इमैजिन..एक ऐसी झील, जहां सुबह की पहली रोशनी पहाड़ों की चोटियों से उतरकर शांत पानी पर बिखरती हो। चारों ओर घने जंगल हों, हवा में जंगली फूलों की ख़ुशबू घुली हो और पहाड़ी झरनों का साफ़ पानी बिना रुके झील को ज़िंदगी देता रहता हो। ये किसी कहानी की जगह नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश की Glaw Lake (ग्लॉ झील) है। पूर्वी हिमालय की ऊंची पहाड़ियों के बीच, घने जंगलों की आगोश में सिमटी ये झील बरसों से बिना किसी शोर के अपनी दुनिया आबाद किए हुए थी। पहाड़ी झरनों का मीठा पानी इसकी रूह को सींचता रहा, हवाएं इसकी सतह को सहलाती रहीं और जंगल इसकी हिफ़ाज़त करते रहे।
आज इसी ख़ामोश झील को पूरी दुनिया ने एक नई पहचान दी है। Glaw Lake (ग्लॉ झील) को भारत की 101वीं रामसर साइट का ऐलान किया गया है। ये सिर्फ़ एक सरकारी ऐलान नहीं, बल्कि उस कुदरती ख़ज़ाने की तस्दीक़ है, जिसकी हिफ़ाज़त सदियों से जंगल, पहाड़ और यहां के लोग मिलकर करते आए हैं। सबसे ख़ास बात ये है कि अरुणाचल प्रदेश की ये पहली रामसर साइट है। यानी अब इस स्टेट की एक वेटलैंड भी दुनिया की उन चुनिंदा जगहों में शामिल हो गई है, जिन्हें इंसानी विरासत ही नहीं, बल्कि पूरी धरती की अमानत माना जाता है।

जहां पानी सिर्फ़ बहता नहीं, ज़िंदगी लिखता है
Glaw Lake (ग्लॉ झील) कामलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के बीच मौजूद एक बेहद मीठे पानी की झील है। ये कोई आर्टिफिशियल झील नहीं है, यहां सालभर पहाड़ों से उतरते झरने इसे पानी देते रहते हैं। शायद इसी वजह से यहां हर मौसम का अपना एक अलग रंग है। कभी धुंध झील को अपनी चादर में छिपा लेती है, तो कभी सूरज की किरणें इसके पानी पर सोने-सी चमक बिखेर देती हैं। यहां की ख़ामोशी भी बोलती है। पत्तों की सरसराहट, दूर कहीं किसी परिंदे की आवाज़ और झरनों की रवानी मिलकर ऐसा मंज़र बनाते हैं, जिसे शब्दों में पूरी तरह बयान करना आसान नहीं।
एक झील लेकिन अपने भीतर पूरी कायनात समेटे हुए
Glaw Lake (ग्लॉ झील) की असली दौलत उसका साफ़ पानी नहीं, बल्कि उसके आसपास बसने वाली ज़िंदगी है। इस इलाके में 150 से ज़्यादा पेड़ों की प्रजातियां और 49 तरह के जंगली आर्केड पाए जाते हैं। हर पेड़, हर फूल और हर पौधे इस जंगल की पहचान है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे जैव विविधता का बेहद अहम इलाका मानते हैं। ये झील हमें सिखाती है कि कुदरत की सबसे बड़ी ताक़त उसकी रंग-बिरंगी दुनिया में छिपी होती है। जहां हर छोटा-बड़ा जीव, हर पौधा और हर बूंद एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।

रामसर साइट यानी दुनिया का एहतिराम
दुनिया में बहुत-सी झीलें हैं, लेकिन कुछ जगहों की अहमियत सरहदों से कहीं आगे होती है। ऐसी ही वेटलैंड्स को रामसर साइट का दर्जा दिया जाता है। साल 1971 में ईरान के रामसर शहर में एक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था, जिसे रामसर कन्वेंशन कहा जाता है। इसका मक़सद उन जल क्षेत्रों की हिफ़ाज़त करना है, जो धरती के पर्यावरण और जैव विविधता के लिए बेहद ज़रूरी हैं। जब किसी झील को ये दर्जा मिलता है, तो दुनिया ये मान लेती है कि उसकी हिफ़ाज़त सिर्फ़ एक देश की नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत की ज़िम्मेदारी है।
अरुणाचल की वादियों के नाम एक नया फ़ख्र
Glaw Lake (ग्लॉ झील) को मिली ये पहचान अरुणाचल प्रदेश के लिए किसी इज़्ज़त अफ़ज़ाई से कम नहीं। ये पहली बार है जब स्टेट के किसी वेटलैंड को इंटरनेशनल पहचान मिली है। इससे न सिर्फ़ इस इलाके के जंगलों, पानी और वन्यजीवों की हिफ़ाज़त को नई ताक़त मिलेगी, बल्कि यहां रहने वाले स्थानीय समुदायों के लिए भी टिकाऊ रोज़गार और प्रकृति आधारित पर्यटन के नए रास्ते खुल सकते हैं।

जब एक संख्या, एक कहानी बन जाती है
भारत 1 फरवरी सन 1982 में रामसर कन्वेंशन का हिस्सा बना था। साल 2014 तक देश में सिर्फ़ 26 रामसर साइट्स थी। आज ये संख्या बढ़कर 101 हो चुकी है। ये सिर्फ़ आंकड़ों का सफ़र नहीं, बल्कि उस सोच का सफ़र है जो ये समझती है कि विकास तभी मुकम्मल है, जब जंगल, झीलें, नदियां और उनमें बसने वाली ज़िंदगी भी महफ़ूज़ रहे। कुछ ख़ूबसूरतियां सिर्फ़ देखने के लिए नहीं होतीं उन्हें बचाने के लिए भी होती हैं।
Glaw Lake (ग्लॉ झील) आज भी वहीं है पहाड़ों की आगोश में, जंगलों की पनाह में और झरनों की रवानी के साथ। ये पहचान हमें भी एक पैग़ाम देती है कुदरत की सबसे बड़ी दौलत उसकी ख़ामोशी में छिपी होती है। अगर हम उसे सुनना सीख लें, तो शायद आने वाली नस्लों के लिए भी यही झीलें, यही जंगल और यही परिंदों की आवाज़ें महफ़ूज़ रह सकें। ग्लॉ झील की कहानी सिर्फ़ एक झील की कहानी नहीं, बल्कि उस रिश्ते की कहानी है जो इंसान और कुदरत को एक-दूसरे से जोड़ता है। और शायद यही रिश्ता हमारी सबसे बड़ी विरासत भी है।
ये भी पढ़ें: Dal Lake की जादुई सुबहें और Dilawar Khan की फूलों से भरी विरासत
आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।



