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कैंसर वार्ड से कैनवास तक: Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi का रंगों भरा सफ़र

Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi की ज़िंदगी दो अलग दुनियाओं का अनोखा मेल है। एक तरफ़ कैंसर के मरीज़ों की ख़िदमत का फ़र्ज़, दूसरी तरफ़ कैनवास पर रंगों की रवानी। जब वो सफ़ेद कोट पहनते हैं, तो जांबाज़ डॉक्टर बन जाते हैं, और जब ब्रश उठाते हैं, तो कश्मीर की फिज़ाओं को कैनवास पर उतार देते हैं। एक तरफ़ अस्पताल की भागदौड़ और लगातार तनाव भरी ज़िंदगी। दूसरी तरफ़ कश्मीर की वादियों में तन्हाई और तसल्ली भरे पल। ये डॉक्टर मक़दूमी का सुकून और उनकी ज़िंदगी का हसीन सफर है। उनकी पेंटिंग में रूह बसती है, हर स्ट्रोक में मोहब्बत झलकती है। Dr. Jehangir साबित करते हैं कि जुनून हो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

मेडिकल प्रोफे़शन से कला की ओर

श्रीनगर के फेमस कैंसर स्पेशलिस्ट Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi ने अपने हेक्टिक मेडिकल लाइफ से सुकून पाने के लिए जिस रास्ते को चुना, वो था आर्ट और कश्मीर की वादियां। स्कूल के दिनों से दिल में बसी फनी तस्वीरों की मोहब्बत ने आज उन्हें एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां ब्रश बोलता है और वादियां खुद ब खुद तस्वीर बन जाती हैं।

जहांगीर ने DNN24 को बताया कि उनका ये सफ़र स्कूल टाइम से शुरू हुआ, जब ड्रॉइंग क्लास में उन्होंने पेड़-पौधे और टेढ़े-मेढ़े इंसान बनाना शुरू किया। मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एनाटॉमी स्केच ने इस हुनर को और निखारा। ड्यूटी ख़त्म होने के बाद वो जब घर लौटते, तो पेंटिंग ही उनका सुकून बन जाती थी।

नेचर से मोहब्बत, पेंटिंग में इज़हार

Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi लैंडस्केप पेंटिंग बनाते हैं। उनकी पेंटिंग में कश्मीर की दरख्तों की हरियाली, नदियों की रवानी और आसमान की तनहाई झलकती है। बदलते मौसम उनके लिए इल्हाम का ज़रिया बनते हैं। हर पेंटिंग में न सिर्फ़ एक रंग बल्कि एक एहसास होता है। डॉ. जहांगीर कहते हैं, “मैं प्राकृतिक सुंदरता को बचाने और सहेजने के लिए ही लैंडस्केप बनाता हूं। मुझे शांति मिलती है जब मैं लैंडस्केप को कैनवास पर उतारता हूं।” उनकी पेंटिंग में कभी पतझड़ की उदासी, कभी बर्फबारी की ठंडक, तो कभी गर्मियों की रोशनी होती है।

रंगों के साथ एक प्रयोग

Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi ने रंगों के कई मीडियम के साथ एक्सपेरिमेंट किया उन्होंने ऑयल पेस्टल, वॉटर कलर, एक्रेलिक कलर का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें ऑयल कलर्स में सबसे ज़्यादा मज़ा आया, क्योंकि वो रंग न सिर्फ़ गहराई लाते हैं बल्कि लंबे समय तक टिके रहते हैं। वो कहते हैं कि “अगर मैं कलर को ट्रे में निकाल मिक्स करके रखता हूं, तो वो ख़राब नहीं होते और न ही सूखते हैं।”

लैंडस्केप पेंटिंग एक मेंटल एक्सरसाइज़

पेंटिंग Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi के लिए सिर्फ़ कला नहीं बल्कि एक मेंटल एक्सरसाइज़ है। “जब आप लैंडस्केप बनाते हैं तो सोचते हैं कि क्या दिखाना है, क्या नहीं। कौन सा रंग कितना इस्तेमाल करना है।” यही सोच उन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी के तनाव से दूर ले जाती है। डॉक्टर जहांगीर रूस के लैंडस्केप आर्टिस्ट Ivan Ivanovich Shishkin, डच कलाकार Vermeer और Rembrandt से इंस्पायर्ड हैं। वो कहते हैं, “अब मैं दिल से पेंटिंग करता हूं। अगर मैंने इसे बेच दिया तो ये बिज़नेस बन जाएगा, और मैं अपने लिए नहीं पैसे के लिए पेंट करूंगा फिलहाल ये मेरे लिए शांति देने वाली कला है।”

श्रीनगर की एग्ज़ीबिशन में पार्टिसिपेट

बीते कुछ सालों में उनकी पेंटिंग ने श्रीनगर में कई ग्रुप एग्ज़ीबिशन में जगह पाई। दूसरे आर्टिस्ट्स के साथ काम कर उन्होंने नई तकनीकें सीखी और नया नज़रिया पाया।
Dr. Jehangir Aslam Makhdoomi कहते हैं कि जब कोई उनकी पेंटिंग देखे, तो वह कुछ मिनट उसके सामने खड़ा रहे, उसे महसूस करे, देखे, सराहे। अगर उसने ऐसा किया, तो उन्हें लगता है कि उनका काम पूरा हो गया।

ये भी पढ़ें: Masrat Jan: Paper Mache की बारीकियों में छुपी कश्मीर की तहज़ीब

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