Friday, March 6, 2026
23.6 C
Delhi

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया: मच्छर जनित बीमारियों के जोखिम का बढ़ता हुआ सामना”

हर साल जुलाई-अक्तूबर महीनों में देशभर मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। डेंगू, मलेरिया, और चिकनगुनिया (Dengue, Malaria and Chikungunya) के कारण हजारों लोग संक्रमित होते हैं, जिससे कुछ लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं। हालिया रिपोर्ट्स ने फिर से इस खतरे को उजागर किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल में टाइप-2 डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां चार-पांच दिनों में 300 से अधिक लोगों की संक्रमण पुष्टि हुई है, और 5 से अधिक लोगों की मौत हुई है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, राज्य में 138 डेंगू हॉटस्पॉट्स की पहचान की गई है। स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. के. जे. रीना ने बताया कि केरल में टाइप-1, 2 और 4 डेंगू वायरस की पहचान हुई है। सबसे ज्यादा मामले टाइप-2 वायरस के सामने आ रहैं। यह गंभीर रोगों का कारण भी हो सकता है, इसलिए सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

डेंगू, मलेरिया, और चिकनगुनिया से बचाव के लिए उचित ह्याजीन बनाए रखना, मच्छर तथा उनके बिलों को नष्ट करने के लिए साफ पानी जमा न होने देना, और अवैध सड़की थैलियों में पानी जमा न होने देना आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, मच्छर बाइट से बचने के लिए ज्यादा बार चुस्त रंग के कपड़े पहनना और सुरक्षा के लिए मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का उपयोग करना भी जरूरी है। इन सावधानियों का पालन करके हम सभी इन खतरात्मक बीमारियों से बच सकते हैं और अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं।

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए अमर उजाला पर जाएं।

ये भी पढ़ें: पिता के वादे को बेटों ने रखा बरकरार, मंदिर के लिए दान की लाखों की ज़मीन

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

कैफ़ अहमद सिद्दीकी: मास्टर साहब बच्चों के दिल के शायर और समाज का आईना

कभी-कभी बड़े शहरों की चकाचौंध से दूर, छोटे कस्बों...

ज़ायके का सफ़रनामा: दम पुख़्त से दिल की बात, पुरानी रसोई का नया ज़माना

दम पुख़्त: इंडियन फूड लवर्स अब सिर्फ विदेशी व्यंजनों (Exotic recipes) का स्वाद नहीं लेना चाहते, बल्कि अपनी पुरानी रसोई की ओर लौटने लगे हैं। 'रूट्स की तरफ वापसी' (Return to the roots) का ये ट्रेंड न सिर्फ खाने के स्वाद को बदल रहा है, बल्कि हमारी सेहत को भी नया आयाम दे रहा है।

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

Topics

कैफ़ अहमद सिद्दीकी: मास्टर साहब बच्चों के दिल के शायर और समाज का आईना

कभी-कभी बड़े शहरों की चकाचौंध से दूर, छोटे कस्बों...

ज़ायके का सफ़रनामा: दम पुख़्त से दिल की बात, पुरानी रसोई का नया ज़माना

दम पुख़्त: इंडियन फूड लवर्स अब सिर्फ विदेशी व्यंजनों (Exotic recipes) का स्वाद नहीं लेना चाहते, बल्कि अपनी पुरानी रसोई की ओर लौटने लगे हैं। 'रूट्स की तरफ वापसी' (Return to the roots) का ये ट्रेंड न सिर्फ खाने के स्वाद को बदल रहा है, बल्कि हमारी सेहत को भी नया आयाम दे रहा है।

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Related Articles

Popular Categories