दो साल की एक मासूम बच्ची… जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं, दौड़ते हैं और अपने माता-पिता के साथ हंसते-खेलते हैं, उसी उम्र में त्रिपुरा की मनाश्री एक गंभीर बीमारी से लड़ रही है। उसे Spinal Muscular Atrophy यानी SMA Type-1 है।
इस बीमारी की वजह से मनाश्री के लिए सांस लेना, खाना और यहां तक कि पानी पीना भी मुश्किल है। वह खुद से करवट तक नहीं बदल पाती और रोज़मर्रा के कामों के लिए पूरी तरह अपनी मां पर निर्भर है। मनाश्री के इलाज के लिए 9 करोड़ रुपये से ज़्यादा की ज़रूरत है। एक सामान्य परिवार के लिए इतनी बड़ी रक़म जुटाना आसान नहीं है। लेकिन जब परिवार ने मदद की अपील की तो धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आगे आने लगे।
यही नहीं, इस मदद की कहानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद तक पहुंची, जहां लोगों ने बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक मदद के साथ उसके लिए दुआ भी की। यह कहानी सिर्फ़ एक बच्ची की बीमारी की नहीं है। यह उस उम्मीद की कहानी है, जो मुश्किल वक़्त में लोगों के साथ खड़े होने से पैदा होती है।
जब बेटी की हालत धीरे-धीरे बदलने लगी
मनाश्री के जन्म के बाद शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। उसकी मां नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप करवाती थीं और बच्ची को समय पर वैक्सीन भी लगती थी।
लेकिन करीब तीन-चार महीने की उम्र के बाद परिवार ने मनाश्री में बदलाव महसूस किया। उसके पैरों की हरकत धीरे-धीरे कम होने लगी। परिवार उसे डॉक्टर के पास ले गया। शुरुआत में डॉक्टरों ने इसे विटामिन या कैल्शियम की कमी माना। इलाज चलता रहा और परिवार को उम्मीद थी कि बच्ची जल्द ठीक हो जाएगी। लेकिन समय बीतता गया और उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। उल्टा उसकी शारीरिक गतिविधियां और कम होती गईं।
करीब 6 महीने की उम्र के बाद मनाश्री के कई टेस्ट कराए गए। परिवार बार-बार अस्पताल जाता और डॉक्टरों से सलाह लेता रहा। उसकी मां बताती हैं कि मनाश्री अपनी गर्दन को भी खुद संभाल नहीं पाती थी। अगर वह उसका सिर पकड़ना छोड़ दें तो उसकी गर्दन आगे की ओर झुक जाती थी।
इसके बाद परिवार ने दूसरे डॉक्टरों से भी सलाह ली। आखिरकार एक डॉक्टर ने बताया कि बच्ची को न्यूरोमस्कुलर बीमारी हो सकती है और उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल ले जाना ज़रूरी है।
SMA Type-1 की ख़बर ने परिवार को झकझोर दिया
जब मनाश्री को वरिष्ठ डॉक्टरों ने देखा तो उन्हें SMA Type-1 होने की आशंका जताई गई।
परिवार के लिए यह ख़बर बहुत बड़ा झटका थी। मनाश्री की मां बताती हैं कि उन्हें उस समय इस बीमारी के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन उनके पति डॉक्टरों की बात सुनकर समझ गए थे कि मामला गंभीर है।

इसके बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी परेशानी इलाज के खर्च की थी। मनाश्री के माता-पिता त्रिपुरा सरकार में कर्मचारी हैं और उनकी आय सीमित है। ऐसे में करोड़ों रुपये का इलाज उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती था।
डॉक्टरों ने इलाज के लिए करीब 9 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रक़म बताई। इतनी बड़ी रक़म सुनकर परिवार के लिए आगे का रास्ता समझना मुश्किल हो गया। मां के मुताबिक, उस समय वह अपनी बेटी को गोद में लिए खड़ी थीं। डॉक्टरों की बातें सुन रही थीं, लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाए।
मदद के लिए सबसे पहले अपने राज्य का रुख किया
परिवार ने ने त्रिपुरा में मदद की कोशिश शुरू की और राज्य के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। इसके बाद मनाश्री के इलाज के लिए क्राउडफंडिंग शुरू की गई। त्रिपुरा के लोगों के अलावा देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ मदद विदेशों से भी पहुंची।

