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अरनमुला कन्नड़ी: मशीन नहीं, हाथों का जादू है, GI Tag और 500 सालों का भरोसा, इस आइने में समाई केरलम की रुह

आज के दौर में हर इंसान कामयाबी के पीछे भाग रहा है। बड़ी-बड़ी कंपनियों के मालिक, छोटे कारोबारी, हर कोई चाहता है कि उसकी तरक्की हो, उसके काम में बरकत आए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केरलम (Keralam) के एक छोटे से गांव अरनमुला (Aranmula Village) में बनने वाला एक जादुई आइना अरनमुला कन्नड़ी आपकी तकदीर बदल सकता है?

ये आइना आम नहीं, ख़ास है

अरनमुला कन्नड़ी यानी अरनमुला का दर्पण (The Aranmula Mirror) आम शीशे की तरह नहीं होता। हम रोज जो आइना इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे एक रंगाई (कोटिंग) होती है जो वक्त के साथ उतर जाती है। लेकिन इस आइने के पीछे कोई रंगाई नहीं है।

फोटो सौजन्य- aranmulamirrors

ये एक खास धातु (Metal Alloy) से बनता है।  तांबा और टिन का एक अनोखा मेल। इसे बनाने का तरीका कोई मशीन नहीं, बल्कि 500 साल पुरानी परंपरा सिखाती है। एक आइना बनने में दो हफ्ते से ज्यादा का वक्त लग जाता है।

कैसे बनता है ये कमाल का आइना?

सबसे पहले कारीगर तांबा और टिन को एक ख़ास मिक्सचर में पिघलाते हैं। फिर उसे सांचे में ढाला जाता है। इसके बाद शुरू होती है मशक्कत की रातें। आइने को नारियल के छिलके से रगड़कर पॉलिश किया जाता है। हां, आपने सही सुना- नारियल का छिलका। 

फिर एक ख़ास औज़ार ‘अरुवा’ से उसके पीछे नक्काशी की जाती है। इसी नक्काशी से आइने में वो चमक और साफ-सुथरा अक्स (reflection) आता है। ये प्रोसेस कई बार दोहराया जाता है। आखिर में पीतल या चांदी का हाथ से बना फ्रेम लगाया जाता है।

फोटो सौजन्य- विकिपीडिया

क्यों है ये आइना इतना ख़ास?

दोस्तों, ये सिर्फ आइना नहीं, ये केरल की रूह है। इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। तिरुवनंतपुरम के राजा ने तमिलनाडु से 8 कारीगरों को बुलवाया, ताकि वे मंदिर के लिए ये आइना बनाएं। तब से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आ रही है।

सबसे बड़ी बात – भारत सरकार ने इसे जीआई टैग (Geographical Indication) दिया है। यानी जो आइना सिर्फ अरनमुला गांव में उसी परंपरागत तरीके से बनेगा, वही ‘अरनमुला कन्नड़ी’ (Aranmula Kannadi) कहलाएगा। बाकी सब नकली।

फोटो सौजन्य-zishta

कारोबारियों के लिए वरदान

केरल में ऐसी मान्यता है कि ये आइना सुख-समृद्धि और किस्मत की चाभी  है। शादी, गृह प्रवेश जैसे मौकों पर इसे तोहफे में दिया जाता है। ऐसा विश्वास है कि इसे ऑफिस में सम्मानजनक जगह पर रखने से निगेटिव एनर्जी भागती है और पॉजिटिव वाइब्रेशन आती है।

फोटो सौजन्य-विकिपीडिया

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2017 में बहरीन के राजा को ये आइना गिफ्ट किया था। लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में भी एक 45 सेंटीमीटर लंबा अरनमुला आइना रखा है।

 ये आइना पूरी तरह हाथ से बनता है और काफी महंगा होता है। लेकिन एक बार ख़रीद लिया तो जिंदगी भर साथ देता है, बिल्कुल वफादार दोस्त की तरह।

ये भी पढ़ें:  ‘दक्षिणी तहज़ीब’ का चेहरा और केरल की सांस्कृतिक ‘पहचान’ हैं कासरगोड की हथकरघा साड़ियां

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