अंडमान के दक्षिणी छोर पर बसा ये जन्नतनुमा मकाम,जहां फिजाएं गुनगुनाती हैं और समंदर की लहरें मोहब्बत का पैगाम सुनाती हैं। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की शान, श्री विजय पुरम (Port Blair) से लगभग 28 किलोमीटर दूर, जहां सड़कें खत्म होती हैं, वहीं से शुरू होती है एक अलग ही दुनिया.. चिड़िया टापू। नाम ही काफी है इसके हुस्न का अंदाजा लगाने के लिए, मगर यकीन मानिए, ये जगह उससे कहीं ज्यादा है। यहां की हवाओं में इतिहास की महक है, मैंग्रोव के पेड़ों में सदियों पुरानी दास्तानें दफन हैं, और आसमान में उड़ते परिंदे मानो कोई राज़ बताने आए हों।

जनजातियों की धरती, परिंदों का आशियाना
इतिहास के पन्ने बताते हैं कि कभी ये ज़मीन जरावा जनजाति के लिए पवित्र स्थान हुआ करती थी। वहां की आदिवासी रूहें आज भी इन जंगलों में महसूस होती हैं। आज यही जगह 45 से ज्यादा प्रजातियों के परिंदों का घर है। अंडमानी कठफोड़वा, अंडमानी द्रोंगो, अंडमानी बुलबुल और अंडमानी ट्रीपाई (Andaman Woodpecker, Andaman Drongo, Andaman Bulbul, and Andaman Treepie)। ये नाम कम और इनका रंग-रूप ज्यादा है। यहां का हर पेड़, हर पत्ता, हर फिजा गवाह है उस अनोखी बायो डायवर्सिटी की, जिसे देखने दिल करता है कि बस यूं ही खड़े रहें और ये नज़ारा पीते रहें।
क्या ख़ूबसूरत है वो गुज़रती शाम
जब सूरज ढलने लगता है तो चिड़िया टापू का रूप बदल जाता है। आसमान पहले नारंगी, फिर लाल, फिर गहरी बैंगनी रंगत में ढल जाता है। ये वो पल है जब फोटोग्राफर भी अपना कैमरा रख देते हैं और बस आंखों में ये नज़ारा कैद करते हैं। गोल्डन बीच पर खड़े होकर जब आप ये मंज़र देखते हैं तो ऐसा लगता है जैसे पूरी कायनात आपके लिए ये शानदार मंज़र तैयार कर रही हो। यही वजह है कि श्री विजय पुरम की शामें पूरी दुनिया में मशहूर हैं और चिड़िया टापू उस मशहूरी का सबसे बड़ा हिस्सा है।

कुछ क़रीब से देखते हैं
चिड़िया टापू बायोलॉजिकल पार्क (Chidiya Tapu Biological Park)… ये नाम सुनते ही दिल में एक ख़ास कशिश पैदा होती है। यहां दिखते हैं एल्डाबरा कछुए (Aldabra tortoises), जिनकी ज़िंदगी सदियों पुरानी है, उम्र के जिनके पैमाने में हमारी पीढ़ियां कितनी छोटी लगती हैं। और फिर Andaman Green Pigeon, जिसके पंखों पर हरा रंग ऐसे चमकता है जैसे किसी ने ज़मीन पर इंद्रधनुष उतार दिया हो।
रोमांच की पुकार
केवल देखना ही नहीं, कुछ करना भी है यहां। स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग (Snorkeling and Scuba Diving) करें तो आपको अंदाज़ा होगा कि ये नीला समंदर अपनी गहराइयों में क्या ख़ज़ाने छुपाए बैठा है। रंग-बिरंगी मछलियां, मूंगे की चट्टानें, ये वो मंज़र है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देता है कि आख़िर ये जहां इतना हसीन क्यों है। और अगर आपको ऊंचाई से प्यार है तो मुंडा पहाड़ स्थित लाइटहाउस तक का सफर करें। वहां से पूरे टापू का नज़ारा देखना किसी ख़्वाब से कम नहीं।

और कुछ पास के चमन
कुछ कदम और चलें तो कालापत्थर बीच, यहां के काली चट्टानें जैसे किसी कहानी के गवाह हों। वंडूर बीच की शांति भी आपको खुद में खोने पर मजबूर कर देगी। रास्ते में पड़ता है वो ऐतिहासिक सेल्युलर जेल, जो अंडमान की सिर्फ़ ख़ूबसूरती नहीं, बल्कि गुलामी के दर्द और जुनून की भी दास्तान सुनाती है। ये जगहें चिड़िया टापू की यात्रा को और भी मुकम्मल बना देती हैं।

चिड़िया टापू- जहां हर परिंदा आपको खुद को खोजने का मौका देता है
चिड़िया टापू सिर्फ़ एक सैलानी जगह नहीं, ये एक एहसास है। यहां हर पत्ता बोलता है, हर लहर कोई संदेश सुनाती है, और हर परिंदा आपको खुद को खोजने का मौका देता है। अगर आप वहां जाएं, तो जल्दी मत करें। बैठें, सांस लें, देखें, और महसूस करें कि प्रकृति ने कितनी मुहब्बत से इस छोटी सी ज़मीन को सजाया है। चिड़िया टापू आपको बुलाता है— सुनने, देखने, और अपने आप को फिर से पाने।
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