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अमरोहा में बने ढोलक की आवाज़ क्यों है इतनी खास?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 300 किलोमीटर दूर अमरोहा जिला हैं। पूरे विश्व मे उत्तर प्रदेश का ये छोटा सा शहर अमरोहा लकड़ी से बने वाद्य यंत्र (ढोलक) की वज़ह से प्रसिद्ध है। गौरतलब है कि अमरोहा में बनने वाले ढोलक की मांग न केवल पड़ोसी जिलों में रहती है बल्कि पूरे देश में इसकी बहुत लोकप्रियता हैं। विदेशों में भी ढोलक ने लोगों का मन मोह लिया है. भारतीय घरों में कोई भी उत्सव, तीज त्योहार ढोलक की थाप के बिना अधूरा है।

अमरोहा में ढोलक का कारोबार कई सदियों पुराना है। इसकी शुरुआत लगभग 150 साल पहले हुई थी। अमरोहा में मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग ढोलक के व्यापार में लगा हुआ है। अमरोहा में 500 से अधिक बड़ी और छोटी कारखाने हैं जो 2,000 से अधिक कुशल व हुनरमंद कारीगरों को रोजगार देती हैं।

पुराने समय में ढोलक को हाथ से बनाया जाता था। उसके 50 साल बाद मशीनों के आगमान से कारखानों की संख्या बढ़ गई और लोग इस कारोबार में अपना हाथ आजमाने लगे। इसके बाद से दिन प्रतिदिन यह कारोबार बढ़ता गया और अमरोहा की पहचान बन गया। अमरोहा में ढोलक समेत करीब 25 तरह की वाद्य यंत्र बनाए जाते हैं जिनका एक्सपोर्ट देश-विदेश मे होता है।

इन यंत्रों के खोखले ब्लाक्स के निर्माण के लिए आम व शीशम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें बाद में जानवरों के चमड़े से मढ़ा जाता है। इनमें से अधिकतर पर बकरी की चमड़ी का प्रयोग होता है। अमरोहा के द्वितीय स्तरीय उद्योगों में कालीन निर्माण, लकड़ी पर नक्काशी व ढोलक निर्माण शामिल हैं।

कैसे बनाई जाती है ढोलक?

ढोलक को बनाने के लिए आम, शीशम, सागौन, नीम व पोपलर की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता हैं। एक ढोलक के निर्माण में करीबन 5 से 6 दिन का समय लगता है। इसकी शुरूआत लकड़ी की कटाई से होती है। इसके बाद मशीन में डालकर उसकी छिलाई होती है जिससे उसकी सतह को समतल किया जा सके। इसके बाद उसकी सफाई होती है और फिर अंदर के गुल्ले को निकाला जाता है। तत्पश्चात रंगाई व मढ़ाई का काम होता है। ढोलक के ढांचे के दोनों खोखले सिरों पर बकरे की खाल रस्सी से कसी जाती है।

यह सारा काम होने के बाद ढोलक पर रंगाई-पुताई की जाती हैं। सुर-ताल मिल कर इसका काम पूरा होता हैं। इस कार्यक्रम में 10 से 12 मजदूर व कारीगर लगते हैं। हालांकि, अब समय के साथ धीरे-धीरे ढोलक का स्वरूप बदल रहा हैं। अब रस्सियों के स्थान पर नट-बोल्ट लगी ढोलक को बाजारों मे ज़्यादा देखा जा सकता हैं।

अमरोहा के ढोलक व्यापार को एक जनपद-एक उत्पाद योजना (One District One Product Scheme) में शामिल किया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने कुशल कारीगरों और व्यापार को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया। ओडीओपी की शुरुआत प्रदेश सहित जिले में 2018 में हुई थी। अमरोहा के ओडीओपी में शामिल होने के बाद ढोलक कारोबार को रफ्तार मिली है। इससे ढोलक कारोबार 4 गुना बढ़ा हैं।

अमरोहा के ढोलक व्यापारी राजीव कुमार प्रजापति बताते हैं, “एक जिला एक उत्पाद योजना के आने से व्यापारियों को कई फायदे हुए है। इस योजना के तहत 25 फीसदी सब्सिडी के साथ लोन का प्रावधान है, जिसका फायदा मुझे भी मिला है।

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