Monday, November 2, 2026
29.4 C
Delhi

बांस के हुनर से दीपावली की सजावट को दे रहे नया अंदाज़, मिलिए भोपाल के ‘Bamboo Man’ से

दीपावली का त्योहार हो और घर की सजावट की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। कोई रंग-बिरंगी लाइट्स से घर सजाता है, तो कोई फूलों और खूबसूरत सजावटी सामान से। लेकिन भोपाल के धर्मेंद्र रोहर का अंदाज़ कुछ अलग है। वो बांस और दूसरी कुदरती चीज़ों से ऐसी खूबसूरत सजावटी चीज़ें बनाते हैं, जो घर की रौनक बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण को बचाने का पैगाम भी देती हैं।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले धर्मेंद्र रोहर पिछले 20 साल से भोपाल में बांस शिल्प के काम से जुड़े हैं। उन्हें ये हुनर अपने परिवार से विरासत में मिला है। परिवार की इस पुरानी कला को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया है। आज वो बांस को अपनी रचनात्मक सोच और मेहनत से खूबसूरत सजावटी सामान में बदल रहे हैं। उनकी बनाई कलाकृतियों में तोरण, लटकन, लैंप और घर की सजावट में इस्तेमाल होने वाली कई दूसरी चीज़ें शामिल हैं।

पारंपरिक हुनर को दिया नया डिज़ाइन

धर्मेंद्र रोहर की ख़ासियत ये है कि वो पारंपरिक बांस शिल्प को आज के दौर की पसंद और ज़रूरतों के साथ जोड़कर नए डिज़ाइन तैयार करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि बांस से बनी चीज़ें सिर्फ़ देखने में ख़ूबसूरत न हों, बल्कि उनका इस्तेमाल भी किया जा सके। यही वजह है कि उनकी कलाकृतियों में पुराने हुनर और नए अंदाज़ का अच्छा मेल देखने को मिलता है।

अब तक धर्मेंद्र बांस शिल्प की 105 तरह की कलाकृतियां अलग-अलग डिज़ाइन में तैयार कर चुके हैं। वो त्योहारों और ख़ास मौक़ों को ध्यान में रखकर नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। दीपावली के लिए दरवाज़ों पर लगाने वाली तोरण, घर में सजाने के लिए लटकन और रोशनी के लिए लैंप जैसी चीज़ें उनकी इसी सोच का हिस्सा हैं।

Image: PB SHABD

आज के समय में जब लोग पर्यावरण के अनुकूल चीज़ों को अपनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, तब बांस से बनी कलाकृतियां सजावट का एक अच्छा ऑप्शन बन सकती हैं। बांस एक कुदरती सामग्री है और इससे कई तरह की उपयोगी चीज़ें तैयार की जा सकती हैं। धर्मेंद्र रोहर भी अपने काम में बांस के साथ दूसरी कुदरती सामग्रियों का इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं, वो काम के दौरान बची हुई सामग्री को फेंकने के बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल करके नई चीज़ें बनाते हैं। इससे सामान की बर्बादी कम होती है और उपलब्ध सामग्री का बेहतर इस्तेमाल हो पाता है।

95 वर्कशॉप के ज़रिए लोगों तक पहुंचाया बांस शिल्प का हुनर

धर्मेंद्र रोहर का काम सिर्फ़ बांस से कलाकृतियां तैयार करने तक महदूद नहीं है। वो चाहते हैं कि ये पारंपरिक हुनर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और नई पीढ़ी भी इससे जुड़े। इसी मक़सद से वो अब तक 95 वर्कशॉप आयोजित कर चुके हैं। इन वर्कशॉप में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ दिव्यांग बच्चे और महिलाएं भी शामिल हुए हैं। इन वर्कशॉप के ज़रिए धर्मेंद्र लोगों को बांस शिल्प की बारीकियों से रूबरू कराते हैं। वो बताते हैं कि किस तरह बांस को अलग-अलग आकार देकर उससे ख़ूबसूरत और काम की चीज़ें बनाई जा सकती हैं। साथ ही, पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने और कुदरती चीज़ों के इस्तेमाल के बारे में भी जागरूकता बढ़ती है।

आज धर्मेंद्र रोहर ‘Bamboo Man of Bhopal’ के नाम से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उनका काम स्थानीय कारीगरों के हुनर, पारंपरिक हस्तशिल्प और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने की एक अच्छी मिसाल है। दीपावली के मौक़े पर उनकी बनाई कलाकृतियां एक ख़ास पैगाम देती हैं कि त्योहार की सजावट के लिए महंगे या प्लास्टिक से बने सामान पर ही निर्भर रहना ज़रूरी नहीं है। बांस और दूसरी कुदरती चीज़ों से भी घर को ख़ूबसूरत बनाया जा सकता है। इससे न सिर्फ़ पर्यावरण का ख्याल रखा जा सकता है, बल्कि धर्मेंद्र जैसे स्थानीय कारीगरों की मेहनत और हुनर को भी पहचान मिलती है।

ये भी पढ़ें- रणकपुर जैन मंदिर: अरावली की गोद में बसा और संगमरमर से तराशा गया इतिहास का नायाब नगीना

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

जलाल लखनवी: रिंदाना मिज़ाज और दिलकश अंदाज़ के शायर

उर्दू शायरी की दुनिया में जलाल लखनवी ने अपने...

Topics

जलाल लखनवी: रिंदाना मिज़ाज और दिलकश अंदाज़ के शायर

उर्दू शायरी की दुनिया में जलाल लखनवी ने अपने...

नूह नारवी: दाग़ देहलवी के जानशीन और उर्दू ग़ज़ल के ख़ूबसूरत शायर

उर्दू अदब की तारीख़ में कुछ शख़्सियत ऐसी हैं...

आल-ए-अहमद सुरूर: उर्दू अदब को नई सोच और पहचान देने वाले शायर

उर्दू अदब की दुनिया में कुछ नाम ऐसे हैं,...

Related Articles

Popular Categories