धीरे-धीरे छोटी-छोटी रकम जुड़ती गईं और परिवार के मुताबिक करीब 6 करोड़ 25 लाख रुपये जमा हुए। इसके बाद इलाज के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू हुई और परिवार को दिल्ली AIIMS के लिए रेफर किया गया।
एक तरफ परिवार पैसे जुटाने में लगा था, तो दूसरी तरफ मनाश्री की देखभाल भी बड़ी ज़िम्मेदारी थी। उसे सांस लेने में दिक्कत होती है। खाना निगलना मुश्किल है और कई बार पानी या जूस पीने पर भी खांसी आने लगती है। उसकी मां को हर वक़्त बच्ची के साथ रहना पड़ता है।
सोशल मीडिया से मिली मदद की नई उम्मीद
इसी बीच मनाश्री की कहानी सोशल मीडिया क्रिएटर्स सनी और अजय तक पहुंची। सनी और अजय पहले भी ज़रूरतमंद लोगों के इलाज के लिए मदद जुटाने की कोशिश करते रहे हैं। मनाश्री की कहानी उनके सामने आई तो उन्होंने भी इस बच्ची के इलाज के लिए लोगों से मदद की अपील शुरू की।
परिवार को उम्मीद थी कि सोशल मीडिया के जरिए उनकी बात ज़्यादा लोगों तक पहुंचेगी और इलाज के लिए ज़रूरी रक़म जुटाने में मदद मिलेगी।
सनी और अजय ने लोगों से अपील की कि वे अपनी क्षमता के मुताबिक मनाश्री की मदद करें। लेकिन इस मुहिम का सबसे भावुक हिस्सा तब सामने आया, जब मदद की अपील दिल्ली की जामा मस्जिद तक पहुंची।
जामा मस्जिद में बच्ची के लिए उठे मदद के हाथ
सनी और अजय दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद पहुंचे। वहां उन्होंने मौलवी साहब से मनाश्री की बीमारी और उसके इलाज के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा से आई 2 साल की बच्ची गंभीर बीमारी से जूझ रही है और उसके इलाज के लिए करोड़ों रुपये की ज़रूरत है।
इसके बाद लोगों से बच्ची की मदद की अपील की गई। डोनेशन बॉक्स लेकर लोग खड़े हुए और वहां मौजूद लोगों ने अपनी क्षमता के मुताबिक योगदान दिया।
DNN24 से बात करते हुए कहा- करीब 10 से 15 हज़ार लोगों के बीच मनाश्री के लिए करीब 70 से 80 हज़ार रुपये की मदद जुटी। लेकिन उस दिन सिर्फ पैसे नहीं मिले। एक मां को यह भरोसा भी मिला कि उसकी बेटी के लिए ऐसे लोग भी खड़े हैं, जिन्हें वह जानती तक नहीं।
मदद के साथ मिली दुआ
मनाश्री की मां के लिए जामा मस्जिद का वह पल बेहद भावुक था। उनके मुताबिक, वहां लोगों ने बच्ची के लिए दुआ की। कई लोगों ने बच्ची के सिर पर हाथ रखा और उसके जल्द ठीक होने की कामना की।
एक मां के लिए यह एहसास बहुत मायने रखता है कि जब उसका बच्चा मुश्किल में हो तो अनजान लोग भी उसके साथ खड़े हों।
सनी ने भी जामा मस्जिद में मिले इस सहयोग को याद किया। उनके मुताबिक, अलग-अलग धर्मों के लोगों ने बच्ची की मदद के लिए जिस तरह हाथ बढ़ाया, वह उनके लिए खास अनुभव था।
लोगों की एकता से मिली मां को ताकत
मनाश्री की मां के लिए यह पूरा सफर आसान नहीं रहा। एक तरफ बेटी की बीमारी, दूसरी तरफ इलाज का भारी खर्च और तीसरी तरफ हर दिन उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी।
लेकिन जब उन्होंने देखा कि लोग उनकी बेटी के लिए एक साथ खड़े हो रहे हैं, तो उन्हें हिम्मत मिली। वह कहती हैं कि लोगों की एकता देखकर उनके मन में भरोसा आया कि उनकी बेटी ठीक हो सकती है। यही उम्मीद अब इस परिवार की सबसे बड़ी ताकत है।
अब भी जारी है मदद की अपील
मनाश्री के इलाज के लिए मदद की अपील अभी भी जारी है। सनी और अजय लोगों से कहते हैं कि अगर कोई आर्थिक मदद नहीं कर सकता तो कम से कम मनाश्री की कहानी को शेयर ज़रूर करे।
क्योंकि एक वीडियो का एक शेयर भी इस कहानी को उन लोगों तक पहुंचा सकता है, जो बच्ची के इलाज में मदद करने की स्थिति में हों।
मनाश्री की कहानी सिर्फ़ बीमारी और पैसों की कहानी नहीं है। यह एक मां की उम्मीद की कहानी है। यह एक परिवार की कोशिश की कहानी है। यह उन हज़ारों लोगों की कहानी है, जिन्होंने अपनी क्षमता के मुताबिक मदद करने की कोशिश की।
बीमारी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, किसी परिवार के लिए लोगों का साथ उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। मनाश्री की कहानी भी इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ रही है।
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