Thursday, September 24, 2026
34.1 C
Delhi

“कोई दबाव नहीं, बस गर्व और मन में वाहेगुरु”– Commonwealth रजत पदक विजेता Harjinder Kaur की Asian Games में पहली पारी

International Weightlifting की दुनिया में पंजाब की Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) की कहानी ख़ास है। 69 किलो वेट कैटेगरी में खेलने वाली Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) ने इस साल जुलाई में Glasgow में हुए Commonwealth Games में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता और देशभर में अपनी पहचान बनाई। अब हरजिंदर अपने पहले Asian Games में उतरने की तैयारी कर रही हैं। बड़ी कामयाबी के बावजूद वो आज भी ज़मीन से जुड़ी हुई हैं और पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान दे रही हैं।

भारत की तरफ़ से Asian Games में हिस्सा लेने वाली सिर्फ़ चार महिला वेटलिफ्टर्स में हरजिंदर का भी सेलेक्शन हुआ है। उनके लिए ये सिर्फ़ देश को रिप्रेज़ेंट करने का मौक़ा नहीं, बल्कि अपने पंजाब का नाम रोशन करने की भी बड़ी ज़िम्मेदारी है। Sadda Punjab से ख़ास बातचीत में Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) ने अपनी हालिया कामयाबी, सीनियर खिलाड़ियों से मिली सीख, Asian Games के लिए अपनी तैयारी और उस भरोसे के बारे में बात की, जो उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है।

एक महीने में बड़ी तैयारी: Commonwealth Games से Asian Games तक

28 जुलाई 2026 को Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) ने Glasgow Commonwealth Games में 69 किलो कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने टोटल 227 किलो वज़न उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके बाद उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात हुई और कई कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद हरजिंदर National Institute of Sports, Patiala में वापस ट्रेनिंग के लिए लौट आई।

अब उनके पास 11 सितंबर को होने वाले आख़िरी Qualification Trials से पहले तैयारी के लिए सिर्फ़ एक महीने का वक़्त था। Weightlifting जैसे मुश्किल खेल में शरीर को दोबारा पूरी तरह तैयार होने में वक़्त लगता है। ऐसे में Commonwealth Games और Asian Games के बीच सिर्फ़ एक महीने का गैप Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) के लिए आसान नहीं था।

Pic Credit: ABP News

हरजिंदर ने बताया कि, “जब दो बड़े मुकाबलों के बीच इतना कम वक़्त होता है, तो शरीर को दोबारा तैयार करने के लिए वक़्त चाहिए होता है। Commonwealth Games के बाद सिर्फ़ एक महीने में recovery करना काफी मुश्किल था। लेकिन मेरी ट्रेनिंग अच्छी चल रही है। अगर मैं Asian Games में Commonwealth Games जितना या उससे ज़्यादा टोटल लिफ्ट कर पाती हूं, तो मेरे लिए यही बहुत बड़ी खुशी होगी।”

Qualification Trials पास करने के बाद हरजिंदर का हौसला और बढ़ गया। अब वो जापान रवाना होने से पहले Asian Games की चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हरजिंदर कहती हैं, “Commonwealth Games के बाद Asian Games मेरा दूसरा बड़ा मुकाबला है और ये मेरा पहला Asian Games भी है। ये मौका पाकर मैं बहुत खुश हूं। मेरी तैयारी पूरी है और मैं स्टेज पर अपना पूरा 100 प्रतिशत देने वाली हूं।”

बिना दबाव के खेलने का जज़्बा: Commonwealth Games से मिली सीख

कई खिलाड़ियों के लिए अपने पहले Asian Games में खेलना दबाव भरा हो सकता है। लेकिन Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) ने Commonwealth Games में अपने Silver Medal के सफ़र के दौरान एक अहम बात सीखी, जो अब उन्हें Asian Games में भी मदद कर रही है। हरजिंदर याद करते हुए कहती हैं, “Commonwealth Games से पहले मेरी सोच बहुत पॉज़िटिव थी और मुझे खुद पर पूरा भरोसा था।

