Monday, May 11, 2026
32.1 C
Delhi

काली मिट्टी के बर्तनों का 80% हिस्सा विदेशों में भी एक्सपोर्ट

आज़मगढ़ मुख्य शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर निज़ामाबाद के ये काली मिट्टी के बने नक्काशीदार बर्तन (Black Pottery) न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में निज़ामाबाद को पहचान दिला रहे हैं। निज़ामाबाद में करीब 200 से अधिक परिवार के कारीगर मिट्टी को आकार देकर अपनी आजिवीका चला रहें हैं। इन्ही कारीगरों में से एक हैं सुरेंद्र प्रजापति।

About 15 kilometers away from the main city of Azamgarh, Nizamabad, these carved utensils made of black clay are giving recognition to Nizamabad not only in India but in the whole world. In Nizamabad, artisans of more than 200 families are running their livelihood by shaping clay. Surendra Prajapati is one of these artisans.

ये भी पढ़ें: विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण: भारत गणराज्य के साथ डॉ. मोहम्मद अब्दुलकरीम अल-इस्सा का दिलचस्प भ्रमण

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

अब्दुल बारी आसी: दर्द को अल्फ़ाज़ और मोहब्बत को आवाज़ देने वाले शायर

“अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को,मैं...

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Topics

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Related Articles

Popular Categories