Bihar (बिहार) को अगर करीब से समझना है, तो सिर्फ़ उसके इतिहास के पन्ने पलटना काफी नहीं है। यहां की मिट्टी में बसी लोक कला, हाथों से तैयार किए गए शिल्प, धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराएं भी बिहार की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। अब Bihar (बिहार) की इसी रंग-बिरंगी पहचान की झलक 65 पीएम स्मृति चिन्हों में देखने को मिल रही है। PM Mementos e-Auction 2026 (पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026) में Bihar (बिहार) से जुड़े इन स्मृति चिन्हों को शामिल किया गया है।
इनमें मधुबनी और मंजूषा चित्रकला, सिक्की शिल्प, मिथिला पाग, ऐतिहासिक शख़्सियतों से जुड़ी कलाकृतियां और कई धार्मिक स्थलों की तस्वीरें शामिल हैं। यानि एक ही संग्रह में बिहार की कला, तहज़ीब, आस्था और इतिहास की कई कहानियां समाई हुई हैं।
मधुबनी की रंगों भरी दुनिया
Bihar (बिहार) की पहचान की बात हो और मधुबनी चित्रकला का ज़िक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। इस संग्रह में मिथिला और मधुबनी कला की कई ख़ूबसूरत कलाकृतियां शामिल हैं। इनमें राम -सीता विवाह, राम दरबार, छठ पूजा, दस महाविद्या और पवित्र यंत्रों को चित्रों के ज़रिए दिखाया गया है। रामायण की कहानी को कछनी शैली की मधुबनी चित्रकला में भी उतारा गया है। इसके साथ ही संग्रह में मिथिला पाग भी शामिल हैं। पाग मिथिला की ख़ास पहचान है, जिसे सिर पर पहना जाता है। इन पाग पर मधली और कमल जैसे पारंपरिक डिज़ाइन हाथ से बनाए गए हैं। हर डिज़ाइन अपने साथ मिथिला को लोक परंपरा की एक छोटी-सी कहानी लेकर चलता है।

जब हुनर बन जाता है पहचान
Bihar (बिहार) की विरासत सिर्फ़ चित्रों तक सीमित नहीं है। यहां के हाथों का हुनर भी इस संग्रह में अपनी जगह बनाता है। सिक्की घास से बने शिल्प बिहार की पुरानी कारीगरी की याद दिलाते हैं। इस संग्रह में सिक्की से बना नए संसद भवन का मॉडल भी शामिल है। इसके अलावा पारंपरिक सिक्की टोकरी और दूसरे उपयोगी सामान भी हैं।
एक बांस की सूप पर बनाई गई मधुबनी कलाकृति भी ख़ास है। इसमें लोक चित्रकला और रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीज़, दोनों एक साथ दिखाई देते हैं। वहीं भागलपुर की मंजूषा कला बिहार की एक और ख़ास लोक कला है। संग्रह में मंजूषा शैली की एक कलाकृति में भारत माता और भारत का नक्शा दिखाया गया है। पीले, हरे और लाल रंगों का इस्तेमाल इस कला को और ख़ास बनाता है।

इतिहास और आस्था की भी झलक
इन 65 स्मृति चिन्हों में Bihar (बिहार)के इतिहास और धार्मिक विरासत की भी तस्वीर दिखाई देती है। एक तांबे की प्लेट पर मंगल पांडे की तस्वीर है। ये कलाकृति 1857 की आज़ादी की लड़ाई से जुड़े मंगल पांडे की याद दिलाती है। इसके अलावा अशोक स्तंभ, तख़्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब, भगवान बुद्ध और महावीर स्वामी से जुड़ी कलाकृतियां भी संग्रह का हिस्सा हैं।
Bihar (बिहार) के कई मशहूर धार्मिक स्थलों को भी इन स्मृति चिन्हों में जगह मिली है। इनमें मुंगेर का चंडिका स्थान और बड़ी दुर्गा महारानी, सीतामढ़ी का पुनौरा धाम, भोजपुर का मां अरण्य देवी मंदिर, मुज़फ़्फ़रपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर, गोरखनाथ धाम और कैमूर का मुंडेश्वरी देवी मंदिर शामिल हैं। यानी इन कलाकृतियों में सिर्फ़ इमारतें या तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि बिहार के लोगों की आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं की झलक भी दिखाई देती है।
मशहूर शख़्सियतों की याद भी बिहार की पहचान बनाने वाली कई ऐतिहासिक और मशहूर शख़्सियतों को भी इस संग्रह में याद किया गया है। इनमें जननायक कर्पूरी ठाकुर, आचार्य चाणक्य और गुरु वाल्मीकि से जुड़े स्मृति चिन्ह शामिल हैं। रामायण और दूसरी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी कलाकृतियां भी इस संग्रह का हिस्सा हैं। इस तरह ये 65 स्मृति चिन्ह बिहार की अलग-अलग पहचान को एक साथ सामने रखते हैं।

1,500 रुपये से शुरू होती है कीमत
इन स्मृति चिन्हों की कीमत 1,500 रुपये से लेकर 1,20,000 रुपये तक तय किए गए हैं। यानी जो लोग Bihar (बिहार) की कला और विरासत को करीब से समझना या अपने पास रखना चाहते हैं, उनके लिए ये संग्रह एक ख़ास मौका है। PM Mementos e-Auction 2026 (पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026) का 8वां संस्करण 2 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन उपलब्ध है। पूरी सूची, नीलामी से जुड़ी जानकारी और इसमें शामिल होने का तरीका ऑफ़िशियल पोर्टल https://pmmementos.gov.in/#/ पर देखा जा सकता है।
इन 65 स्मृति चिन्हों को सिर्फ़ नीलामी में रखी गई चीज़ों के तौर पर देखना शायद कम होगा। इनमें बिहार के रंग हैं, कारीगरों का हुनर है, धार्मिक आस्था है और इतिहास की यादें भी हैं। हर कलाकृति अपने अंदाज़ में बिहार की एक कहानी कहती है।
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