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Namda Carpet: कश्मीर की सदियों पुरानी ‘नमदा कालीन’ की विरासत को बचा रही महिलाएं

जम्मू-कश्मीर की वादियां न सिर्फ़ अपनी ख़ूबसूरती के लिए मशहूर हैं, बल्कि यहां की हस्तकला भी दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान रखती है। इन्हीं में से एक है ‘नमदा कालीन’, (Namda Carpet)जो सदियों से कश्मीर की संस्कृति और कारीगरी का बेमिसाल नमूना रहा है। लेकिन समय के साथ ये कला धीरे-धीरे गुम होने लगी। अब एक नई पहल के तहत, श्रीनगर के सैदा कदल इलाके में महिलाएं इस पुराने हुनर को फिर से जीवित कर रही हैं।

नमदा क्या है? फ़ारसी से कश्मीर तक का सफ़र

नमदा, जिसे फ़ारसी में ‘नमद’ कहा जाता है, ऊन से बना एक ख़ास तरह का कालीन होता है। ये आम कालीनों से अलग होता है क्योंकि इसे बुना नहीं जाता, बल्कि ऊन को दबाव और नमी देकर तैयार किया जाता है। इसकी खासियत ये है कि ये न सिर्फ़ गर्माहट देता है, बल्कि इस पर की गई कढ़ाई कश्मीर की कला और संस्कृति को बयां करती है।

क्यों खो रही थी ये अनूठी कला?

कभी मुगल बादशाहों के दरबार की शान रही नमदा कला (Namda Carpet), आधुनिक समय में मशीनों और सस्ते कालीनों के आगे पिछड़ने लगी। कारीगरों को मेहनताना कम मिलता था, युवाओं का रुझान इस ओर कम हो गया, और धीरे-धीरे यह कला विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई।

लेकिन अब जम्मू-कश्मीर सरकार और हस्तशिल्प विभाग ने इसे दोबारा से जिंदा करने की मुहिम शुरू की है। सैदा कदल में नमदा ट्रेनिंग सेंटर खोला गया है, जहां महिलाओं को इस पारंपरिक कला की ट्रेनिंग दी जा रही  है।

कैसे बनता है नमदा? हर कदम में छुपी है मेहनत

नमदा (Namda Carpet) बनाने का प्रोसेस किसी जादू से कम नहीं है। इसे तैयार करने में कई चरण होते हैं, और हर स्टेप में कारीगर की मेहनत और सब्र झलकता है:

ऊन की सफाई: सबसे पहले ऊन को अच्छी तरह साफ किया जाता है।

परत बनाना: ऊन को हाथों से फैलाकर मोटी परतें बनाई जाती हैं।

गीला करना: इन परतों को कपड़े पर रखकर पानी से गीला किया जाता है।

दबाव और रोलिंग: अब शुरू होता है असली कमाल, ऊन को बार-बार लपेटकर रोल किया जाता है, जिससे रेशे आपस में जुड़कर मजबूत कालीन का रूप लेते हैं।

कढ़ाई और डिज़ाइन: लास्ट में, कश्मीरी कारीगर इसे हाथ से कढ़ाई करके ख़ूबसूरत पैटर्न देते हैं।

हमारी कला, हमारी पहचान – महिलाओं का जज्बा

सैदा कदल के ट्रेनिंग सेंटर में 20 से ज़्यादा महिलाएं नमदा (Namda Carpet) बनाने की कला सीख रही हैं। इमरान अहमद शाह, जो हस्तशिल्प विभाग से जुड़े हैं, बताते हैं –’ये कला मुगलों के ज़माने से चली आ रही है। जैनुलाब्दीन बादशाह ने इसे नई पहचान दी। हम इसे फिर से जीवित कर रहे हैं।’

इन महिलाओं के लिए यह सिर्फ़ रोज़गार नहीं, बल्कि गर्व की बात है। वे न सिर्फ़ अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं, बल्कि कश्मीर की विरासत को भी बचा रही हैं।

नमदा की खासियत: सर्दियों का साथी, कला का अद्भुत नमूना

  • गर्म और मुलायम: नमदा ऊन से बना होता है, इसलिए यह सर्दियों में बेहद गर्माहट देता है।
  • हैंडमेड और यूनिक: हर नमदा पर अलग डिज़ाइन होता है, जो इसे ख़ास बनाता है।
  • इको-फ्रेंडली: ये पूरी तरह प्राकृतिक और टिकाऊ होता है।

क्या है फ़्यूचर? कश्मीर की कला को दुनिया तक ले जाना

सरकार की योजना है कि नमदा कालीनों (Namda Carpet) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, क्राफ्ट मेलों और एक्सपोर्ट के ज़रिए इसे ग्लोबल पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

नमदा सिर्फ़ एक कालीन नहीं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर है। इस कला को बचाने के लिए चलाई गई मुहिम न सिर्फ़ रोज़गार पैदा कर रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही है। अगर आप कभी कश्मीर जाएँ, तो एक नमदा कालीन ज़रूर ख़रीदें – यह सिर्फ़ एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक इतिहास है, एक कहानी है। 

ये भी पढ़ें: इस्मत चुग़ताई: उर्दू अदब की बुलंद आवाज़ और बेबाक कलम की शख़्सियत 

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