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बिहार का लड़का जो अपने स्टार्टअप Digital Labour Chowk के ज़रीये दे रहा मज़दूरों को Dignity

‘आज एक मजदूर सिर्फ एक क्लिक में पूरे भारत की नौकरियों से जुड़ सकता है!’

ये लाइन सुनकर अगर आपको लगता है कि ये कोई ख़्वाब है, तो चंद्रशेखर मंडल की कहानी आपको हैरान कर देगी। एक ऐसा युवा जिसने बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के करोड़ों मजदूरों की जिंदगी बदलने का बीड़ा उठाया। उनका स्टार्टअप ‘डिजिटल लेबर चौक’ (Digital Labour Chowk) आज उन मजदूरों के लिए रोशनी की किरण बनकर उभरा है जो रोजगार की तलाश में शहरों के चौराहों पर खड़े रहते हैं।

कोविड की त्रासदी ने बदल दी जिंदगी

24 जनवरी 2020 की सुबह, दिल्ली की एक बालकनी से चंद्रशेखर नीचे खड़े मजदूरों को देख रहे थे। हल्की बारिश हो रही थी, उनके हाथ में कॉफी का कप था, और नीचे सैकड़ों मजदूर बारिश से बचने के लिए छुपने की कोशिश कर रहे थे। ये वही पल था जिसने उनकी जिंदगी का मकसद बदल दिया।

‘मैं बारिश का आनंद ले रहा था, और वो मजदूर इस बारिश में अपने दिन की रोटी के लिए तरस रहे थे,’ चंद्रशेखर याद करते हैं।

कोविड लॉकडाउन ने इस समस्या को और बढ़ा दिया। लाखों मजदूर बिना काम के फंस गए। उस वक्त चंद्रशेखर ने सोचा- ‘क्यों न एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाए जहां मजदूर घर बैठे ही नौकरी ढूंढ सकें?’

कैसे काम करता है डिजिटल लेबर चौक?

डिजिटल लेबर चौक एक ऐसा ऐप है जहां:

  1. मजदूर अपना प्रोफाइल बनाकर नौकरी ढूंढ सकते हैं।
  2. ठेकेदार और कंपनियां सीधे मजदूरों से जुड़ सकती हैं।
  3. रियल-टाइम जॉब अपडेट्स पूरे भारत से मिलते हैं।

‘आज अगर दिल्ली में कंस्ट्रक्शन बंद है, तो मजदूर ऐप पर देख सकता है कि पंजाब या हरियाणा में कहां काम चल रहा है’,  चंद्रशेखर बताते हैं।

हम मजदूरों को उनकी पहचान दिला रहे

भारत में 90 फीसदी मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। उनके पास न तो स्थायी नौकरी होती है, न ही सरकारी योजनाओं का लाभ। डिजिटल लेबर चौक उन्हें ये सब दे रहा है:

  लेबर कार्ड बनवाने में मदद – जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
  स्किल ट्रेनिंग – जिससे वे ज्यादा पैसे कमा सकें।
  फाइनेंशियल सिक्योरिटी – बैंक लोन और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं।

‘एक मजदूर जो पहले 300 रूपये रोज कमाता था, आज इस प्लेटफॉर्म से 800-1000 रूपये कमा रहा है, चंद्रशेखर गर्व से कहते हैं।

बेटियों की शिक्षा से जुड़ा बड़ा सपना

चंद्रशेखर का मानना है कि मजदूरों की आय बढ़ने से उनके बच्चों की शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

‘आज भी कई लोग बेटियों को पढ़ाने के बजाय शादी के लिए पैसे जोड़ते हैं। अगर वही पैसा शिक्षा में लगे, तो बेटी 2-3 साल में ही 20-30 रूपये लाख कमा सकती है,’ वे जोर देकर कहते हैं।

हम LinkedIn For Blue-Collar Workers बना रहे हैं 

चंद्रशेखर का सपना है कि डिजिटल लेबर चौक भारत का सबसे बड़ा ब्लू-कॉलर वर्कर प्लेटफॉर्म बने। जहाँ:

  1. हर मजदूर की एक डिजिटल प्रोफाइल हो।
  2. उसके काम का रिकॉर्ड और फीडबैक हो।
  3. वो देश के किसी भी कोने में नौकरी पा सके।

क्या है फ्यूचर का प्लान?

  1. 2025 तक 1 करोड़ मजदूरों तक पहुंचना।
  2. हर गांव तक डिजिटल लेबर चौक की पहुंच।
  3. महिला मजदूरों के लिए ख़ास ट्रेनिंग प्रोग्राम।

एक क्रांति की शुरुआत

चंद्रशेखर और उनकी टीम ने साबित कर दिया है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ अमीरों के लिए नहीं है। अगर एक मजदूर के पास स्मार्टफोन है, तो वह भी अपनी किस्मत बदल सकता है।

‘हमारा मिशन सिर्फ नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि मजदूरों को उनका सम्मान दिलाना है,’ चंद्रशेखर कहते हैं।

अगर आप भी किसी मजदूर की मदद करना चाहते हैं, तो Digital Labor Chowk App डाउनलोड करें या 9654007500 पर कॉल करें।

पूरा पॉडकास्ट को देखने के लिए क्लिक करें Ex-Corporate to Changemaker: Bihar Man’s Start-Up Uplifts Wage Workers | Digital Labour Chowk  

ये भी पढ़ें: मशहूर इतिहासकार प्रोफ़ेसर इरफ़ान हबीब के साथ एक यादगार मुलाक़ात

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