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Guru Gobind Singh जी की 200 साल पुरानी पेंटिंग की मरम्मत जारी, बलविंदर कुमार कर रहे संरक्षण

अमृतसर के सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में रखी Guru Gobind Singh जी की करीब 200 साल पुरानी एक ऐतिहासिक पेंटिंग की इस समय बहुत सावधानी से मरम्मत की जा रही है। ये पेंटिंग महाराजा रणजीत सिंह के दौर में बनाई गई थी और सिख संगत के लिए ये सिर्फ़ एक तस्वीर नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ी एक अनमोल धरोहर है। इस पवित्र काम की ज़िम्मेदारी गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था ने संभाली है और इसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) भी पूरा सहयोग कर रही है।

कांगड़ा कला की विरासत

19वीं सदी की शुरुआत में महाराजा रणजीत सिंह और कांगड़ा के राजा संसार चंद के बीच अच्छे रिश्ते थे। इन्हीं रिश्तों के ज़रिए महाराजा रणजीत सिंह को Guru Gobind Singh जी की उस तस्वीर के बारे में पता चला, जो गुरु जी के ज़िंदा रहते बनाई गई थी। महाराजा रणजीत सिंह चाहते थे कि श्री दरबार साहिब में भी Guru Gobind Singh जी की ऐसी ही एक तस्वीर हो। इसके लिए उन्होंने कांगड़ा के राजा से बात की। फिर उस कलाकार के पोते को बुलाया गया, जिसने पहले गुरु जी की तस्वीर बनाई थी।

उसी कलाकार ने दोबारा ये पेंटिंग बनाई, जो आज भी श्री दरबार साहिब में संगत के दर्शन के लिए रखी हुई है। इस पूरी कहानी की सबसे ख़ास बात ये है कि आज जो शख़्स Guru Gobind Singh जी की पेंटिंग की मरम्मत कर रहा है, बलविंदर कुमार, वो उसी कांगड़ा कला परंपरा से जुड़े हुए हैं। इस बारे में बलविंदर कुमार कहते हैं, “गुरु साहिब ने हमें ये सेवा करने का मौक़ा दिया है। सब कुछ गुरु के हुक़्म से ही हो रहा है।”

पहाड़ी कला से जुड़ा सफ़र

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के कांगरी गांव के रहने वाले बलविंदर कुमार ने पहाड़ी मिनिएचर पेंटिंग में पीएचडी की है और वो एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर भी हैं। अगस्त 2025 से शुरू हुई इस सेवा के लिए वो शिमला से अमृतसर बार-बार आते हैं। ज़्यादातर वीकेंड पर वो हरिमंदिर साहिब पहुंचकर इस काम को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि, “सेवा में वक़्त की कोई गिनती नहीं होती। काम जैसे गुरु साहिब चाहते हैं, वैसे ही आगे बढ़ता है।”

बलविंदर कुमार के मुताबिक, इस मरम्मत में किसी भी तरह की नई या मॉर्डन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। सब कुछ पुराने तरीकों से ही किया जा रहा है। नेचुरल रंगों और पुराने ज़माने की फ्रेस्को टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पेंटिंग का असली रूप और उसका रूहानी नूर बना रहे। उनका कहना है, “हम वही तरीका अपना रहे हैं, जो पहले इस्तेमाल होता था। Guru Gobind Singh जी का नूर आज भी वैसा ही है।”

पहले भी कर चुके हैं ऐसी सेवा

ये पहली बार नहीं है जब बलविंदर कुमार को सिख इतिहास से जुड़ी इतनी बड़ी सेवा मिली हो। साल 2021 में उन्होंने बाबा बकाला साहिब में गुरु तेग बहादुर जी की एक पुरानी पेंटिंग की मरम्मत भी की थी। उस समय को याद करते हुए बलविंदर कुमार बताते हैं, “जब बाबा बकाला साहिब की सेवा पूरी हुई और मेरा दुमाला बांधा गया, तब मैंने अपने बाल काटना भी बंद कर दिया।” उन्होंने साफ़ कहा कि ये फैसला उनका अपना था, किसी के कहने पर नहीं लिया गया। आख़िर में बलविंदर कुमार कहते हैं, “Guru Gobind Singh जी ने ही हमें इस सेवा के लायक समझा और इससे जोड़ा।”

इस लेख को अंग्रेज़ी और पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें: 2 घंटे 40 मिनट में रचा इतिहास: ‘Operation Sindoor’ पर तैयार की 20×40 की अनोखी पेंटिंग

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