मैंने तय किया था कि मुकाबले को लेकर ज़्यादा नहीं सोचूंगी। Competition वाले दिन मैंने पूरे भरोसे के साथ अपना 100 प्रतिशत दिया।” वो आगे कहती हैं, “उस मुकाबले से मैंने सबसे बड़ी सीख यही ली कि खुद पर बहुत ज़्यादा मानसिक दबाव नहीं लेना चाहिए। जब हम ज़रूरत से ज़्यादा Pressure लेते हैं, तो उसका सीधा असर हमारी Performance पर पड़ता है।”

Pic Credit: The Bridge

अब Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) इसी सोच के साथ Asian Games में उतरना चाहती है। उनका ध्यान न तो मेडल की पोज़िशन पर है, न दूसरी खिलाड़ियों के स्कोर पर और न ही किसी ख़ास लिफ़्ट के टारगेट पर। वो सिर्फ़ अपनी Performance और अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहती हैं। Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) कहती हैं, “मैं Asian Games में भी इसी सोच के साथ उतरने की कोशिश कर रही हूं। मेडल जीतना बाद की बात है। मेरी पहली कोशिश यही है कि मैं स्टेज पर अपना Best Performance दूं। मैंने इस मौके के लिए मेहनत की है, इसलिए मैं अपने पहले Asian Games के इस अनुभव को पूरी तरह एंजॉय करना चाहती हूं।”

मीराबाई चानू से प्रेरणा और पंजाब का नाम रोशन करने का जज़्बा

Asian Games के सफ़र में Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) को भारतीय टीम के माहौल से भी काफी हौसला मिल रहा है। ख़ास तौर पर Olympic Medalist और उनकी Senior Teammate Mirabai Chanu से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। हरजिंदर पूरे सम्मान के साथ कहती हैं, “Mirabai Chanu हमारी Senior हैं और उनकी मौजूदगी से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उनकी मेहनत और लगन हमें बहुत मोटिवेशन देती है।

इतने बड़े स्टेज पर उनके साथ खेलने का मौका मिलना मेरे लिए ख़ास है। ये मेरा पहला Asian Games है, इसलिए मेरे अंदर बहुत जोश और उत्साह है। मैं अपना बेस्ट देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।” पूरे देश की महिला वेटलिफ्टर्स में से सिर्फ़ चार खिलाड़ियों का Asian Games के लिए सेलेक्शन हुआ है। इन चार खिलाड़ियों में अपना नाम देखकर हरजिंदर को बहुत गर्व महसूस होता है।

वो कहती हैं, “Asian Games में Weightlifting के लिए भारत की चार महिला Lifters जा रही हैं। मुझे बहुत गर्व है कि मैं उन चार खिलाड़ियों में शामिल हूं, जिन्हें ये मौका मिला है। अब जब मैंने Qualification हासिल कर ली है, तो मेरा पूरा ध्यान एक शानदार Performance देने पर है, ताकि भारत का नाम और तिरंगा ऊंचा हो और मेरे अपने पंजाब को भी मुझ पर गर्व हो।”

Pic Credit: Social Media

सख़्त अनुशासन, मां की पंजीरी और माता-पिता का भरोसा

अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के पीछे सिर्फ़ मेहनत नहीं, बल्कि सख़्त अनुशासन भी होता है। 69 किलो भार वर्ग में खेलने वाली Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) को मुकाबले से पहले अपने शरीर के वजन का ख़ास ध्यान रखना पड़ता है। इसी वजह से प्रशिक्षण के दौरान वो घर का बना पसंदीदा खाना भी अपने साथ नहीं ले जा सकती। हरजिंदर कहती हैं, “मुकाबले से पहले वजन को काबू में रखना बहुत ज़रूरी होता है, इसलिए मैं अपने साथ घर का खाना नहीं ले जा सकती। लेकिन मेरी मां ने कहा है कि मुकाबले के बाद जब मैं घर लौटूंगी, तो वो मेरी सारी पसंदीदा चीजें बनाएंगी। सर्दियां आने वाली हैं, इसलिए पंजीरी और पिन्नी ज़रूर बनाएंगी।”

खाने के अलावा Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) को सबसे ज़्यादा हौसला अपने माता-पिता के प्यार और उनके भरोसे से मिलता है। वो मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं अपने परिवार से फोन पर लगातार बात करती हूं। मेरी मां हमेशा कहती हैं कि प्रैक्टिस करने या मुकाबले के लिए जाने से पहले वाहेगुरु का नाम ज़रूर लेना। मेरे माता-पिता हमेशा कहते हैं कि मेहनत करना हमारे हाथ में है, लेकिन नतीजा भगवान के हाथ में है।”

