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टेराकोटा ज्वेलरी से पहचान बनाती रश्मि वर्मा: गोरखपुर की महिलाओं के लिए रोज़गार का नया रास्ता 

आर्टिफिशियल ज्वेलरी के बाद अब टेराकोटा ज्वेलरी भी लोगों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। मिट्टी से बनी खूबसूरत ज्वेलरी सोने जैसी चमक और अनोखे डिज़ाइन के कारण लोगों को खूब भा रही है। टेराकोटा ज्वेलरी का व्यवसाय उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रश्मि वर्मा ने शुरू किया और उनके साथ आज 150 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो इससे अच्छा ख़ासा रोज़गार कमा रही हैं।

कैसे मिली टेराकोटा ज्वेलरी बनाने की प्रेरणा?

गोरखपुर में टेराकोटा ज्वेलरी को “वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट” (ओडीओपी) के तहत विशेष पहचान दी गई है। रश्मि वर्मा हमेशा कुछ बड़ा करना चाहती थी। एक दिन उन्हें मिट्टी से ज्वेलरी बनाने का विचार आया और इस शौक को बिज़नेस में बदलने का फैसला लिया। 2014 में उन्होंने अपने इस छोटे से व्यवसाय की शुरुआत की और देखते ही देखते उनका यह काम बढ़ता चला गया। आज रश्मि के साथ 150 से ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं, जिन्हें वे रोज़गार दे रही हैं। रश्मि पहले एक आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर थीं और अपनी कला को लोगों के सामने लाने का सपना उनके मन में था, इसलिए उन्होंने टेराकोटा ज्वेलरी बनाने की ओर कदम बढ़ाया।

ज्वेलरी बनाने की प्रक्रिया: मिट्टी से सजावट तक

रश्मि वर्मा अपनी टेराकोटा ज्वेलरी बनाने के लिए तालाब से मिट्टी लाती हैं। इसके बाद इसे अच्छी तरह से छाना जाता है। फिर मिट्टी को 15 दिनों तक पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि यह ज्वेलरी बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हो सके। उसके बाद इसे फिर से छानकर मुलायम बनाया जाता है और गूंध कर गाढ़ा आटा तैयार किया जाता है। फिर इस आटे से अलग-अलग डिज़ाइन की ज्वेलरी बनाई जाती है।

बनाई गई ज्वेलरी को विशेष सांचे में डालकर आग में पकाया जाता है ताकि वह ठोस और टिकाऊ हो सके। इसके बाद ज्वेलरी में पॉलिशिंग और सजावट का काम होता है। एक ज्वेलरी का पूरा सेट तैयार करने में करीब एक हफ्ते का समय लगता है। रश्मि कहती हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी यह ज्वेलरी लोगों को इतनी पसंद आएगी। आज वे बड़े-बड़े फेयर में स्टॉल लगाती हैं और उन्हें ऑनलाइन ऑर्डर्स भी मिलते हैं।

रश्मि वर्मा का संघर्ष और सफलता की कहानी

रश्मि ने DNN24 को बताया कि वे पांच भाई-बहन हैं और उनकी मां को उन पर बहुत गर्व है। शुरूआती चार-पांच सालों में रश्मि अपनी ज्वेलरी को क्षेत्रीय बाज़ारों में बेचा करती थीं। मेहनत और लगन से उन्होंने अपने प्रोडक्ट की पहचान बना ली और आज वे पूरे भारत में अपनी ज्वेलरी की सप्लाई करती हैं। रश्मि का प्रोडक्ट कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे अमेजॉन पर भी उपलब्ध है, और वे सोशल मीडिया के ज़रिए भी अपने प्रोडक्ट का प्रचार करती हैं।

विदेशों तक पहुंचाने का सपना

रश्मि की बनाई गई टेराकोटा ज्वेलरी किफ़ायती और अनोखी है। उनके ear rings 100 से 500 रुपये में और नेकलेस 300 से 2000 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं। रश्मि का सपना है कि उनका काम और भी आगे बढ़े और वे विदेशों में भी अपनी कला को एक नई पहचान दिला सकें। साथ ही वे चाहती हैं कि जो महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकतीं, उन तक भी रोज़गार पहुंचाया जा सके।

रश्मि वर्मा की यह कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने हुनर से अपनी पहचान बनाना चाहती है। टेराकोटा ज्वेलरी के इस बढ़ते क्रेज के साथ रश्मि और उनकी टीम एक नए मुकाम की ओर बढ़ रही हैं, जहां कला के साथ रोज़गार का सुनहरा संगम हो रहा है।

ये भी पढ़ें: जयपुर की वीणा, मीणा जनजाति की कला को दे रहीं नई पहचान

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