प्रजातियां यहां खिलती हैं। नीली पोस्ती, ऑर्किड, गेंदा, डेज़ी, हिमालयन बेलफ्लॉवर… ये सारे फूल मिलकर ऐसा नज़ारा बनाते हैं मानो किसी ने ज़मीन पर ख़ूबसूरत रंगों वाली कालीन बिछा दी हो। गुलाबी, पीला, बैंगनी, नीला, चारों तरफ रंगों की होली होती है।

Valley of Flowers (Image-Wikipedia)

इतिहास का क़िस्सा

1931 की बात है। British mountaineer Frank Smythe ने रास्ता भटकते हुए गलती से इस वादी में एंट्री की। जो देखा उस पर वो हैरान रह गया। इतने सारे फूल, इतनी रंगत! उसने इसके बारे में लिखा और दुनिया को इस जन्नत से रूबरू कराया।

यहां की ख़ासियतें

  • ये यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है (Announced in 2005)- यानी ये दुनिया की धरोहर है।
  • यहां के फूल हर 2-3 हफ़्ते में बदलते हैं। जून में जो खिला, जुलाई में वो गायब और नए आए। इसलिए हर महीने यहां का रूप बदलता रहता है।
  • ब्रह्म कमल, कोबरा लिली, हिमालयन मार्श मैरीगोल्ड-ऐसे दुर्लभ पौधे जो सिर्फ ऊंचाई पर ही पनपते हैं।
  • यहां 500 से ज्यादा फूल प्रजातियां हैं-जो भारत के किसी और हिस्से में इतनी संख्या में नहीं मिलतीं।

ट्रेकिंग का मज़ा

गोविंदघाट से इसकी ट्रेक शुरू होती है। रास्ते में ठंडी हवा, बहती नदियां, और पहाड़ों की सुकून भरी छांव। ट्रेक थोड़ा मुश्किल है, लेकिन जो मेहनत करता है, उसे यहां ऐसा नज़ारा मिलता है जो उसकी सारी थकान मिटा देता है।

Valley of Flowers (Image-Wikipedia)

आख़िर क्यों जाना चाहिए?

ये सिर्फ घूमने की जगह नहीं बल्कि ये कुदरत का वो करिश्मा है जहां फूल इंसान से बात करते हैं, रंग आंखों से बात करते हैं, और हवा दिल को सुकून देती है। ये वादी सिखाती है कि असली ख़ूबसूरती वहीं है जहां इंसान की पहुंच कम हो।

ये भी पढ़ें- चिड़िया टापू: प्रकृति का वो हसीन ख्वाब जहां परिंदे बयां करते हैं यहां के राज़

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