Pic Credit: TOI

उनके माता-पिता उन्हें जीत या हार को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं देते। हरजिंदर कहती हैं, “मेरे माता-पिता मुझे बहुत हौसला देते हैं। वो कहते हैं कि हिम्मत करो और पूरे दिल से खेलो। जीत या हार को लेकर वो कभी दबाव नहीं डालते। उनका कहना है कि बस जाकर अच्छा खेलो, जीत और हार तो ज़िंदगी का हिस्सा हैं। उनका ये भरोसा और बिना किसी दबाव के दिया गया हौसला मुझे हर दिन आगे बढ़ने की ताकत देते है।”

एशियाई खेलों के लिए जापान रवाना होने से पहले हरजिंदर अपने माता-पिता से मिल नहीं पाई। लेकिन घर से पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान की करीब 45 मिनट की दूरी और माता-पिता से लगातार होने वाली फोन पर बातचीत ने उन्हें परिवार के करीब बनाए रखा। अब नाभा के मेहस गांव की ये बेटी जापान में मिले इस बड़े मौके को यादगार बनाना चाहती है। परिवार की दुआओं, वरिष्ठ खिलाड़ियों की सीख और होंठों पर वाहेगुरु का नाम लेकर Harjinder Kaur (हरजिंदर कौर) एशियाई खेलों के मंच पर उतरने के लिए तैयार हैं। महिला 69 किलो भार वर्ग की भारोत्तोलन प्रतियोगिता 27 सितंबर से जापान के नागोया में शुरू होगी।

लेख: गौरव एस. करीर

इस लेख को अंग्रेज़ी और पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें: “अगर सौ जन्म मिलें, तो हर बार एयरफोर्स चुनूंगा”: AVM Hilal Ahmed Rather (Retd)  

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हकीम अहमद शुजा: वो शायर जिसकी नज़्में बनीं नग़मों की आवाज़

हकीम अहमद शुजा उर्दू अदब के उन चंद शख़्सियतों...

नुसरत फ़तह अली ख़ान: क़व्वाली के शहंशाह की दास्तान

नुसरत फ़तह अली ख़ान का नाम आते ही ज़ेहन...

अब्दुर्रहमान बिजनोरी: जिनकी कलम ने ग़ालिब के कलाम को नई रोशनी दी  

डॉक्टर अब्दुर्रहमान बिजनोरी हमारी इल्मी और अदबी तारीख़ का...

Major General Rajinder Singh ‘Sparrow’: भारतीय टैंक जंग के बहादुर जनरल

भारतीय फ़ौज के इतिहास में कुछ ऐसे जांबाज़ जनरलों...

Topics

हकीम अहमद शुजा: वो शायर जिसकी नज़्में बनीं नग़मों की आवाज़

हकीम अहमद शुजा उर्दू अदब के उन चंद शख़्सियतों...

नुसरत फ़तह अली ख़ान: क़व्वाली के शहंशाह की दास्तान

नुसरत फ़तह अली ख़ान का नाम आते ही ज़ेहन...

अब्दुर्रहमान बिजनोरी: जिनकी कलम ने ग़ालिब के कलाम को नई रोशनी दी  

डॉक्टर अब्दुर्रहमान बिजनोरी हमारी इल्मी और अदबी तारीख़ का...

Major General Rajinder Singh ‘Sparrow’: भारतीय टैंक जंग के बहादुर जनरल

भारतीय फ़ौज के इतिहास में कुछ ऐसे जांबाज़ जनरलों...

लिफ़्टिनेंट Sampuran Singh, MVC और VrC: बेदोरी के अमर नायक

भारतीय फ़ौज के गौरवशाली इतिहास में ऐसे कई जांबाज़...

आसी ग़ाज़ीपुरी: तसव्वुफ़ और इश्क़-ए-हक़ीक़ी के शायर

उर्दू शायरी की तारीख़ में जब भी सूफ़ियाना रंग...

Related Articles

Popular Categories